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देश में महिलों अधिकारों के संरक्षण के लिए राष्ट्रीय महिला आयोग की स्थापना की गई। महिलाओं के खिलाफ किसी भी तरह की हिंसा, शोषण और अपराध को रोकने के लिए, महिला के सामने आनेवाली समस्याओं और उनके खिलाफ होने वाले सभी अपराधों से संबंधित शिकायतों के निस्तारण करने के लिए यह आयोग बनाया गया। महिला की सामाजिक स्थिति में उत्थान लाने और महिलाओं तक उनके अधिकारों की पहुंच के लिए साल 1990 में लोकसभा में एक विधेयक पेश किया गया था। इसी विधेयक के आधार पर राष्ट्रीय महिला आयोग का गठन किया गया। इसका उद्देश्य महिलाओं के संवैधानिक और कानूनी सुरक्षा को सुनिश्चित करना, नीति-निर्माण में उनके लिए उचित सुझावों की सिफारिश करना और महिलाओं को प्रभावित करने वाले मामलों में सरकार को सुझाव देना है, ताकि महिलाएं लोकतांत्रिक प्रक्रिया में समानतापूर्वक एक नागरिक के तौर पर अपने अधिकारों का इस्तेमाल कर सकें।

राष्ट्रीय महिला आयोग का गठन

1990 में केंद्र सरकार द्वारा गैर-सरकारी संगठनों के परामर्श से आयोग की संरचना, शक्ति और कार्यशैली को एक प्रस्ताव के रूप में तैयार किया गया। इसी वर्ष यह बिल लोकसभा मे पेश किया गया। जुलाई में मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने पेश किए गए विधेयक पर चर्चा करने के लिए एक राष्ट्रीय स्तर की कॉन्फ्रेंस बुलाई। अनेक सुझावों के बाद विधेयक में संशोधन किए गए। 30 अगस्त 1990 में विधेयक को राष्ट्रपति की मंजूरी मिली। देश में महिला के अधिकार संरक्षण के लिए 31 जनवरी 1992 में राष्ट्रीय महिला आयोग का गठन किया गया। राष्ट्रीय स्तर के अलावा देश के 29 राज्यों और 7 केंद्रशासित प्रदेशों के अलग-अलग राज्य महिला आयोग का गठन किया गया है। राष्ट्रीय आयोग की तरह राज्य स्तर पर महिला आयोग का कार्य महिलाओं को दिए गए संवैधानिक और विधिक अधिकारों को लागू कराना, महिला हिंसा के खिलाफ़ कानूनी मदद दिलाना और नीति-कानून का समय-समय पर उनका मूल्याकंन कर महिला हित के लिए सुझाव देना है।  

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राष्ट्रीय महिला आयोग का महत्व

भारत एक पितृसत्तात्मक समाज वाला देश है। यहां महिलाओं को हमेशा से एक दोयम दर्जे के इंसान के रूप में देखा जाता है। महिलाओं को रिश्तों और संस्कृति के नाम पर नियंत्रित करने का चलन है। पुरुष प्रधान समाज में महिलाओं की स्थिति को सुधारने और उसे बेहतर करने के लिए कुछ रणनीतियों की आवश्कता है। राष्ट्रीय महिला आयोग देश में महिलाओं के हित और सामाजिक रूप से उनकी उपस्थिति को मजबूत करने के लिए काम करता है। राष्ट्रीय महिला आयोग नीतियों के लिए महिलाओं से संबधी सुझाव भी देता है, जिससे जनसरोकारी योजनाओं में उनकी भागीदारी निश्चित की जा सकें।

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राष्ट्रीय महिला आयोग में मौखिक और लिखित शिकायत दर्ज करवाई जा सकती है। वर्तमान में राष्ट्रीय महिला आयोग में इंटरनेट के माध्यम यानि ऑनलाइन भी शिकायत दर्ज करवाई जा सकती है। राष्ट्रीय महिला आयोग के पास अपनी ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराने के लिए आपको एक फॉर्म भरना होगा।

महिला हिंसा के निवारण, उसके लिए विधायी सुझाव देना। महिलाओं को न्याय दिलाने में मदद करना और उन्हें उचित कानूनी सलाह देने का काम करता है। न्याय की प्रक्रिया में जांच पर पूरी नज़र बनाए रखना। कारागार, रिमांड गृहों में जहां महिलाओं को रखा गया है, उन जगहों का निरीक्षण करना और वहां पर मौजूद समस्या के उपचार के लिए कार्रवाई किए जाने की मांग करना और उनके अधिकारों के बारे में बताना। समय-समय पर महिलाओं के लिए कानूनी और संवैधानिक सुरक्षा उपायों की समीक्षा करना। साथ ही न्याय के लिए ही सिविल न्यायलय की शक्तियों का प्रयोग करना, समन करना, सबूत मांगना और जांच के सबूतों की जांच के लिए कमीशन जारी करना आदि।

राष्ट्रीय महिला आयोग शिकायतकर्ता को कानूनी राहत प्रदान कराता है। शिकायतकर्ता की शिकायतों के निवारण के लिए पुलिस की जांच पर पूरी नजर बनाए रखता है। आयोग के समक्ष बात रखकर गंभीर अपराधों के लिए जांच समिति का गठन करता है। सारी जांच व सबूतों को इकट्ठा कर सर्वाइवर को जल्द से जल्द न्याय दिलाने में मदद करती है। राष्ट्रीय महिला आयोग अपने स्तर पर घटना की जांच करके रिपोर्ट पेश करता है। राष्ट्रीय महिला आयोग में राज्य महिला आयोग, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, राष्ट्रीय अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति आयोग जैसे संगठनों में भी शिकायतकर्ता की सूचना को आगे पहुंचाती है।

राष्ट्रीय महिला आयोग से कैसे एक महिला मदद प्राप्त कर सकती है?

