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दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह की मौत से जुड़े केस में उनकी पार्टनर और अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती को सोशल मीडिया पर बलात्कार, जान से मारने की धमकियां दी जा रही हैं, उन्हें बुरी तरह ट्रोल किया जा रहा है। इस पूरे मामले ने एकबार फिर से यह सवाल खड़ा कर दिया है कि अगर किसी महिला/ लड़की का सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म जैसे कि फेसबुक, ट्विटर, लिंकडइन, इंस्टाग्राम या अन्य किसी अन्य सोशल मीडिया प्लैटफार्म पर शोषण किया जाता है, उसे धमकियां दी जाती हैं, ट्रोल किया जाता है तो वे ऐसे साइबर क्राइम के खिलाफ क्या-क्या कदम उठा सकती हैं।

कानून क्या कहता है?

इस सवाल का जवाब पाने के लिए हमें इनफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी अधिनियम 2000 (IT एक्ट 2000) की तरफ रुख करना चाहिए। इस एक्ट के निम्नलिखित प्रावधान पीड़ित महिलाओं और लड़कियों की मदद कर सकते हैं :

  1. धारा 66-E में निजता भंग करने के लिए दंड का प्रावधान है। अगर किसी महिला की सहमति के बगैर उसके प्राइवेट पार्ट की तस्वीर ले ली जाती है, उसे सार्वजानिक किया जाता है तो ऐसा अपराध करने वाले को जुर्माने के अतिरिक्त 3 साल तक की सजा दी जा सकती है।
  1. धारा 67 के तहत अश्लील वीडियो अपलोड करना, उन्हें शेयर करना या रीट्वीट करना अपराध की श्रेणी में आता है। ऐसा करने वालों के खिलाफ अपराध साबित होने पर 3 साल की सजा और अधिकतम 5 लाख रुपए का जुर्माना लगाया जा सकता है। दोबारा यही गलती करने पर और दोषी पाए जाने पर 5 साल की सजा और 10 लाख रुपए तक का जुर्माना भर पड़ सकता है। कुल मिलाकर, इस धारा के अंतर्गत इलेक्ट्रॉनिक फॉर्म में आपत्तिजनक सूचनाओं को साझा करने वालों को दण्डित किया जा सकता है।          
  1. धारा 67-A के तहत इलेक्ट्रिक माध्यमों से सेक्स या अश्लील सूचनाओं को प्रकाशित या प्रसारित करने पर पांच साल तक की सजा और 10 लाख तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। दूसरी बार अपराध साबित होने पर 7 साल तक की सजा और 10 लाख रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।  
  1. धारा 67-B के तहत इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से ऐसी आपत्तिजनक सामग्री का प्रकाशन या प्रसारण जिसमे बच्चों को अश्लील अवस्था में दिखाया गया हो, ऐसा करने वालो को दोषी पाए जाने पर 5 साल तक की सजा दी जा सकती है और 10 लाख रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। दूसरी बार अपराध साबित होने पर 7 साल तक की सजा हो सकती है और 10 लाख रुपए तक का जुर्माना लगाया सकता है।   

साइबर क्राइम की शिकायत दर्ज करने का अधिकार हर पुलिस स्टेशन के पास होता है, इसके लिए ये जरूरी नहीं है कि अपराध उसी जगह हुआ हो।

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IT एक्ट के अतिरिक्त भारतीय दंड संहिता 1860 के कुछ प्रावधान भी ऐसे मामलों में मदद कर सकते है –

