Intersectional Feminism—Desi Style!

इंटरसेक्शनल

पितृसत्ता हमारे घरों में महिलाओं से छीन लेती है उनके इंसान होने का हक़

मैं पितृसत्ता को अपने परिवार में देखती हूं, इसका प्रभाव महिला और पुरुष दोनों में एक़समान पाती हूं और इसमें किसी को कुछ भी ग़लत नहीं लगता।

स्वास्थ्य

तस्वीरों में: नो ब्रा डे पर आज ब्रा को कहिए ना

आज नो ब्रा डे है यानी अपने स्तन के स्वनिरीक्षण का दिन। घर बैठे बैठे ही स्तन की एक छोटी सी जांच आपको स्तन कैंसर के बड़े खतरे से बचा सकती है। कैसे करें ये जांच?

ब्रेस्ट कैंसर : जागरूकता और समय पर जानकारी है असली उपाय

ब्रेस्ट कैंसर से प्रभावित भारतीय महिलाओं की संख्या को देखकर यह कह सकते हैं कि यह महामारी की तरह हमारे देश में तेज़ी से पांव पसार रही है।

विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस : क्या कहते हैं भारत के आंकड़े

10 अक्टूबर विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के रूप में मनाया जाता है। इसका मूल उद्देश्य दुनिया भर में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता फैलाना है।

अदालतों में बढ़ रही हैं गर्भसमापन की अनुमति से जुड़ी याचिकाएं : रिपोर्ट

कानून की उलझनों की वजह से ही उन मामलों में भी गर्भसमापन नहीं हो पाता जिनमें बच्चे के किसी विकृति के साथ जन्म लेने की आशंका थी।

गर्भनिरोध के लिए घरेलू हिंसा का सामना करती महिलाएं

गर्भनिरोधों और परिवार नियोजन के लिए जब महिलाएँ घरेलू हिंसा का शिकार होने लगे तो नतीजा जनसंख्या विस्फोट ही होगा।

कोरोना महामारी के दौरान कहीं पीछे छूट न जाए महिला स्वास्थ्य के मुद्दे

हमारी सामाजिक संरचना ही ऐसी है जिसमें महिलाओं को अपनी शारीरिक समस्या पर सबके सामने बात करने की इजाज़त नहीं होती है।

समाज

ऐश्वर्या श्रीधर : वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर ऑफ़ द ईयर 2020 का खिताब जीतने वाली पहली भारतीय महिला

फोटोग्राफी को एक करियर के तौर पर देखते हुए ऐश्वर्या कहती हैं कि लड़कियां या महिलाएं इस क्षेत्र में आने से हिचकती हैं लेकिन उन्हें इस हिचकिचाहट को अलग रखते हुए केवल अपने सपने के बारे में सोचना चाहिए।

बिहार विधानसभा चुनाव 2020 का चर्चित चेहरा : रितु जायसवाल

रितु जायसवाल बिहार विधानसभा के चुनाव में परिहार क्षेत्र से आरजेडी के टिकट पर चुनाव लड़ रही हैं। वह सिंहवाहिनी पंचायत की मुखिया रह चुकी हैं।

बिहार विधानसभा चुनाव 2020 : जब टिकट ही नहीं मिलता तो सदन तक कैसे पहुंचेंगी महिलाएं

राजनीतिक पार्टियां चुनाव में कितनी महिलाओं को टिकट देती हैं इससे ही साफ़ पता चलता है कि वे महिला आरक्षण बिल लागू करने के लिए कितनी तत्पर हैं।

संस्कृति

धर्म और परिवार : कैसे धर्म औरतों के जीवन पर प्रभाव डालता है

पितृसत्तात्मक मूल्यों से निर्धारित होने के बावजूद पुरुषों की रुचि धार्मिक कर्मकांडों में महिलाओं के मुकाबले कम होती है।

ख़ास बात : बीएचयू की समाजशास्त्र विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर प्रतिमा गोंड से

