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समाज की पितृसत्तात्मक सोच से हर तबके की महिला हताश है। पितृसत्ता का सीधा धावा महिला के अधिकारों पर होता है। उनके स्वयं निर्णय लेने की क्षमता खुद के लिए चुनाव करना इस प्रकार के सभी हक़ों की बागडोर महिला के हांथों सौपने से पुरुष प्रधान समाज काँपता है। शायद यही वजह है कि महिलाओं को हमेशा उनकी आज़ादी के लिए उनके हक़ों के लिए विरोध करते रहना पड़ा है। लेकिन आज भी इस सदी में भी हर तबके की महिला चाहे वो किसी भी धर्म की हो कोई भी कार्य करती हो उसे आज भी इस ग़ैर बराबरी का सामना करना पड़ता है। हमारा समाज जैसे ही देखता है कि उसकी और धर्म की खिंची लकीर को कोई महिला लांघकर निकल गई बस ऐसे में सभी उसे पाठ पढ़ाना अपना जन्मसिद्ध अधिकार समझ बैठते हैं। इससे कोई तबका अछूता नहीं है।

दो साल पहले टेलीविज़न की सुप्रसिद्ध अदाकारा ऋचा सोनी ने शादी की। लेकिन जब लोगों को ये पता चला कि उन्होंने एक मुसलमान व्यक्ति से अपनी इच्छा से शादी की है तो धर्म के ठेकेदारों ने सोशल मीडिया पर उन्हें बहुत परेशान किया, अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया गया और ये तक कह डाला की वो लव जिहाद के चंगुल में फँसी हैं जिसका उन्होंने पुरज़ोर विरोध हाल ही में एक खुले ख़त से किया, जिसमें उन्होंने लिखा कि जिनसे वो प्यार करती थीं उन्होंने उससे शादी की, ये एक ‘इंटरफ़ेथ शादी’ थी। ‘मैं एक हिन्दू महिला हूँ जिसने एक मुसलमान पुरुष से शादी की लेकिन जो चीज़ सबसे ज़्यादा ज़रूरी थी वो थी धर्म से बढ़कर वो प्यार जिसने हमें एक किया, और हमने सोचा की बस यही काफ़ी है। मेरे अपनों ने मेरा साथ दिया और मेरा अच्छा चाहा, लेकिन मुझे नहीं पता था की मुझे इतनी नफ़रत और ट्रोल्स का सामना करना पड़ेगा सिर्फ़ इसीलिए क्योंकि मैंने एक मुसलमान से शादी की।” ऋचा सोनी ने आगे लिखा की किस तरह उन्हें नफ़रत भरे कमेंट्स से परेशान किया गया। ये कहा गया कि मैं लव जिहाद के चक्कर में फँस गई, लव जिहाद एक ऐसा शब्द जो औरतों के ख़ुद के अधिकार और उनकी अपनी संस्था पर रोक लगा सके।

ऋचा सोनी ने न सिर्फ़ इस पत्र में खुलकर अपनी बात रखी। बल्कि जातिय पितृसत्ता पर भी धावा बोला उन्होंने कहा कि ‘मैंने तो जातिय पितृसत्ता को एक अलग स्तर पर चुनौती दे दी। एक मुसलमान से शादी करके। मैं जानती हूँ की इस नफ़रत की जड़ महिला के जीवन को और उसकी इच्छाओं को काबू करने की है और जब भी महिला पितृसत्ता की खिंची लकीर को पार करती है तो समाज और कट्टरपंथी विचारधारा उनपर धावा बोलती है। वो कट्टरपंथ उन महिलाओं पर हमला करते हैं जो अपने विचार खुलकर व्यक्त करती हैं, लेकिन मैं चुप नहीं रहूंगी मैं इस पितृसत्तात्मक और नारी द्वेष वाली सोच के ख़िलाफ़ बोलूंगी जो एक आज़ाद खुद के फ़ैसले लेने वाली और अपना जीवन अपनी इच्छा से जीने वाली महिला को बर्दाश्त नहीं कर सकते। एक ऐसी महिला जो समाज के पितृसत्तात्मक नियमों को नहीं मानती।

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ऋचा सोनी ने हाल ही में इन सभी नफ़रत भरे अभद्र कमेंट्स लिखने वाले एकाउंट्स के ख़िलाफ़ मुंबई पुलिस में रिपोर्ट भी दर्ज करायी है और ये तक कहा की उनकी शिक्षा ने कभी भी उन्हें धार्मिक कट्टरता और नफ़रत करना नहीं सिखाया।

ऋचा ऋचालिखती हैं कि जब भी महिला पितृसत्ता की खिंची लकीर को पार करती है तो समाज और कट्टरपंथी विचारधारा उनपर धावा बोलती है।

कब तक लव जिहाद के नामपर फैलाई जायेगी नफ़रत?

