FII Hindi is now on Telegram

एंडोमेट्रियोसिस सोसाइटी ऑफ इंडिया के अनुसार भारत में लगभग 25 मिलियन और अमरीका में 5.5 मिलियन महिलाएंं एंडोमेट्रियोसिस की शिकार हो रही हैं। एंडोमेट्रियोसिस शरीर की एक दर्दनाक स्थिति है जिसमें गर्भाशय के बाहर गर्भ के अंदरूनी अस्तर का विकास होने लगता है। आसान शब्दों में समझे तो वे टिशूज़ जो सामान्य रूप से गर्भाशय के बाहर होते हैं वे इस स्थिति में गर्भाशय के बाहर बढ़ने लगते हैं। ज्यादातर मरीजों में यह अंडाशय, फैलोपियन ट्यूब (अंडाशय को गर्भाशय से जोड़ने वाली नली) या गर्भाशय और अंडाशय के आसपास होता है। हालांकि कुछ दुर्लभ मामलों में यह शरीर के अन्य भागों में जैसे मूत्राशय या आंतों में भी हो सकती है। इस स्थिति के कई लक्षण पीरियड्स की आम समस्याओं के जैसे ही होते हैं। अकसर पीरियड्स के बारे शिक्षा, जागरूकता की कमी या संकोच के कारण एंडोमेट्रियोसिस का पता नहीं चलता। चिकित्सा के दुनिया में अब तक इस बीमारी का कारण पूरी तरह से स्पष्ट नहीं है। लेकिन कई अन्य कारकों में इस शारीरिक समस्या का परिवार में किसी का इस बीमारी से ग्रस्त होने का इतिहास शामिल है। साल 1993 से एंडोमेट्रियोसिस एसोसिएशन हर साल एंडोमेट्रियोसिस अवेयरनेस महीने के रूप में मार्च में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन करती है और जागरूकता अभियान चलाती है।

एंडोमेट्रियोसिस के लक्षण

एंडोमेट्रियोसिस के कई लक्षण पीरियड्स में होने वाली आम समस्याएं जैसे दर्द, चुभन, अधिक रक्तस्राव के जैसे ही होती हैं। इसलिए कई बार इस बीमारी को समझना और इसका इलाज करना मुश्किल हो जाता है। एंडोमेट्रियोसिस के प्रमुख लक्षणों में पैल्विक दर्द, पीरिड्स के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव, मल त्याग के साथ दर्द और बांझपन शामिल हैं। इस स्थिति में पेल्विक दर्द गंभीर ऐंठन या बहुत तेज़ हो सकता है जो पेल्विक के दोनों तरफ, पीठ के निचले हिस्से, गुदा या पैरों के नीचे तक असर कर सकता है। किसी महिला को हो रहे दर्द की सीमा एंडोमेट्रियोसिस के चरण पर निर्भर करती है। यह पाया गया है कि बांझपन से पीड़ित लगभग एक तिहाई महिलाओं में एंडोमेट्रियोसिस होता है और जिन महिलाओं को यह बीमारी होती है, उन में से लगभग 40 प्रतिशत इस अवस्था के कारण बांझपन का सामना करती हैं। इसके अन्य लक्षणों में दस्त या कब्ज, अत्यधिक थकान, मतली या उल्टी, माइग्रेन, हल्का बुखार, अनियमित पीरियड्स और हाइपोग्लाइसीमिया यानी लो ब्लड शुगर शामिल हैं। वास्तव में किसी भी महिला जिसका पीरियड्स शुरू हो चुका है, उसे यह समस्या हो सकती है। लेकिन आमतौर पर यह जीवन के तीसरे या चौथे दशक में युवा महिलाओं में पाया जाता है। हालांकि, यह बीमारी 40 प्रतिशत मामलों में 20 साल की उम्र के पहले शुरू होती है। कई रिपोर्ट्स के अनुसार भारत में एंडोमेट्रियोसिस के मरीज़ हर साल बढ़ रहे हैं।

और पढ़ें : कोरोना की चपेट में है फीमेल जेनाइटल म्यूटिलेशन, उन्मूलन का रास्ता अभी दूर

एंडोमेट्रियोसिस के चार चरण होते हैं। सबसे पहले चरण को न्यूनतम, उसके बाद हल्का और आखिर में मध्यम और गंभीर एंडोमेट्रियोसिस के रूप में विश्लेषण किया गया है। एंडोमेट्रियोसिस एक वंशगत स्थिति है जो आनुवंशिक और पर्यावरण दोनों वजहों से प्रभावित होती है। एंडोमेट्रियोसिस से पीड़ित लोगों के बच्चे या भाई-बहन को खुद इसका शिकार होने का अधिक खतरा होता है।

