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मानसिक स्वास्थ्य एक अहम मुद्दा है लेकिन आज भी इस मुद्दे पर चर्चा की जगह चुप्पी को अहमियत दी जाती है। मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियों को लेकर कई भ्रम और गलतफ़हमियां भी हमारे बीच मौजूद हैं। इस लेख में दूर करते हैं मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े ऐसे ही छह मिथ्य।

1- मिथ्य : सिर्फ़ शारीरिक शोषण ही शोषण है।

तथ्य : शोषण मानसिक तौर पर भी किया जाता है। शब्दों और व्यवहार के ज़रिए भी एक इंसान का दमन किया जाता है। मानसिक शोषण से उभरना बहुत मुश्किल होता है।

2- मिथ्य : सकारात्मक सोच के साथ कोई भी व्यक्ति तुरंत डिप्रेशन से बाहर निकल सकता है।

तथ्य : डिप्रेशन, एक ऐसी मेडिकल अवस्था है जिसमें मस्तिष्क के रसायन, कार्य और संरचना पर पर्यावरणीय और जैविक कारकों का बुरा असर पड़ता है। डिप्रेशन ठीक करने के कुछ ज़रूरी उपाय हैं, जैसे – मनोचिकित्सा, इलाज और काउंसलिंग। इसके लिए सिर्फ सकारात्मक सोच काफ़ी नहीं है।

3- मिथ्य : अगर मुझे कोई मानसिक बीमारी है, तो यह कमजोरी का संकेत है – यह मेरी गलती है।

तथ्य : मानसिक रूप से बीमारी से जूझना किसी की गलती या दोष नहीं है। सर्जन जनरल की रिपोर्ट के अनुसार, “मानसिक विकार स्वास्थ्य की स्थिति है, जो सोच, मनोदशा या व्यवहार (या इसके कुछ संयोजन) में परिवर्तन, परेशानी या बिगड़े हुआ कामकाज से जुड़ा हुआ है।”

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4- मिथ्य : मानसिक बीमारियों का सामना कर रहे सभी लोग हिंसक और खतरनाक होते हैं।

तथ्य : मानसिक बीमारियों का सामना कर रहे सभी लोगों को हिंसक और खतरनाक कहना तथ्यात्मक रूप से गलत और असंवेदनशील है। ऐसा कहना मानसिक परेशानियों का सामना कर रहे लोगों के प्रति पहले से मौजूद पूर्वाग्रहों को और अधिक मज़बूत करता है और उनके प्रति भेदभाव को बढ़ावा देता है।

5- मिथ्य : मानसिक स्वास्थ्य कोई बड़ा मुद्दा नहीं है। 

तथ्य : भारत में लगभग 9 करोड़ लोग मानसिक स्वास्थ्य संबंधित बीमारियों से पीड़ित हैं। WHO के आंकड़ों के मुताबिक भारतीय महिलाओं में दूसरे देशों की औरतों के मुकाबले आत्महत्या की संभावना दो गुनी  होती है। हम मानसिक स्वास्थ्य की समस्याओं को जब तक नज़रअंदाज़ करते रहेंगे, वे हमें नुकसान पहुंचाते ही रहेंगे।

6- मिथ्य : मानसिक स्वास्थ्य एक सार्वजनिक मुद्दा है, इसका आप कौन हैं और कहां से आते हैं, इससे कोई लेना- देना नहीं है।

तथ्य : कई लोग अपनी सामाजिक और आर्थिक स्थिति के कारण मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित परेशानियों से गुजरते हैं। मानसिक स्वास्थ्य न केवल किसी के विशेषाधिकार से प्रभावित हो सकता है, बल्कि इसके इलाज व अन्य सुविधाओं तक उसकी पहुंच कितनी है यह भी मायने रखता है। उदाहरण के तौर पर, कोई व्यक्ति अपने विशेषाधिकार के कारण मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी को आसानी से प्राप्त कर सकता है। इसके इलाज से संबंधित थेरेपी और खुद की सेल्फकेयर कर सकता है। सही जानकारी, समय पर इलाज व अन्य स्वास्थ्य सुविधाओं तक किसी व्यक्ति की पहुंच कितनी है ये सब एक व्यक्ति के मानसिक स्वास्थ्य के बेहद ज़रूरी पक्ष हैं।


तस्वीर : फेमिनिज़म इन इंडिया

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