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टीवी पर सीरियल तो सबने देखे होंगे। अगर हम खुद न देखते हों, हमारे घर पर कोई एक तो ज़रूर रहता  है जो रोज़ अपने मनपसंद सीरियल देखे बिना रह नहीं सकता। घंटों तक सास-बहू के झगड़े, पुनर्जन्म की कहानियां, और इच्छाधारी नागिनों की वाहियात हरकतें हमारा दिमाग खराब कर देतीं हैं। पर एक बात बताऊँ? यह सीरियल दिखने में कितने ही अजीबोगरीब और वाहियात क्यों न लगें, यह हमें कुछ ऐसे संस्कार सिखाते हैं जो हमारी महान सभ्यता की नींव है। जिनके बिना हमारा जीना ही बेकार है।

क्या आपने किसी भी सीरियल में बहू को नौकरी करते, दोस्तों के साथ घूमते, अपनी ज़िंदगी अपने तरीके से जीते हुए देखा है? क्या किसी सीरियल वाली बहू के बारे में हम यह जानते हैं कि उन्होंने कहां तक पढ़ाई की है, और उनका फ़ेवरेट सब्जेक्ट क्या था? मैंने तो नहीं देखा। और देखेंगे भी कैसे? भाई, बहू का काम होता है सास की चापलूसी करना, पति को मनाना, महंगी साड़ी और पांच किलो सोना पहनके खाना बनाना और बर्तनों के साथ कभी कभी लैपटॉप धो देना।

आखिर एक सुशील, संस्कारी, आदर्श औरत तो वही है जिसे पति की सेवा करने और सास ननद के ताने सुनने से फुर्सत न हो। अब वे आज़ादी और आत्मसम्मान की बात करने लगें तो उनकी खड़ूस सास के हार्ट अटैक के लिए कौन ज़िम्मेदार होगा? आप ही बताइए? देखें, कुछ ऐसी ही मज़ेदार चीज़ें हो टीवी सीरियल्स हमें सिखाते हैं।

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