मिलिए अप्रैल 2022 की फीचर्ड राइटर प्रीति से
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फेमिनिज़म इन इंडिया अपने बेहतरीन लेखकों में से एक लेखक को हर महीने उनके योगदान का आभार जताने के लिए फीचर करता है। लेखकों के योगदान के बिना फेमिनिज़म इन इंडिया का सफ़र अधूरा होता। अप्रैल की फीचर्ड राइटर ऑफ द मंथ हैं- प्रीति। प्रीति ने जेंडर, फिल्म रिव्यू, नारीवाद के मुद्दे पर कई बेहतरीन लेख लिखे हैं जिन्हें आप यहां पढ़ सकते हैं।

फेमिनिज़म इन इंडिया : अपने बारे में हमें बताएं और आप क्या करती हैं?

प्रीति: मैंने दिल्ली विश्वविद्यालय से अपनी एमए तक कि पढ़ाई पूरी की है। मुझे किताबें पढ़ना, फिल्में देखना और कविताएं और आलेख लिखना पसंद। जितना मैं लिखने में ठीक हूँ उतनी ही लोगों से आपसी कम्युनिकेशन में कमजोर यही कारण है कि मैं लोगों से जल्दी जुड़ नहीं पाती। प्रोफेशनली तो बेरोज़गारों की भीड़ में हूं, लेकिन पढ़ना-लिखना, विचार-विमर्श करना जारी है और उम्मीद है कि ये जारी रहे ऐसे साम्प्रदायिक माहौल में।

फेमिनिज़म इन इंडिया : आप फेमिनिज़म इन इंडिया से बतौर लेखक कैसे जुड़ीं? 

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प्रीति: मैं पाठक के तौर पर तो इस प्लैटफॉर्म से फेसबुक के माध्यम से जुड़ी थी लेकिन लेखक के तौर पर फेमिनिज़म इन इंडिया के इंटर्नशिप प्रोग्राम के जरिए जुड़ी हूं।

फेमिनिज़म इन इंडिया : आप कब और कैसे एक नारीवादी बनीं? नारीवाद से जुड़े कौन से मुद्दे आपके बेहद करीब हैं? 

प्रीति: मुझे नारीवादी होने में कोई दिक्कत नहीं है लेकिन सच कहूं तो मैंने अभी तक न तो महिलाओं या समाज के लिए कोई काम ही किया है जो मुझे नारीवादी कहा जाए और न ही मुझे ‘वादों’ के टैग की सीमाओं में बंधना पसंद है। रही बात नारीवाद से जुड़े मुद्दों की तो सबसे पहले शिक्षा जो उन्हें स्वतंत्र आत्मनिर्भर और आत्माभिव्यक्ति के लिए जागरूक करे। सेक्सुअलिटी, राजनीति और सामाजिक मुददों पर विचार और भागीदारी।

फेमिनिज़म इन इंडिया : हमारी वेबसाइट पर प्रकाशित आपके लेखों में से कौन सा लेख आपको सबसे अधिक पसंद है?

प्रीति: मेरा पहला लेख मुझे पसंद है जो ‘पितृ पुत्र और धर्मयुद्ध‘ डॉक्यूमेंट्री पर आधारित धार्मिक परम्पराओं के नाम पर स्त्रियों के शोषण को दिखाती है। यह मेरी पहली कोशिश थी किसी डॉक्यूमेंट्री पर लेख लिखने की और दूसरा लेख ‘शीज़ ब्यूटीफुल व्हेन शीज़ एंग्री‘ डॉक्यूमेंट्री जो नारीवादी आंदोलन के इतिहास को दिखाती है जो मुझे काफी पसंद आई और उस पर लिखना भी।

फेमिनिज़म इन इंडिया : जब आप नारीवादी मुद्दों, जेंडर, सामाजिक न्याय पर नहीं लिख रही होती तब आप क्या करती हैं? 

प्रीति: जब मैं इन मुददों पर लिख नहीं रही होती तो किताबें, विभिन्न मुददों पर लेख-आलोचना पढ़ती हूं, इसके अलावा विभिन्न लेखकों को सेमिनारों में सुनना पसंद है।

फेमिनिज़म इन इंडिया : आपको फेमिनिज़म इन इंडिया और हमारे काम के बारे में क्या पसंद है? आप हमसे और किन-किन चीज़ों की उम्मीद करती हैं? 

प्रीति: फेमिनिज़म इन इंडिया के अंतर्गत विभिन्न लेखों के माध्यम से नारीवाद की राजनीतिक, सामाजिक वैचारिकी को समझना और महिलाओं की समस्याओं से सम्बंधित मुददों पर अलग-अलग लोगों के विचारों को पढ़ना पसंद है। इसी के माध्यम से मैंने नए शब्दों, नई परिभाषाओं के बारे में जाना। लेख अक्सर हम खुद पढ़कर लिख देते हैं लेकिन कई लोग जो उन्हें पढ़ते हैं उनके या उनकी राय हम नहीं जान पाते इसलिए ऐसा पैनल डिस्कशन जैसा कुछ शुरू हो जिसमें बच्चों से लेकर बड़े तक कि बातों को रखा जाए सुना जाए मुख्य रूप से जेंडर पर।


(फेमिनिज़म इन इंडिया प्रीति का उनके योगदान और उनके बेहतरीन लेखन के लिए आभार व्यक्त करता है। हमें बेहद खुशी है कि वह हमारी लेखकों में से एक हैं। आप उन्हें फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो कर सकते हैं)

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