ख़ास बात: उत्तर प्रदेश चुनाव 2022 में आगरा कैंट से निर्दलीय प्रत्याशी राधिका बाई से
ख़ास बात: उत्तर प्रदेश चुनाव 2022 में आगरा कैंट से निर्दलीय प्रत्याशी राधिका बाई से
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उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के पहले चरण का मतदान नज़दीक आ गया है। आगामी 10 फरवरी को इस चरण के प्रतिभागियों की किस्मत जनता तय करने जा रही है। इस बार के चुनाव में आगरा कैंट विधानसभा सीट से ट्रांस महिला राधिका बाई किन्नर भी चुनाव लड़ रही हैं। आगरा छावनी सीट से राधिका एक निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव में उतरी हैं। इस चुनाव में उनके अबतक के सफर और उनकी योजनाओं के बारे में जानने के लिए फेमिनिज़म इन इंडिया ने उनसे बातचीत की।

सवालः पहले आप अपने बारे में हमें बताइए।

राधिकाः मेरा नाम आकाश सोनी उर्फ राधिका बाई किन्नर है। मैं आगरा छावनी विधानसभा, निर्दलीय प्रत्याशी हूं। परिवार के नाम पर अब समाज ही मेरा घर है। आज से लगभग सात साल पहले मेरा परिवार मुझे छूट गया था, उसके बाद समाज को ही मैंने अपना परिवार माना है। यहीं पर जो लोग भी प्यार से मुझसे मिलते हैं वही मेरे रिश्तेदार हैx। इसी परिवार की सेवा के लिए मैं चुनाव लड़ रही हूं।

सवालः आपने राजनीति में आने का फैसला कब लिया?

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राधिकाः आज मैं जिसे अपना घर कह रही हूं, उसी समाज के कुछ लोगों के कारण मैंने राजनीति में आने का फैसला लिया था। एक बार जब मैं एक कंपनी में काम करने जा रही थी तो मेरा मज़ाक बनाकर मुझे वहां से निकाल दिया गया था। तब मैं सोचती थी कि कोई तो रास्ता होगा जहां मैं अपनी बातें सबके सामने रख सकूंगी। मैंने बाबा साहब आंबेडकर के बारे में पढ़ा, संविधान के बारे में पढ़ा। राजनीति मुझे वह रास्ता लगी जहां से समाज को बदला जा सकता है। अपने किन्नर समुदाय से जुड़ने के बाद मैंने मेहनत की और संघर्ष कर कुछ धन इकट्ठा किया। मैंने सड़क पर पानी की थैलियां बेचकर मेहनत कर पढ़ाई की, चीजों को जाना।

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“जब कुछ लोगों के मैं पैर छूने जाती हूं उनसे आर्शीवाद लेती हूं, तो लोग मना कर देते हैं कि नहीं तुम्हारे पैर छूने से हमें पाप लगेगा। कुछ लोग बहुत सम्मान देते हैं, मेरा बहुत उत्साह बढ़ाते हैं। तो कई जगह गांव में जाती हूं तो ‘हिजड़ा आ गया, हिजड़ा आ गया’ जैसी बातें भी सुनने को मिलती हैं। फिर भी मैं सोचती हूं कि मुझे समाज का यह नज़रिया बदलना है। किसी को तो बदलाव लाना ही होगा इसलिए मैंने अपनी ओर से यह एक पहल की है।”

सवालः एक ट्रांस महिला का उत्तर प्रदेश के समाज में चुनाव लड़ना बड़ा कदम है, इसे आप कैसे देखती हैं?

राधिकाः मेरा चुनाव लड़ना एक बहुत बड़ा बदलाव है। मैं इंसानियत को कायम करने के लिए चुनाव लड़ रही हूं। हर तरह के जाति-धर्म के बंधन के खिलाफ समाज में सबके लिए समानता के मंत्र को लेकर चुनाव में आई हूं। अपनी पीड़ाओं के अनुभव के साथ समाज में बदलाव करने आई हूं और मुझे पूरी उम्मीद है कि समाज मेरा साथ देगा।

सवालः जब आप चुनाव प्रचार करने जनता के बीच जाती है तो लोगों का कैसा नज़रिया देखने को मिलता है?