  1. धारा 354-A में यौन उत्पीड़न के अपराध का मतलब बताया गया है। अगर किसी महिला को उसकी इच्छा के विपरीत पॉर्नोग्राफी दिखाई जाती है, उससे सेक्सुअल फेवर्स की मांग की जाती है, उस पर सेक्सुअली कलर्ड कमेंट किये जाते है, तो ये सब यौन उत्पीड़न माना जाएगा। इनमे से कोई भी गतिविधि अगर ऑनलाइन स्पेस में होती है जहां पीड़िता का अपराधी के साथ कोई फिजिकल कांटेक्ट नहीं है, तब भी धारा 354-A का उपयोग किया जा सकता है। अपराध साबित होने पर अपराधी को 3 साल और जुर्माने तक की सजा दी जा सकती है।         
  1. धारा 354-C के अंतर्गत जब कोई महिला बगैर कपड़ों के होती है और / या ऐसी अवस्था में होती है जब वो ये उम्मीद रखती है कि कोई उसे नहीं देख रहा है, उस दौरान अगर कोई पुरुष उसकी इच्छा के विपरीत उसकी तस्वीर ले लेता है, उसे प्रकाशित या प्रसारित कर देता है, तो ऐसा अपराध करने वाले पुरुष को 7 वर्ष तक की सजा दी जा सकती है। क़ानूनी भाषा में, इस अपराध को ‘वोयूरिस्म’ कहा जाता है।   
  1. धारा 354-D के अंतर्गत, ‘स्टाकिंग’ के अपराध के बारे में बताया गया है।  इस धारा के अंतर्गत अगर कोई पुरुष किसी महिला के इंटरनेट की उपयोग की जासूसी करता है (जैसे कि ईमेल या दूसरे कोई इलेक्ट्रॉनिक फॉर्म को) तो वह अपराध करने वाला ‘स्टाकिंग’ का दोषी होगा और उसे 3 साल तक की सजा हो सकती है। दोबारा दोषी पाए जाने पर, अपराधी को 5 साल तक की सजा हो सकती है।

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ऐसे अपराधों की शिकायत कैसे कर सकते हैं?   

  1. गृह मंत्रालय, भारत सरकार के पोर्टल ‘cybercrime.gov.in’ के ‘रिपोर्ट वीमेन /चाइल्ड रिलेटेड क्राइम’ के सेक्शन पर जाकर शिकायत दर्ज करवाई जा सकती हैं। इस पोर्टल का उपयोग तभी किया जा सकता हैं जब अपराध इन तीनो में से किसी एक श्रेणी में आए –
  • ऑनलाइन चाइल्ड पोर्नोग्राफी 
  • चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज मटीरियल 
  • सेक्सुअली एक्सप्लिसित कंटेंट जैसे कि बलात्कार, सामूहिक बलात्कार आदि पर।         

शिकायत दर्ज करवाते समय ‘रिपोर्ट और ट्रैक’ का विकल्प चुने। हालत अगर बेकाबू हो रहे हो और इमरजेंसी वाली परिस्थति हो तो स्टेट पुलिस को 100 नंबर पर कॉल करें या महिलाओं की जो हेल्पलाइन है 181 पर कॉल करें।  

  1. इसके अतिरिक्त, आप अपने नजदीकी पुलिस स्टेशन के साइबर सेल में भी शिकायत दर्ज करवा सकती है। साइबर क्राइम की शिकायत दर्ज करने का अधिकार हर पुलिस स्टेशन के पास होता है। शिकायत रजिस्टर करवाने के लिए ये जरूरी नहीं है कि अपराध उसी जगह हुआ हो। अपराध अगर किसी और जगह भी हुआ हो और अगर आप उस पुलिस स्टेशन के क्षेत्राधिकार में रह भी रही हैं तो भी आप उस पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज करवा सकती है।  ऑनलाइन एफआईआर भी दर्ज करवाई जा सकती है। अगर पुलिस स्टेशन में अधिकारी आपकी FIR दर्ज करने से मना कर देता है तो आप इसके ख़िलाफ़ कमिशनर ऑफ़ पुलिस या सुपरिन्टेन्डेन्ट ऑफ़ पुलिस को भी शिकायत कर सकती है। इसके बावजूद भी अगर आपकी शिकायत दर्ज नहीं होती तो आप प्राइवेट कम्प्लेंट फाइल करके कोर्ट की मदद से अपनी एफआईआर दर्ज करवा सकती है।

संक्षिप्त में कहे तो जिस तरीके से दूसरे अपराधों की शिकायत दर्ज करवाई जाती है, वैसे ही साइबर अपराधों की भी शिकायत करवाई जा सकती है।

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तस्वीर : सुश्रीता भट्टाचार्जी

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