स्वास्थ्यशारीरिक स्वास्थ्य पी फॉर पैरेंटिंग : जानें, नई माओं के लिए पोषण क्यों ज़रूरी है ?

पी फॉर पैरेंटिंग : जानें, नई माओं के लिए पोषण क्यों ज़रूरी है ?

अगर गर्भावस्था या स्तनपान के दौरान माताओं की खाने की आदतें स्वस्थ नहीं होती हैं तो इससे बच्चे के स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव हो सकते हैं।


पी फॉर पैरेंटिंग के चौथे एपिसोड में अनुभा और अंजलि बात कर रही हैं कि न्यू मदर्स के लिए पोषण क्यों महत्वपूर्ण है? इस पॉडकास्ट में डॉ तनुजा खुराना उनका साथ देती हैं। तनुजा सेलिब्रिटी न्यूट्रिशनिस्ट और डाइटीशियन हैं। डॉ तनुजा को दंत चिकित्सक के रूप में 20 से अधिक वर्षों का अनुभव है। पोषण और आहार में रुचि के कारण दंत चिकित्सक होने के नाते, वह पूर्णकालिक पोषण विशेषज्ञ बन गईं। वह मेलबोर्न विश्वविद्यालय से एक डिग्री के साथ एक प्रमाणित पोषण विशेषज्ञ है।बातचीत की शुरुआत इस सवाल से होती है कि नई माताओं के लिए पोषण क्यों महत्वपूर्ण है? सवाल का जवाब देते हुए डॉक्टर तनुजा बताती है कि गर्भावस्था के दौरान, माताओं का वजन आमतौर पर बड़ जाता है। 8-9 सप्ताह के अंतराल के बाद, वजन कम करना महत्वपूर्ण है, लेकिन माँ को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि शिशु को स्तनपान और पोषण की कमी न हो। स्तनपान कराने के लिए एक निश्चित प्रकार के आहार की आवश्यकता होती है, जिस पर ध्यान दिया जाना चाहिए। उसने यह भी बताया कि स्तनपान कराने वाली मां की डाइट उन लोगों से अलग होनी चाहिए जो फार्मूला फीडिंग करते हैं। माँ की खान-पान की आदतें हमेशा बच्चे के स्वास्थ्य को प्रभावित करती हैं, खासकर जो स्तनपान करवाती है। यदि गर्भावस्था के दौरान और यहां तक ​​कि स्तनपान कराने के दौरान माताओं की खाने की आदतें स्वस्थ नहीं होती हैं, तो इससे बच्चे के स्वास्थ्य पर दीर्घकालिक दुष्प्रभाव हो सकते हैं। बच्चों में मोटापा, उच्च कोलेस्ट्रॉल प्रभाव, या शुगर का स्तर बढ़ सकता है।

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आगे सवाल कीटो डाइट को लेकर किया जाता है जो आजकल चलन में है डॉक्टर तनुजा इस बारे में बताती हैं कि कीटो डाइटक प्लान एक उच्च प्रोटीन डाइट (खुराक) है डाइट में कार्ब्स का सेवन सीमित करना, स्वस्थ वसा (Healthy Fat) का सेवन बढ़ाना और ज्यादा मात्रा में प्रोटीन (Protein) खाना शामिल है। दूसरे शब्दों में रोटी चावल ना लेकर प्रोटीन को खुराक में शामिल किया जाता है इसके जहां एक तरफ फायदे हैं जैसे ब्लड शुगर कम हो जाता है इंसुलेशन कम हो जाता है परंतु इसके साइड इफेक्ट ज्यादा देखने को मिलते हैं न्यूट्रिशन डिफेक्शन हो जाता है जिसके चलते सर दर्द, गैस की समस्या, भूख चीजें देखने को मिलते हैं इसलिए जो कीटो डाइट है वह बॉडी टू बॉडी डिपेंड करती है कि किसको ज्यादा फायदा हो सकता है तथा किसी को इससे नुकसान हो सकता है। कीटो खुराक में हमें यह भी देखना पड़ता है कि व्यक्ति शाकाहारी है या गैर शाकाहारी क्योंकि शाकाहारी के लिए कई सब्जी और फल शामिल नहीं कर सकते। इस बात पर भी निर्भर करता है कि कीटो डाइट किस व्यक्ति के लिए हैं। अगर कीटो डाइट खासकर शाकाहारी व्यक्ति के लिए बनाई जा रही है तो यह देखना भी बहुत जरूरी है की प्रोटीन के विकल्पों की उपलब्धता है या नहीं। डॉक्टर तनुजा कीटो डाइट की तुलना में एक संतुलित भोजन या खुराक की बात करती हैं जो सभी नॉर्मल बॉडी टाइप के लिए फायदेमंद हो जैसे सोयाबीन, मूंग दाल, हरी बींस, सम्यक चावल, स्वीट कॉर्न, ब्रोकली इत्यादि इनमें भरपूर मात्रा में प्रोटीन होता है।