Become an FII Member

एंडोमेट्रियोसिस का रोकथाम और इलाज

दुर्भाग्यवश एंडोमेट्रियोसिस का चिकित्सा विज्ञान की दुनिया में दवाइयों द्वारा कोई निश्चित इलाज नहीं है। हालांकि, इस बीमारी को पीरियड्स को बंद करने वाली हॉर्मोनल दवाइयों से रोका जा सकता है। ओपन सर्जरी या लैप्रोस्कोपिक सर्जरी द्वारा प्रभावित क्षेत्र में बढ़ते एंडोमेट्रियोसिस की परत को हटाने से लंबे समय तक के लिए इस समस्या से छुटकारा मिल सकता है। लैप्रोस्कोपिक पद्धति में मरीज को दर्द कम होता है और अन्य रोगों के होने की कम आशंका रहती है। इस प्रक्रिया में अस्पताल में ज्यादा दिन रहना नहीं पड़ता और सामान्य जीवन में जल्दी ही लौटा जा सकता है। इसलिए इसे एंडोमेट्रियोसिस के सबसे अच्छे उपचार के रूप में स्वीकार किया गया है। इस पद्धति से गर्भधारण में बहुत कम असुविधाएं होती हैं और एंडोमेट्रियोसिस के दोबारा होने की संभावना भी बहुत कम होती है। एंडोमेट्रियोसिस के स्थायी इलाज के लिए गर्भाशय और अंडाशय को निकालना आवश्यक होता है।

और पढ़ें : सरोगेसी से जुड़ी जरूरी बातें और भारतीय क़ानून

एंडोमेट्रियोसिस के निदान में आड़े आती संस्कृति

ना सिर्फ भारतीय समाज में बल्कि विदेशों में भी एंडोमेट्रियोसिस के उपचार में रुकावट डालने वाले कारणों में मूल रूप से पीरियड्स और यौन जीवन के बारे में सामाजिक मानदंड, झिझक, अवधारणाएं शामिल हैं। भारतीय समाज में आज भी पीरियड्स और यौन जीवन के बारे चर्चा करना मना है। इसे हमारी संस्कृति के विरुद्ध माना जाता है जो शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक है। साधारणतः पीरियड्स और सेक्स को दर्द या शारीरिक असहजता से जोड़ा जाता है और इसलिए इसके इलाज की मांग करने से महिलाएं परहेज करती हैं। कई रिपोर्टों में यह पाया गया कि जो महिलाएं एंडोमेट्रियोसिस से ग्रसित हुई, उन्होंने लक्षणों की शुरुआत के बाद डॉक्टरों की मदद लेने में लगभग 2.3 साल तक इंतजार किया। लगभग तीन चौथाई महिलाओं को डॉक्टरों की सलाह लेने से पहले कोई गलत इलाज बताया गया।

एंडोमेट्रियोसिस से ना सिर्फ महिलाओं के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को नुकसान होता है बल्कि आर्थिक नुकसान भी होता है। इस अवस्था के कारण पैदा हुई आर्थिक स्थिति का बोझ व्यापक और बहुआयामी है। इसमें प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से महिलाओं या उनके आसपास के लोगों को नुकसान हो सकता है। कामकाजी महिलाओं के कार्य दिनों में कमी, इसके उपचार या लक्षणों के रोकथाम में खर्च, अवसाद या दर्द जैसी स्थितियों का उपचार में आर्थिक नुकसान शामिल है। एंडोमेट्रियोसिस का समय पर निदान और उपचार के लिए जरूरी है कि महिलाओं के पीरियड्स या यौन जीवन के दर्द को चिकित्सकों और परिवार के सदस्यों द्वारा गंभीरता से लिया जाए, इसपर चर्चा करने की छूट हो और दर्द या असहजता का सामान्यीकरण न किया जाए। महिलाओं के पीरियड्स या यौन स्वास्थ्य को संवेदनशीलता और गंभीरता से देखे जाने की आवश्यकता है ताकि ऐसे रोगों का समय पर निदान और इलाज हो सके।

और पढ़ें : क्यों अनदेखा किया जाता है मेनोपॉज के दौरान महिलाओं का शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य


तस्वीर साभार : श्रेया टिंगल फेमिनिज़म इन इंडिया के लिए

कोलकाता के प्रेसीडेंसी कॉलेज से हिंदी में बी ए और पंजाब टेक्निकल यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद बतौर पत्रकार और शिक्षिका मैंने लम्बे समय तक काम किया है। बिहार और बंगाल के विभिन्न क्षेत्र में पले-बढ़े होने के कारण सामाजिक रूढ़िवाद, धार्मिक कट्टरपन्त, अंधविश्वास, लैंगिक और शैक्षिक असमानता जैसे कई मुद्दों को बारीकी से जान पायी हूँ। समावेशी नारीवादी विचारधारा की समर्थक, लैंगिक एवं शैक्षिक समानता ऐसे मुद्दें हैं जिनके लिए मैं निरंतर प्रयासरत हूँ।

Follow FII channels on Youtube and Telegram for latest updates.

नारीवादी मीडिया को ज़रूरत है नारीवादी साथियों की

हमारा प्रीमियम कॉन्टेंट और ख़ास ऑफर्स पाएं और हमारा साथ दें ताकि हम एक स्वतंत्र संस्थान के तौर पर अपना काम जारी रख सकें।

फेमिनिज़म इन इंडिया के सदस्य बनें

अपना प्लान चुनें

Leave a Reply