मुझे कई बार कहा गया कि मैं जाति की राजनीति करती हूं। तो मेरी हर चीज़ में कहीं न कहीं ये जाति का फैक्टर ज़रूर जोड़ा जाता है। चूंकि मैं एक प्रोफेसर हूं, आर्थिक रूप से सशक्त हूं इसलिए मुझे सीधे तौर पर तो कुछ नहीं कहा जाता पर अप्रत्यक्ष तौर पर यह हर बार एहसास दिलाया जाता है।

मिर्ज़ापुर सीज़न 2 : स्त्री द्वेष और हिंसा का कॉकटेल परोसती वेब सीरीज़

मिर्ज़ापुर की कहानी उन कहानियों में से एक है, जिनमें ग़ैर ज़रूरी सेक्स सीन्स और आवश्यकता से अधिक हिंसा भरी गई है। इसके हर दूसरे सीन और डायलॉग के माध्यम से पितृसत्ता और स्री-द्वेष झलकता है।

ट्रेंडिंग

लैंगिक समानता : क्यों हमारे समाज के लिए बड़ी चुनौती है?

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गाँव हो या शहर व्यवहार से लेकर काम तक लैंगिक समानता हमारे समाज में मौजूद है, जो हमारे देश के लिए एजेंडा 2030 को पूरा करने में बड़ी चुनौती है|
इन 15 महिलाओं ने भारतीय संविधान बनाने में दिया था अपना योगदान

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संविधान सभा में हम उन प्रमुख पंद्रह महिला सदस्यों का योगदान आसानी से भुला चुके है या यों कहें कि हमने कभी इसे याद करने या तलाशने की जहमत नहीं की| तो आइये जानते है उन पन्द्रह भारतीय महिलाओं के बारे में जिन्होंने संविधान निर्माण में अपना अमूल्य योगदान दिया है|  
भारत में स्त्री विमर्श और स्त्री संघर्ष: इतिहास के झरोखे से

भारत में स्त्री विमर्श और स्त्री संघर्ष: इतिहास के झरोखे से

भारत में स्त्री संघर्ष और स्त्री अधिकार के आन्दोलन को इसी रूप में स्वतंत्रता आन्दोलन के परिप्रेक्ष्य में देखने की आवश्यकता है|

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पैड खरीदने में माँ को आज भी शर्म आती है

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मासिकधर्म और सैनिटरी पैड पर हमारे घरों में चर्चा करने की बेहद ज़रूरत है और जिसकी शुरुआत हम महिलाओं को ही करनी होगी।
लैंगिक समानता : क्यों हमारे समाज के लिए बड़ी चुनौती है?

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उफ्फ! क्या है ये नारीवादी सिद्धांत? आओ जाने!

उफ्फ! क्या है ये ‘नारीवादी सिद्धांत?’ आओ जाने!

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नारीवाद के बारे में सभी ने सुना होगा। मगर यह है क्या? इसके दर्शन और सिद्धांत के बारे में ज्यादातर लोगों को नहीं मालूम। इसे पूरी तरह जाने और समझे बिना नारीवाद पर कोई भी बहस या विमर्श बेमानी है। नव उदारवाद के बाद भारतीय समाज में महिलाओं के प्रति आए बदलाव के बाद इन सिद्धांतों को जानना अब और भी जरूरी हो गया है।

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इतिहास

नूर इनायत ख़ान : द्वितीय विश्व युद्ध की ‘स्पाई प्रिसेंस’ की कहानी

आखिरी वक्त में भी जब जर्मन सैनिकों ने नूर पर वार करने के लिए अपने हथियार उठाए तो नूर का आखिरी शब्द था 'आजादी'।

सिर्फ प्रेमचंद की पत्नी ही नहीं, एक लेखिका थी शिवरानी देवी

शिवरानी देवी लघुकथाएं लिखती थी। सशक्त महिला किरदारों पर केंद्रित यह लघुकथाएं महिलाओं के जीवन, ख्याल और संबंधित मुद्दों पर प्रकाश डालती हैं।