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अनुभा एक महत्वपूर्ण विषय उठाती हैं कि यदि गर्भावस्था के दौरान किसी महिला को डायबिटीज हो जाती है तो उससे बचने के लिए क्या सावधानी बरती जा सकती है। डॉक्टर तनुजा बताती हैं कि डायबिटीज से इनसोलेशन बनना बंद हो जाता है। हार्मोन में गढ़बढ़ी हो जाती है परंतु वह बताती हैं कि यह एक प्रकार की जस्टेबल डायबिटीज है। जो खुद ही 85 फ़ीसद से 90 फ़ीसद तक ठीक हो जाती है। बहुत थोड़े ही लोग होते हैं जो इसको जारी रख पाते हैं। डायबिटीज आगे ज़ारी न हो इसके लिए जरूरी है कि एक प्रोफेशनल डाइट की तरफ जाया जाए तथा फिजिकल एक्टिविटीज शारीरिक गतिविधियां पर भी ध्यान देने की जरूरत है। एक महत्वपूर्ण बात की ओर इशारा करती है की महिला को हमेशा पीलर ऑफ द हाउस कहा जाता है परंतु यदि वही महिला ठीक से अपने खान-पान का ध्यान नहीं रखेंगे खुद के बारे में नहीं सोचेंगे तो यह पिलर ऑफ द हाउस डगमगा भी सकता है इसके लिए जरूरी है। अपने इम्यूनिटी पर ध्यान देना चाहिए। इम्यूनिटी बनाने के लिए 50 फ़ीसद हमें अपनी डाइट पर ध्यान देना है और 50 फ़ीसद हमें एक्सरसाइज करनी है। कोविड महामारी के चलते घर पर भी एक्सरसाइज कर सकते हैं जैसे स्कीपिंग स्पोर्ट्स जोगिंग साथ ही कुछ अन्‍य चीजों का ध्यान रखना चाहिए जैसे स्लीपिंग पेटर्न, ईटिंग हैबिट्स इत्यादि।

डॉक्टर तनुजा इंटरमिटेंट फास्टिंग को भी बॉडी के लिए ज्यादा उपयोगी नहीं बताती है। उनके अनुसार यह एक ऐसा डाइट प्लान है जिसमें लंबे समय तक भूखे रहकर मील स्किप करना होता है। साथ ही किस समय भोजन करना है और किस समय नहीं, ये पहले से तय होता है। कुछ लोग 12 घंटे के अंदर ही अपने मील्स ले लेते हैं तो कुछ 14 से 18 घंटे तक कुछ नहीं खाते है। इस फास्टिंग में जब भी भोजन किया जाता है, तब कार्बोहाइड्रेट्स की मात्रा कम और प्रोटीन व फाइबर की मात्रा अधिक लेने पर फोकस किया जाता है जिससे कि शरीर का वजन भी कम होने में मदद मिलती है।  इंटरमिटेंट फास्टिंग आप कब तक कर सकते हैं यह आपकी बॉडी पर डिपेंड करता है इसके लिए आपको मानसिक तौर पर बहुत मजबूत होना पड़ता है वरना इसके साइड इफेक्ट ज्यादा दिखाई दे सकते हैं और साथ ही डाइट हमारे मोनपोस तथा मेंसुरेशन को भी प्रभावित करती है इसलिए ज्यादा छोटी उम्र में लड़कियां में पीरियड होने लगी हैं उनके पीरियड्स आने लगे हैं यह बदलाव हमारे खानपान से ही देखने को मिलता है डॉक्टर तनुजा अंत में बताती हैं कि पेंरेंटिंग (पालन पोषण) आज एक बहुत चुनौतीपूर्ण कार्य है और हमें इसीलिए अपने दिमाग में सही या गलत पेरेंटिंग का विचार निकाल देना चाहिए। हमें सिर्फ अपने बच्चों की जरूरतों को ध्यान में रखना चाहिए कोई भी पेरेंट परफ़ेक्ट नहीं होता, इसी तरह कोई भी बच्चा भी परफ़ेक्ट नहीं हो सकता।

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मुझे यात्राएं करनी पसंद है क्योंकि उन यात्राओं से हम हमेशा कुछ नया सीखते हैं साथ ही मुझे गढ़े हुए शब्द तथा उनसे जुड़े हुए सामाजिक संदर्भ या जेंडर संबंधों को चुनौती देना पसंद है।

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