इज़ाडोरा डंकन: मॉर्डन डांस को जिसने एक पहचान दी
तस्वीर साभार: Rome Central Magazine
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आज हम एक ऐसी शख़्सियत के बारे में बात करेंगे जिनके लिए नृत्य ही उनका जीवन था। वह थीं अमेरिका की आधुनिक नृत्य की जननी महान इज़ाडोरा डंकन। वह एक डांसर के साथ-साथ लेखिका भी थीं। उनके मरने के बाद उनकी किताब को प्रकाशित किया गया था। उनके जीवन पर बहुत सारी फिल्में भी बनाई गई हैं। लेकिन यहां भी एक महिला के हुनर पर पितृसत्तात्मक समाज हावी हो गया। इज़ाडोरा का ज़िक्र एक महान डांसर के रूप में शायद ही कभी किया जाता है।

इज़ाडोरा डंकन का शुरुआती जीवन और संघर्ष

26  मई 1878 इज़ाडोरा डंकन का जन्म हुआ, सैनफ्रासिस्को के एक बेहद मामूली से परिवार में। इज़ाडोरा की मां ने जोसेफ चार्ल्स से प्रेम विवाह किया था। आयरलैंड में मां-पिता का प्रेम समाज के नियमों के खिलाफ था। इज़ाडोरा डंकन की मां ने समाज के उसूलों से टकराते हुए प्रेम किया और प्रेम विवाह भी किया लेकिन यह विवाह ज्यादा दिन तक नहीं टिक पाया और जल्द ही दोनों ने तलाक ले लिया। उनके परिवार में उनको मिलाकर कुल 5 सदस्य थे।

पिता से अलग होने के बाद उनकी मां ने उन चारों भाई बहनों की परवरिश खुद अकेले की। इज़ाडोरा ने अपनी आत्मकथा ‘माय लाइफ’ में अपने बचपन का ज़िक्र खूबसूरती से किया है। वह अपनी आत्मकथा में नृत्य के बारे में लिखती हैं, “अगर लोग मुझसे पूछते हैं कि मैंने नाचना कब शुरू किया तब मैं जवाब देती हूं- अपनी माँ के गर्भ में।” वह यह भी कहती हैं, “मुझे इस बात का शुक्रगुज़ार होना चाहिए कि जब हम छोटे थे तब मेरी माँ गरीब थी। वह बच्चों के लिए नौकर या गवर्नेस नहीं रख सकती थीं।। इसी वजह से मेरे अंदर एक सहजता है, ज़िंदगी को जीने की एक कुदरती उमंग है, जिसे मैंने कभी नहीं खोया।”

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इज़ाडोरा डंकन का नृत्य और आधुनिक दुनिया

इज़ाडोरा अपने नृत्य के चलते पूरे विश्व भर में मशहूर हो गई थीं लेकिन उनके मशहूर होने के पीछे कितना संघर्ष छिपा था इसे जानने की कोशिश नहीं की गई। शिकागो की सड़कों से शुरू हुआ था उनका जीवन का संघर्ष और उनके नृत्य की शुरूआत भी वहीं से हुई। अपनी मां और भाई-बहन के साथ वह एक शहर से दूसरे शहर, एक देश से दूसरे देश पहुंचती, अपनी कला बिखेरती, लोगों का दिल जीत लेती। उनके जीवन का उतार-चढ़ाव ऐसे ही चलता रहा। इज़ा के सपनों को नयी उड़ान मिली और उनके डांस ने पूरे न्यूयार्क में धूम मचा दी। इज़ा थियेटरों और बड़े हॉल के आयोजनों के अलावा कई बड़े-बड़े घरों के आयोजनों तक पहुंच गई। इज़ा का भाग्य अब न्यूयार्क से लंदन की उड़ान भरना चाहता था। साल 1898 में अमेरिका से वह लंदन चली गईं। उनके शो अमेरिका से लेकर लंदन, रूस, जर्मनी हर जगह मशहूर होते गए। इसके बाद एक शहर से दूसरे फिर तीसरे शहर और देश के सफर का सिलसिला चलता रहा और इज़ा पूरी दुनिया में छा गई।

अपनी मां और भाई-बहन के साथ वह एक शहर से दूसरे शहर, एक देश से दूसरे देश पहुंचती, अपनी कला बिखेरती, लोगों का दिल जीत लेती। उनके जीवन का उतार-चढ़ाव ऐसे ही चलता रहा। इज़ा के सपनों को नयी उड़ान मिली और उनके डांस ने पूरे न्यूयार्क में धूम मचा दी।

इ़ज़ा अपनी कला के चलते देश विदेश के अलग-अलग कलाकारों से मिलती रही और उनकी कला को समझती रहीं। उनकी आत्मकथा में महान कवियों, नाटककारो, संगीतज्ञों, पेंटरों, मूर्तिकारों, दार्शनिक और राजनीतिक व्यक्तियों के बारे में बताया है। महान आदमियों की संगत और स्कूल नहीं जा पाने के कारण लाइब्ररी में उनकी पढ़ने की आदत उनको अपने समय में कला-राजनीति के हर क्षेत्र में महत्वपूर्ण जानकारियां देती रहती थी। उनकी आत्मकथा जैसे दुनिया के बेमिसाल लोगों  से न केवल मिलवाती है, जीवन के महत्वपूर्ण पहलूओं पर उनके विचारों से बहस भी करती है।

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इज़ा जिस कदर नृत्य की दुनिया में अपना नाम कमा रही थीं। पूरे विश्व में उनका नाम काफी मशहूर हो गया था लेकिन उनका प्रेम जीवन उतना अच्छा नहीं रहा। उनके व्यक्तिगत जीवन में हमेशा खलबली मची रहती थी। अगर उनके निजी जीवन की बात करें तो अपने जीवन में प्रेमियों के आने-जाने से इज़ा अधिक विचलित नहीं हुई क्योंकि वह अपने काम में मशरूफ रहती। लेकिन एक कार हादसे में अपने बच्चों की मौत का सदमा इज़ा को ताउम्र रहा। वह इससे कभी उबर नहीं पाई। इससे उबरने के लिए वह फिर गर्भवती हुई पर उनका तीसरा बच्चा भी नहीं बच सका। इसके बाद मरने का ख्याल भी उनके मन में घर करने लगा। इन सभी उठा-पटक के बाद भी उन्होंने डांस करना नहीं छोड़ा। विवाह संबंधों में स्थिरता नहीं रखने के कारण इ़ज़ा का जीवन हमेशा आलोचना के केंद्र में रहा।

खुले हाथों खर्च करनेवाली इज़ाडोरा ने अपने आखिरी दिन बेहद तंगहाली में गुज़ारे। सितंबर 24, साल 1927 की रात उनकी आखिरी ज़िंदगी की आखिरी रात साबित हुई जब उनका स्कार्फ उनकी कार के पहिये में फंस गया और उनकी गर्दन टूट गई। एक महान डांसर की मौत बेहद दर्दनाक रही। इज़ाडोरा जैसी महिला जिसने इतनी परेशानियों के बाद भी हिम्मत नहीं हारी और अपनी कला को दुनिया के सामने लाया और अपना नाम कमाया हमारे लिए एक मिसाल है। उनका संघर्ष संदेश देता है कि महिलाओं का जीवन केवल शादी, बच्चे और घर संभालना नहीं है। इसके अलावा भी अगर उनके पास अपनी कोई कला है तो वे अपनी एक अलग पहचान बना सकती हैं।

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तस्वीर साभार: Rome Central Magazine

स्रोत:

स्त्रीकाल
विकीपीडिया

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