लव जिहाद एक ऐसा शब्द है जिसे बार-बार तभी उछाला जाता है जब एक हिन्दू या ईसाई लड़की एक मुसलमान लड़के से शादी करती है। इस शब्द के बारे में कट्टरपंथियों का कहना है कि लड़कियों का जबरन धर्म-परिवर्तन करवाया जाता है और ये एक साज़िश है हालाकि ऐसे तथ्य सामने नहीं आये हैं।

ये शब्द सबसे पहली बार केरल में सुनाई दिया था जिसे न्यायालयों ने भी ग़लत ठहराया। लव जिहाद हिन्दू कट्टरपंथियों का वो शब्द है जो महिलाओं के जीवन को पितृसत्ता और मनुवादी सोच में जकड़कर रखना चाहते हैं। ये एक ऐसी डुगडुगी है जो तब बजाई जाती है जब एक हिन्दू या ईसाई महिला अपनी इच्छा अनुसार एक मुसलमान से शादी करती हैं। इसके भीतर इस्लामोफ़ोबिया तो है ही और कई बार इस शब्द को सियासी मुद्दों का मरकज़ बनाकर भी पेश किया गया है। इसलिए ये कहना सही होगा की लव जिहाद जैसा शब्द कई परतों तक गहरा है। इस शब्द में मुसलमान और हिन्दू के बीच एक झूठी दीवार खड़ी कर देने की कोशिश है, जिसे कोई डर के मारे फांद न सके। हिन्दू कट्टरपंथ नहीं चाहते की उनके धर्म की महिलाएं इस काबिल हो जो अपने फ़ैसले ले सके। ये शब्द महिला के खुद पर अधिकारों का भी हनन करता है।

कई बार कट्टरपंथ ये भी कह डालते हैं कि हिन्दू लड़कियों को बहलाया फुसलाया और फ़ंसाया जाता है। ऐसी भाषा न सिर्फ़ ये जताती है कि महिलाओं को इतना भोला और लाचार समझा जा रहा है बल्कि ये भी की वो  इतनी परिपक्व नहीं हैं कि अपनी ज़िंदगी का फ़ैसला ले सकें। लव जिहाद का इस्तेमाल सियासी मुद्दों के लिए साम्प्रदायिकता को बढ़ावा देना और जनता के मन में ऐसी शंकाए पैदा करना है। वहीँ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ साल 2014 में ये कहते हुए नज़र आये थे की अब कोई जोधाबाई अकबर के साथ नहीं जायेगी, अब सिकंदर अपनी बेटी चन्द्रगुप्त मौर्य को दे जायेगा। इस तरह की बयानबाज़ी भी हमें ये साफ़तौर पर बता रही है की लव जिहाद एक सियासी प्रचार प्रसार की नीति है वहीं ये भी दिखाया जा रहा है की किस तरह महिलाओं को एक वस्तु की तरह समझा जा रहा है जिसकी अपनी कोई सूझबूझ सहमति देने का कोई हक़ और समझ नहीं है।

इस बीच बेटी बचाओ की गुहार में सियासत उन वयस्क परिपक्व लड़कियों को भी घसीट रही है जिनकी अपनी समझ बूझ है। इन दलीलों में जहाँ ये कहा जा रहा है की लड़कियों को फ़ंसाया जाता है, ये उसी मनुवादी सोच से निकलती है जो बताती है कि महिलाओं को उसके हर उम्र के पढ़ाव पर रक्षा की ज़रूरत है। ऐसे में हमें ज़रूरत है इस शब्द की गहराई में जाकर अपने दिमाग़ खोलकर इसकी राजनीति को समझने की।

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तस्वीर साभार : laughingcolours

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2 COMMENTS

  1. bevkooffo ki taddat badh rahi hai … abhi punjabs mein ek mohammed shafiq ne apna Aman hindu banakar ek ladki ko ghar se paisa lejar bhagaya aur for uska murder kar diya … jab uss ladki ko pata chal ki woh ek musalman hai aur woh useey zabardasti musalmaan banana chahta hai ……!!yeh news tiwari aunty kab natayengi yeh tisra case hai … bahi ek hindu mhila ne shikaiat dali thi ki …ek aur musalman ne usey hindu batakar sex rape kiya aur ab jaakr 2 saalbaad woh pakda gaya hai ..kerala mein christian aur hindu ne milkar iska viruodh kiya hai ,,,,, aur waha ke communist govt ne bhi iski dakhal li hai …! love jihad sach hai aur koim bhi aurat itni bevkoof nahi ban sakti ki woh aise mazhab mein khud ho kar khudkushi karne jayengi

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