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भारत ने आज़ादी के बाद जिस गति से तरक्की की है उससे सभी अच्छी तरह वाकिफ़ हैं। तकनीक के मामले में, अर्थव्यवस्था के मामले में, आधुनिकता के मामले में और खासकर संस्कृति और रहन-सहन के मामले में। लेकिन इन तरक्की में एक चीज़ जिसमें भारतीय चूक गए है वह है सोच की तरक्की, क्योंकि रूढ़िवादी मानसिकता आज भी नए कानूनों और प्रावधानों पर हावी है। जब यहां मानवीय संबंध स्थापित करने की बात आती है तो वहां धर्म-जाति सबसे ऊपर हो जाते हैं। अपनी पसंद से किया गया अंतर्जातीय विवाह, लिव-इन रिलेशनशिप आदि जैसे आधुनिक प्रचलन को भारत में एक बिगड़ी हुई संस्कृति और चरित्र के साथ जोड़कर देखा जाता है। इसलिए समाज इसे मान्यता देने से आज भी साफ़ इनकार करता रहा है इसके पीछे वह अपने समुदाय, धर्म की रक्षा करना और अपनी संस्कृति को बचाए रखने की दुहाई देता है तभी तो आज की पीढ़ी और पुरानी पीढ़ी में इन मुद्दों को लेकर अक्सर विवाद देखने को मिलता है।

हमारे समाज में ऐसे अनेक मामले देखने को मिलते हैं जिन्हें लव जिहाद और धर्मांतरण से जबरदस्ती जोड़कर समाज एक-दूसरे पर दोष मढ़ना शुरू कर देता है। लोग इस बात को स्वीकार करने को तैयार ही नहीं कि यहां सारा खेल मानसिकता का है जिसकी वजह से मानवता और मानवीय संबंध दाव पर लग जाते हैं और कई ज़िंदगियां सूली पर चढ़ा दी जाती हैं। उदाहरण के तौर पर अभी हाल ही में लव जिहाद के मामलों के ख़िलाफ़, किसी व्यक्ति की निजी स्वतंत्रता को ताक पर रखकर यूपी में कानून बनाया गया है। जबकि लव जिहाद से जुड़े कई केस ऐसे है जिसमें शादी करने वाले राज़ी है पर इसे धर्मांतरण का रूप देकर उनकी गिरफ्तारी की जा रही है।

हाल ही में उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में 22 साल की युवती के जबरन धर्मांतरण के आरोप में जेल भेजे गए। बता दें कि यूपी में जबरन धर्मांतरण विरोधी नए कानून के तहत युवक को उसके बड़े भाई समेत जेल भेज दिया गया था। दोनों 13 दिनों तक जेल में रहे लेकिन उनके ख़िलाफ़ दर्ज कराए गए केस में जबरदस्ती धर्म परिवर्तन कराने का कोई सबूत नहीं मिला। वहीं दूसरी तरफ युवक की पत्नी ने भी दावा किया था कि उसने अपनी मर्जी से शादी की थी।

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लव जिहाद के मामलों के अलावा ऑनर किलिंग के मामले भी हमारे देश की एक गंभीर समस्या है, एक अपराध है। अगर किसी ने ‘ऑनर किलिंग’ शब्द को पहली बार सुना हो तो वह इस शब्द के बारे में गहराई जानने पर अचंभित हो सकता है। ऑनर किलिंग जिसे सम्मान के लिए की गई हत्या भी कहा जाता है। इसे भारत में अपराध की श्रेणी में तो रखा गया है पर ज़मीनी स्तर पर सच्चाई कुछ और ही है। ऑनर किलिंग विकृत सामाजिक मानसिकता को बढ़ावा देती है जो सामाजिक न्याय के खिलाफ है। में विवाह के संदर्भ में देखें तो ऑनर किलिंग का सामना केवल महिलाएं ही नहीं बल्कि पुरुष भी कर रहे है। वैसे तो भारत एक धर्मनिरपेक्ष राज्य है जहां अलग-अलग जाति और धर्म के लोग रहते हैं पर ये विविधता केवल परंपराओं में ही दिखाई देती है। अगर कोई व्यक्ति किसी दूसरी संस्कृति या परंपरा को अपनाने की कोशिश करता है तो उसके परिणाम काफी भयानक होते हैं।

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यह मानसिकता और ऐसे अपराध इस बात का सबूत हैं कि पढ़ाई-लिखाई रूढ़िवादी मानसिकता को समाप्त नहीं कर सकती है क्योंकि वह व्यक्ति जिस समाज में रहता है उसे उसमें बने रहने के लिए उसे इस तरह की शर्तों का पालन करना पड़ता है जिसका परिणाम सम्मान हत्या के रूप में निकलकर सामने आता है।

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पिछले महीने दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने एक महिला को ऑनर किलिंग का पीड़ित होने से बचाया था। आयोग के ट्विटर एकाउंट पर 20 वर्षीय लड़की ने अपने दोस्त का फोन इस्तेमाल करते हुए ट्वीट कर सहायता मांगी थी। श्रुति ने बताया कि उसने अपने पंसद के लड़के से शादी की थी, जिसके बाद से उसके परिवार वाले उसकी शादी का विरोध कर रहे थे और बात इतनी आगे बढ़ चुकी थी कि अब लड़की के परिवार वाले उसकी हत्या की कोशिश भी कर रहे हैं। पीड़िता ने जानकारी में बताया कि उसकी उम्र 20 साल है और 12 अगस्त को उसने अपने प्रेमी से दिल्ली में एक मंदिर में विवाह किया था, जिसकी जानकारी मिलते ही उसके परिवार वालों ने उसे मिलने के बहाने वापस बुलाया और उसके घर आने पर उसके साथ बुरी तरह से मारपीट करने के बाद दादरी ले गए जहां उसे मारने की साज़िश की जा रही थी। पीड़िता किसी तरह वहां से भाग निकली और वापस दिल्ली आई। दिल्ली आकर महिला आयोग से मदद की गुहार लगाई।

ये घटनाएं, ये अपराध उदाहरण हैं इस बात का कि हमारे विकसित समाज की मानसिकता आज भी कितनी संकीर्ण है। यह मानसिकता और ऐसे अपराध इस बात का सबूत हैं कि पढ़ाई-लिखाई रूढ़िवादी मानसिकता को समाप्त नहीं कर सकती है क्योंकि वह व्यक्ति जिस समाज में रहता है उसे उसमें बने रहने के लिए उसे इस तरह की शर्तों का पालन करना पड़ता है जिसका परिणाम सम्मान हत्या के रूप में निकलकर सामने आता है। लेकिन सवाल उठता है कि क्या कानून की नजर उन गांवों तक भी पहुंचेगी, जहां आए दिन ‘घर की इज्जत’ के नाम पर हत्याएं होती हैं।

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तस्वीर : श्रेया टिंगल फेमिनिज़म इन इंडिया के लिए

पंजाब केसरी दिल्ली समूह के साथ कार्यरत श्वेता गार्गी कॉलेज से पॉलिटिकल साइंस ऑनर्स में ग्रेजुएट है तथा जर्नलिज्म में पोस्ट ग्रेजुएशन कर चुकी हैं। घर और समाज में मौजूद विभेद के चलते उनका समावेशी नारीवाद की ओर झुकाव अधिक है। साथ ही उन्हें सामाजिक - आर्थिक - राजनैतिक और लैंगिक समानता से जुड़े विषयों पर लिखना बेहद पसंद है।

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