राष्ट्रीय महिला आयोग में एक महिला अपने खिलाफ़ होने वाले अपराधों के विरुद्ध शिकायत दर्ज करावा सकती है। इसमें यौन हिंसा, एसिड अटैक, पीछा करना, ताक-झांक, महिला तस्करी, सेक्स वर्क, उत्पीड़न, साइबर अपराध, महिलाओं के प्रति पुलिस की उदासीनता, विवाहित महिलाओं का उत्पीड़न, दहेज प्रताड़ना, घरेलू हिंसा से महिलाओं की सुरक्षा, बच्चों की कस्टडी का महिला को अधिकार, तलाक, महिला को शादी करने की मर्जी, कार्यस्थल पर महिला के साथ होने वाले यौन अपराध, महिलाओं को मातृत्व का लाभ, शिक्षा और काम के लिए समान अधिकार सहित लैंगिक भेदभाव, कन्या भ्रूणहत्या, सती प्रथा, देवदासी प्रथा जैसे अपराधों के ख़िलाफ़ एक महिला राष्ट्रीय महिला आयोग में अपनी शिकायत दर्ज करा सकती है। राष्ट्रीय महिला आयोग में एनआरआई सेल, लीगल सेल, पीएमआर सेल (पुलिस मॉनिटरिंग एंड रिसर्च सेल) बनाए गए है। उत्तर-पूर्व के आठ राज्यों की महिलाओं की मदद के उत्तर-पूर्व महिला सेल बनाए हुए है। राष्ट्रीय महिला आयोग से पहले महिला राज्य महिला आयोग से भी मदद मांग सकती है।

शिकायत दर्ज कराते समय आवश्यक सूचना

राष्ट्रीय महिला आयोग में शिकायत करने के लिए एक प्रार्थना पत्र दिया जा सकता है। राष्ट्रीय महिला आयोग में शिकायत दर्ज कराने के लिए कुछ संबंधित दस्तावेजों की आवश्यकता होती है। राष्ट्रीय महिला आयोग में शिकायत दर्ज करने के लिए घटना से जुड़ी पूरी जानकारी उससे जुड़े साक्ष्य, घटना से संबंधित कागज, स्वयं और जिसके खिलाफ शिकायत दर्ज की गई है उसके बारें में पूरी जानकारी उपलब्ध करानी होगी।

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शिकायत कैसे दर्ज कराएं

राष्ट्रीय महिला आयोग में मौखिक और लिखित शिकायत दर्ज करवाई जा सकती है। वर्तमान में राष्ट्रीय महिला आयोग में इंटरनेट के माध्यम यानि ऑनलाइन भी शिकायत दर्ज करवाई जा सकती है। राष्ट्रीय महिला आयोग के पास अपनी ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराने के लिए आपको एक फॉर्म भरना होगा। राष्ट्रीय महिला आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध फॉर्म में महिला को अपना नाम, पता, फोन नंबर, जन्मतिथि, और घटना की विस्तार से जानकारी देनी होगी।

यदि केस पहले से किसी न्यायालय में चल रहा है तो उससे संबंधति जानकारी उपलब्ध करानी होगी। आयोग द्वारा महिला को मुफ्त कानूनी सलाह मुहैया करवाई जाती है। आयोग में शिकायत दर्ज होती है तो राष्ट्रीय महिला आयोग की तरफ से एक शिकायत नंबर, ऑनलाइन शिकायत करने पर लॉग इन आईडी दी जाती है। शिकायत स्वीकार की गई है या नहीं उसको पुख्ता करने के लिए आयोग द्वारा प्राप्त शिकायत नंबर और आईडी से इसे कन्फर्म किया जा सकता है। शिकायतकर्ता टेलीफोन और व्यक्तिगत रूप से राष्ट्रीय महिला आयोग में जाकर अपनी शिकायत में हुई कार्रवाई के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकती है।  

आयोग से संपर्क करने के माध्यम

राष्ट्रीय महिला आयोग में फोन के माध्यम से भी शिकायत की जा सकती है। आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध 011-26944880, 26940148, इन नंबरों पर संपर्क किया जा सकता है। फोन नंबर पर सुबह 9 बजे से शाम 5.30 तक सोमवार से शुक्रवार तक संपर्क किया जा सकता है। ऑनलाइन सम्पर्क के लिए वेबसाइट www.ncw.nic.in पर जाकर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।  

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तस्वीर साभारः Live Law

मैं पूजा राठी पश्चिमी उत्तर-प्रदेश के मुज़फ़्फ़रनगर की रहने वाली हूँ। अपने आसपास के माहौल मे फ़िट नहीं बैठती हूँ।सामाजिक रूढ़िवाद, जाति-धर्मभेद, असमानता और लैंगिक भेद में गहरी रूचि है। नारीवाद व समावेशी विचारों की पक्षधर हूँ। खुद को एक नौसिखिया मानती हूँ, इसलिए सीखने की प्रक्रिया हमेशा जारी रखती हूँ।

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