भारतीय न होकर भी भारत की आज़ादी के लिए लड़ने वाली एनी बेसेंट की कहानी

साल 1893 में एनी बेसेंट ने भारत में कदम रखा। यहां आकर उन्होंने ब्रिटिश शासकों की क्रूरता और दमनकारी नीतियों को ध्यान से देखा और पाया कि भारतीयों को शिक्षा, स्वास्थ्य जैसी बुनियादी जरूरतों से भी दूर रखा जा रहा था।

थर्ड वेव ऑफ फेमिनिज़म : नारीवादी आंदोलन की तीसरी लहर का इतिहास

नारीवादी आंदोलन की तीसरी लहर नारीवादी आंदोलन की वह यात्रा है, जो 1990 के अमेरिका में शुरू हुई और 2010 तक चौथे चरण की शुरुआत तक खत्म हुई।

नारीवाद

चिमामांडा एनगोज़ी अदीची : नारीवाद को आसान भाषा में परिभाषित करने वाली लेखिका

चिमामांडा एनगोज़ी अदीची का मानना है कि 'नारीवाद की यही परिभाषा है कि जो जैसा है उसे वैसे ही रहने देना चाहिए।'

जेसिंडा अर्डरन के बहाने भारत में महिला नेतृत्व की बात | नारीवादी चश्मा

बढ़ती महिला हिंसा की अपनी ज़मीनी हक़ीक़त को देखने के बाद अपने देश में जैसिंडा जैसे महिला नेतृत्व की कल्पना भी बहुत दूर की चीज़ समझ आती है।

राजनीतिक मुद्दों से जुड़ा हुआ है नारीवादी आंदोलन

नारीवादी जब राजनीति के मुद्दों पर बोलते या लिखते हैं, क्या सचमुच वे किसी खतरनाक अजेंडा या षड्यंत्र में शामिल हो जाते हैं?

मज़ाक़ के रिश्ते से बढ़ती बलात्कार की संस्कृति| नारीवादी चश्मा

ज़रूरी है ऐसे हर ‘मज़ाक़ के रिश्ते और उसके व्यवहार’ का विरोध किया जाए, जो महिलाओं के विरुद्ध यौनिक हिंसा को सामान्य बनाते है।

अच्छी ख़बर

ऐश्वर्या श्रीधर : वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर ऑफ़ द ईयर 2020 का खिताब जीतने वाली पहली भारतीय महिला

फोटोग्राफी को एक करियर के तौर पर देखते हुए ऐश्वर्या कहती हैं कि लड़कियां या महिलाएं इस क्षेत्र में आने से हिचकती हैं लेकिन उन्हें इस हिचकिचाहट को अलग रखते हुए केवल अपने सपने के बारे में सोचना चाहिए।

साहित्य में नोबेल पुरस्कार 2020 से सम्मानित हुई कवियित्री लुइस ग्लिक

लुइस ग्लिक कविता के लिए नोबेल पाने वाली पहली अमेरिकी महिला भी हैं। वह दुख और अकेलेपन को बड़ी ही सरलता से कविता का रूप देती थी।

तस्वीरों में: जानिए भारत की 9 महिला किसानों के बारे में

15 अक्टूबर को पूरे देश में महिला किसान दिवस मनाया जाता है। इस मौके पर आज हम आपको मिलवा रहे हैं ऐसी ही 9 महिला किसान/उद्यमियों से।

राजकुमारी देवी : साइकिल चाची से किसान चाची बनने की उनकी पूरी कहानी

बिहार की रहने वाली राजकुमारी देवी, जिन्हें किसान चाची भी कहा जाता, वह पितृसत्ता की हर सीमा लांघ रोज़ एक नई प्रेरक कहानी की नायिका बन रही हैं।