राधिकाः हर कोई एक जैसा नहीं होता है तो हर इंसान की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं है। कुछ लोग हंसते भी हैं पर जब भी खुश रहती हूं कि उनके होठों पर मेरी वजह से मुस्कुराहट तो आई। वहीं, जब कुछ लोगों के मैं पैर छूने जाती हूं उनसे आर्शीवाद लेती हूं, तो लोग मना कर देते हैं कि नहीं तुम्हारे पैर छूने से हमें पाप लगेगा। कुछ लोग बहुत सम्मान देते हैं, मेरा बहुत उत्साह बढ़ाते हैं। तो कई जगह गांव में जाती हूं तो ‘हिजड़ा आ गया, हिजड़ा आ गया‘ जैसी बातें भी सुनने को मिलती हैं। फिर भी मैं सोचती हूं कि मुझे समाज का यह नज़रिया बदलना है। किसी को तो बदलाव लाना ही होगा इसलिए मैंने अपनी ओर से यह एक पहल की है।

सवालः एक राजनीतिज्ञ के रूप में आप किन विषयों को प्राथमिकता देती है?

राधिकाः सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा मेरे लिए शिक्षा है, क्योंकि शिक्षा ही एकमात्र विकल्प है जिसके द्वारा हम चीजें हर स्तर पर बेहतर कर सकते हैं। खासतौर पर कोरोना माहमारी के कारण बहुत बच्चें पढ़ाई से वंचित हुए हैं। मैं खुद जितनी भी शिक्षा हासिल की है वो बहुत संघर्ष से हासिल की है इसी पीड़ा को लेकर मैं यह सोचती हूं कि कोई भी अनपढ़ न रहे। यदि मैं चुनाव जीतती हूं तो विधायक बनने के बाद जो भी सुविधाएं मिलेंगी मैं वो सारी शिक्षा में लगा दूंगी। पढ़ाई से ही समाज आगे बढ़ सकता है। आज जनता पर टैक्स की बहुत मार है। हमारी टैक्स की नीति बहुत जटिल है, मैं सरकारी टैक्सों से जनता को राहत दिलाने का काम करूंगी।

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सवालः ट्रांस समुदाय के उत्थान के लिए विशेषतौर पर क्या योजनाएं आपके पास है, आप क्या बदलाव करना चाहती हैं?

राधिकाः ट्रांस समुदाय में शिक्षा को प्रोत्साहन देने की बहुत आवश्यकता है। हमारे समुदाय के लोगों को बहुत तरह की मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ता है। जिस तरह से एससी-एसटी ऐक्ट है उसी तरह से किन्नर समुदाय को सुरक्षा देने के लिए विशेष अधिकार का कानून बनाया जाए। हिजड़ा शब्द कहकर मेरे बच्चों को बहुत मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। आनेवाली पीढ़ी को वह संघर्ष न करना पड़े जो हमने किया। ट्रांस समुदाय के लिए रोजगार के विकल्प पैदा कर उन्हें मुख्यधारा में शामिल किया जाए। अपने यहां कई बार मैंने काम करने के लिए रोजगार की योजनाओं में हिस्सा लेने की कोशिश की लेकिन हमें नकार दिया जाता है। एक बार मैंने एक साइकिल स्टैंड का ठेका लेने के लिए जिला स्तर पर पूरी कोशिश की कि वह किन्नर समाज के लोगों को मिलें लेकिन वह नहीं मिला। छोटे-छोटे काम में यदि हम समाज में ट्रांस लोगों को शामिल करेंगे तो उनकी भागदीरी बढे़गी और उन्हें स्वीकृति मिलने में आसानी होगी।

सवालः आप राजनीति में प्रतिनिधित्व के विषय पर क्या राय रखती हैं?

राधिकाः हमारे समाज में बहुत से वर्ग हैं जो पिछड़े हुए है, जिनको समाज की मुख्यधारा में लाने के लिए राजनीति सबसे कारगर तरीका है। आज उत्तर प्रदेश में किन्नर बोर्ड का गठन तो हुआ है लेकिन किन्नर समुदाय का संसद में कोई प्रतिनिधित्व नहीं है। यह सोच राजनीति में भी बदलने की बहुत जरूरत है। आप खुद देखिए इस चुनाव में किसी भी पार्टी ने किन्नर को प्रत्याशी के रूप में नहीं उतारा है। हमारी संख्या बहुत कम हो सकती है लेकिन है तो हम इसी समाज में ना। हमारा प्रतिनिधि हमारी समस्याओं और जरूरतों को ज्यादा बेहतर तरीके से जानता है तो उसको संसद में बात रखने के लिए वहां होना चाहिए।

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मैं पूजा राठी पश्चिमी उत्तर-प्रदेश के मुज़फ़्फ़रनगर की रहने वाली हूँ। अपने आसपास के माहौल मे फ़िट नहीं बैठती हूँ।सामाजिक रूढ़िवाद, जाति-धर्मभेद, असमानता और लैंगिक भेद में गहरी रूचि है। नारीवाद व समावेशी विचारों की पक्षधर हूँ। खुद को एक नौसिखिया मानती हूँ, इसलिए सीखने की प्रक्रिया हमेशा जारी रखती हूँ।

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