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जिस देश में शादी की उम्र 21 से 22 होती है, बच्चे पैदा करने की सही उम्र 25 से 30 साल तक होती है। उस देश में अपने मन का काम करने की क्या कोई उम्र होती है? जिस देश में पढ़ाई करने के पीछे एक मात्र वजह नौकरी लेना होता है, क्या उस देश में इससे किसी को कोई फ़र्क़ पड़ता है कि हम जो काम कर रहे हैं उससे हमें ख़ुशी मिलती भी है या नहीं? स्टीव जॉब्स ने स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में दिए गए अपने भाषण में कहा था कि हर एक इंसान अपने जीवन का एक बहुत बड़ा समय अपने काम को देता है इसलिए ये बहुत ज़रूरी है कि हम एक ‘महान काम’ करें। महान काम को परिभाषित करते हुए वे कहते है कि कोई भी ऐसा काम जिससे आप प्यार करते हो, वही महान काम है। वह ये भी कहते है कि ये ढूंढने के लिए की आपको किस काम से प्यार है, आपको अलग-अलग काम ट्राई करने होंगे। तभी आप ये समझ पाएंगे कि कौन-सा काम ऐसा है जिसमे आपकी रूचि है, जो आप जीवन भर करना चाहेंगे।    

साफ़ तौर पर प्रयोग बहुत ही जरूरी है। अलग-अलग विकल्पों के बारे में सोचना ज़रूरी है इससे पहले कि यह फैसला लिया जाए कि जीवन भर क्या काम करना है। लेकिन भारत जैसे देश में अपने करियर के किसी भी दौर में क्या हम लोग प्रयोग कर सकते हैं? क्या हमारे परिवार और समाज हमें अलग-अलग करियर विकल्प के बारे में सोचने की आजादी देते हैं? क्या हमारे पास इतनी छूट होती है कि कम से कम हम अपने करियर के शुरुआती दौर में बेझिझक जो मन करे, वह काम कर सकते हैं बिना इस बात की फिक्र किए कि हम सफ़ल होंगे या असफ़ल? क्या हमारे घर, परिवार और समाज अपने बच्चों को ये कहते हैं कि बच्चे जो दिल में आए वो करो, हम तुम्हारे साथ हैं। 

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हम सब जानते है कि हमारे देश के अधिकांश बच्चे संपन्न परिवारों से नहीं आते हैं। जिस देश के एक बहुत बड़े तबके की एक सच्चाई आज भी गरीबी है, उस देश में पैसा कोई विकल्प नहीं है, बल्कि वह जरूरत है, यह समझ आता है। लेकिन सिर्फ पैसा कमाने को नौकरी और पढ़ाई का एकमात्र उद्देश्य मान लेना कहां तक उचित है? क्या हमारे परिवारों में बच्चों को इतनी आज़ादी दी जाती है कि वे अपने करियर का फैसला लेने से पहले कुछ समय थोड़ा एक्सपेरिमेंट कर लें कि आखिर वे करना क्या चाहते हैं? एक्सपेरिमेंट करने की आज़ादी देने का मतलब हमारे समाज में समझा जाता है अपने बच्चों को फ़ेल, असफ़ल होते हुए देखना। करियर के साथ एक्सपेरिमेंट करने देने का मतलब होता है अपने बच्चों को हारते हुए देखना। इसका मतलब होता है अपने बच्चों को अनिश्चितता के दौर से गुज़रते देखना। इसका मतलब होता है अपने बच्चों को पूरी मेहनत करने के बावजूद हताश होते हुए देखना, कुछ वक़्त के लिए वित्तीय सुरक्षा को छोड़ देना। लेकिन सवाल यह है कि क्या हमारे घरों और परिवारों में ऐसा होता है? क्या हमारे अभिभावक, रिश्तेदार हमारे साथ खड़े होते हैं जब हम हमारे करियर के सफ़र में एक जोखिम भरा कदम उठाते हैं?

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जिस देश में बच्चे के पैदा होते ही उसकी होने वाली फैमिली की प्लानिंग कर ली जाती है, क्या उस देश के बच्चों को करियर प्लानिंग करने दी जाती है?

आम-तौर पर वे हमारे साथ खड़े होने की जगह हमारे फ़ैसलों पर ही सवाल उठा देते हैं। कई दफ़े अगर हम असफ़ल हो जाए तो यह तक कह देते हैं कि अच्छी-खासी नौकरी छोड़ी ही क्यों थी, अब भुगतो और अगर ये न भी कहे तो, संघर्ष के इन दिनों में जब वो युवा/ बच्चा बार-बार असफ़ल होता है तो उसे एक सपोर्ट-सिस्टम की बेहद ज़रूरत होती है, उस समय परिवार हिम्मत देने की जगह उसे अकेला छोड़ देते हैं। यही नहीं, संघर्ष के इन दिनों में जब अलग-अलग विकल्प ट्राई करने के बावजूद भी यह समझ नहीं आता कि कौन-सा विकल्प बेहतर है, तब परिवार के ही लोग हमारे फैसला लेने की क्षमताओं तक पर सवाल उठा देते हैं और अगर इस प्रकार के एक्सपेरिमेंट करने की हिम्मत लड़की कर ले, तो उसका घर से बाहर निकलना तक बंद करवा दिया जाता है। शायद इसीलिए की आकाश में बैठे पक्षी का तो पूरा आसमान होता है, लेकिन उड़ते हुए पक्षी का कोई नहीं होता।

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इस प्रकार के व्यवहार को ये कहकर सही ठहराया जाता है कि कब तक ये सब चलेगा। शादी-ब्याह भी तो करना है। अगर आर्थिक रूप से ही नहीं सक्षम नहीं होंगे तो शादी कैसे होगी, रिश्ता तय करने में भी तो वक़्त लगेगा, शादी के बगैर फिर बच्चे कैसे होंगे और फिर 30 के बाद तो बच्चे में भी समस्या आएगी। जिस देश में बच्चे के पैदा होते ही उसकी होने वाली फैमिली की प्लानिंग कर ली जाती है, क्या उस देश के बच्चों को करियर प्लानिंग करने दी जाती है? जिस देश में 20 से 30 की उम्र सेटल होने की होती है, 30 से 40 की उम्र बच्चों और घर के लिए पैसा जोड़ने की होती है, 40 से 60 की उम्र उन बच्चों को ब्याहने की होती है और 60 से 70 की उम्र अपना बुढ़ापा  निकालने की होती है, क्या उस देश में अपना करियर बनाने के लिए कोई उम्र नहीं होती? करियर बनाने का मतलब सिर्फ पैसा कमाना नहीं होता। कुछ लोगों के लिए ये वो काम करना होता है जो उन्हें पसंद है। तो क्या हमारे देश में अपना मनपसंद काम में ही करियर बनाने के लिए कोई उम्र नहीं होती?

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तस्वीर साभार : DNA

Sonali is a lawyer practicing in the High Court of Rajasthan at Jaipur. She loves thinking, reading, and writing.

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