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फेमिनिज़म इन इंडिया अपने बेहतरीन लेखकों में से एक लेखक को हर महीने उनके योगदान का आभार जताने के लिए फीचर करता है। लेखकों के योगदान के बिना फेमिनिज़म इन इंडिया का सफ़र अधूरा होता। जून की फीचर्ड राइटर ऑफ द मंथ हैं पारुल शर्मा। पारुल शर्मा ने पर्यावरण, लैंगिक हिंसा जैसे मुद्दों पर कई बेहतरीन लेख लिखे हैं। कैसे मानवाधिकार से जुड़ा हुआ है जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण संरक्षण में कितनी अहम है महिलाओं की भूमिका, कैसे फास्ट फैशन के लिए आपकी दीवानगी हमारी प्रकृति के लिए एक खतरा है, गालियों का केंद्र हमेशा महिलाएं ही क्यों होती हैं ? उनके कुछ बेहतरीन लेख में शामिल हैं।

फेमिनिज़म इन इंडिया : अपने बारे में हमें बताएं और आप क्या करती हैं?

पारुल शर्मा : राजस्थान के भरतपुर के ही एक कॉलेज से बैचलर ऑफ आर्ट्स के बाद मैंने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन, नई दिल्ली से हिन्दी पत्रकारिता में स्नातकोत्तर डिप्लोमा और गुरु जांबेश्वर यूनिवर्सिटी, हिसार से मास कम्युनिकेशन में एम.ए. किया। हालांकि करियर के शुरुआती दौर में होने की वजह से शेयर करने के लिए मेरे पास ज्यादा अनुभव तो नहीं हैं लेकिन मैंने डिप्लोमा करने के बाद एक वेब पोर्टल में बतौर कंटेंट राइटर काम किया। उसके बाद इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी में इंटर्नशिप की थी।

फेमिनिज़म इन इंडिया : आप फेमिनिज़म इन इंडिया से बतौर लेखक कैसे जुड़ीं?

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पारुल शर्मा : फेमिनिज्म इन इंडिया से जुड़ने के लिए मैंने इसी साल अप्रैल में इंटर्नशिप के लिए आवेदन किया था लेकिन बैच पूरा हो चुका था। इसके बाद फेमिनिज़म इन इंडिया की तरफ से मुझसे बतौर लेखक जुड़ने के लिए कहा गया। नारीवाद पर अपनी समझ विकसित करने के लिए और उससे जुड़े विभिन्न मुद्दों के बारे में जानने और लिखने के लिए ये अच्छा प्लेटफॉर्म था इसलिए मैं इससे जुड़ी।

फेमिनिज़म इन इंडिया : आप कब और कैसे एक नारीवादी बनीं? नारीवाद से जुड़े कौन से मुद्दे आपके बेहद करीब हैं?

पारुल शर्मा : मेरे लिए नारीवादी होना किसी विशेष घटना से संबंधित नहीं है बल्कि मेरे आसपास के पितृसत्तात्मक माहौल ने मुझे नारीवादी बहुत पहले ही बना दिया था। मैं जब देखती कि कैसे रोजमर्रा के जीवन में लड़कियों के साथ लड़कों से अलग दोयम दर्जे का व्यवहार होता है, उनकी पढ़ाई- लिखाई के साथ कैसे समझौता किया जाता है तो ये चीजें मुझे बहुत परेशान करती थीं लेकिन उस वक्त मैं अधिक विरोध नहीं कर पाती थी। नारीवाद से जुड़े सारे मुद्दे ही वैसे बहुत महत्वपूर्ण हैं लेकिन जो मुद्दा मेरे बेहद करीब है, वह है इकोफेमिनिज्म जो प्रकृति और स्त्री पर आधिपत्य की आलोचना करता है। इसके अलावा हर रोज महिलाओं के साथ होने वाला लैंगिक भेदभाव का मुद्दा भी मेरे करीब है।

फेमिनिज़म इन इंडिया : हमारी वेबसाइट पर प्रकाशित आपके लेखों में से कौन सा लेख आपको सबसे अधिक पसंद है?

पारुल शर्मा : मुझे अब तक लिखे अपने लेखों में पर्यावरण संरक्षण में महिलाओं की भूमिका और महिलाओं पर केंद्रित गालियों की भाषा पर लिखे लेख सबसे अधिक पसंद हैं। अक्सर देखा जाता है कि जब प्राकृतिक संसाधनों और पारिस्थितिकी तंत्र के प्रबंधन की बात आती है, तो महिलाओं की जरूरतों, प्राथमिकताओं और ज्ञान को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है जिससे पर्यावरण संरक्षण के लिए किए जा रहे उपायों में बाधा उत्पन्न होती है। वहीं, गालियों में जैसे महिला विरोधी शब्द इस्तेमाल किए जाते हैं, उस पर भी कोई सवाल नहीं उठाता बल्कि इसके उलट गालियां देना न्यू नॉर्मल की श्रेणी में आ गया है। महिलाओं पर केंद्रित इन गालियों पर संज्ञान लेना बहुत आवश्यक है।

फेमिनिज़म इन इंडिया : जब आप नारीवादी मुद्दों, जेंडर, सामाजिक न्याय पर नहीं लिख रही होती तब आप क्या करती हैं?

पारुल शर्मा : जब मैं इन विषयों पर नहीं लिख रही होती हूं तो किताबें पढ़ती हूं, डांस करती हूं, शतरंज और बैडमिंटन खेलती हूं, फ्लूट म्यूजिक सुनती हूं। अध्यात्म की तरफ झुकाव होने की वजह से इसके बारे में जानने में भी मेरा समय व्यतीत होता है। बाकी का समय सोशल मीडिया पर निकल जाता है।

फेमिनिज़म इन इंडिया : आपको फेमिनिज़म इन इंडिया और हमारे काम के बारे में क्या पसंद है? आप हमसे और किन-किन चीज़ों की उम्मीद करती हैं?

पारुल शर्मा : फेमिनिज़म इन इंडिया महिलाओं के साथ- साथ समाज के हर शोषित वर्ग और पर्यावरण से संबंधित मुद्दों के बारे में लेख प्रकाशित करता है। आपके लेखों में जो भी जानकारी होती है, वह तथ्यों पर आधारित होती है। हर सूचना की जांच- पड़ताल करके ही उसे प्रकाशित किया जाता है। मैं उम्मीद करती हूं कि फेमिनिज़म इन इंडिया आने वाले दिनों में अपनी रिपोर्टिंग टीम तैयार करेगी और जमीनी हकीकत को पाठकों के सामने लाएगा।


(फेमिनिज़म इन इंडिया पारुल का उनके योगदान और उनके बेहतरीन लेखन के लिए आभार व्यक्त करता है। हमें बेहद खुशी है कि वह हमारी लेखकों में से एक हैं। आप पारुल को ट्विटर और इंस्टाग्राम पर फॉलो कर सकते हैं)

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