उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022ः भाजपा का घोषणापत्र धर्मविशेष मतदाताओं के लिए
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उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की सरगर्मियां पूरे प्रदेश में फैली हुई हैं। भारतीय जनता पार्टी ने यूपी चुनाव 2022 के लिए अपना घोषणापत्र जारी कर दिया है। पहले चरण के मतदान से दो दिन पहले 8 फरवरी को पार्टी ने इसे घोषित किया है। बीजेपी ने अपने घोषणापत्र को ‘लोक कल्याण संकल्प पत्र 2022’ नाम दिया है। पार्टी की ओर से समृद्ध कृषि, सशक्त नारी, सुगम शिक्षा और सुशासन जैसे विषय के साथ धर्म के मुद्दों को भी कई दृष्टिकोण से शामिल किया है। ‘भाजपा फिर करके दिखाएगी’ के तहत पार्टी ने घोषणापत्र में कुंभ की सफलता का जश्न, कावड़ यात्रा, माता और बहनों की सुरक्षा का दावा के साथ जबरन धर्म परिवर्तन कराने पर कड़ी से कड़ी सजा और रामायण विश्वविद्यालय बनाने का वादा किया गया है। भाजपा के घोषणापत्र में किए गए वादे पार्टी की चुनावी रणनीति के समान ही है, जहां एक धर्म विशेष को पूरा महत्व दिया गया है।

मुख्य तौर पर चुनाव में विकास के मुद्दे को सबसे ज्यादा तूल दी जा रही है। भाजपा ने प्रदेश की जनता के विकास के लिए राज्य की प्रति व्यक्ति आय को दोगना करने और निवेश में 10 लाख करोड़ रुपये तक जुटाने का वादा किया है। घोषणापत्र में प्रत्येक परिवार के एक सदस्य को नौकरी और स्वरोजगार देने का वादा किया गया है। हालांकि यह विस्तार से नहीं बताया गया है कि यह कैसे संभव होगा, इसके लिए सरकार की क्या योजनाएं है। वहीं, जब स्वरोजगार की बात होती है तो देश के प्रधानमंत्री पकौड़ा तलने को भी रोजगार और उत्थान से जोड़ते हुए दिखते हैं।

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शिक्षा और युवाओं के लिए लुभावने वादे

शिक्षा के प्रोत्साहन के लिए सरकार ने दो करोड़ टैबलेट और स्मार्टफोन ‘स्वामी विवेकानंद युवा सशक्तिकरण’ के तहत बांटने का ऐलान किया गया है। दूसरी ओर नौकरियों के लिए युवाओं को यूपीएससी, एनडीए, जेईइ, टीईटी जैसी प्रतियोगिता परीक्षाओं की फ्री कोचिंग का भी वादा किया गया है। रोजगार और भर्ती प्रकियाओं के नाम पर घिरी भाजपा सरकार के शासनकाल में पेपर रद्द होना भी एक समस्या है।  

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‘भाजपा फिर करके दिखाएगी’ के तहत पार्टी ने घोषणापत्र में कुंभ की सफलता का जश्न, कावड़ यात्रा, माता और बहनों की सुरक्षा का दावा के साथ जबरन धर्म परिवर्तन कराने पर कड़ी से कड़ी सजा और रामायण विश्वविद्यालय बनाने का वादा किया गया है। भाजपा के घोषणापत्र में किए गए वादे पार्टी की चुनावी रणनीति के समान ही है, जहां एक धर्म विशेष को पूरा महत्व दिया गया है।

रोजगार देने के नाम पर आलोचनाओं का सामना कर रही सरकार ने अपने संकल्प पत्र में इस बात को ध्यान में रखा है। लेकिन प्रयागराज में रेलवे भर्ती की देरी के लिए प्रदर्शन करने वाले छात्रों को किस बेहरहमी से पीटा गया। इस घटना को बीते अभी एक महीना भी नहीं हुआ है। प्रयागराज में प्रदर्शन करनेवाले छात्रों पर पुलिस की कार्रवाई के ऐसे वीडियो भी सामने आए, जिसमें पुलिस हॉस्टल मे घुसकर छात्रों को पीटती हई दिखी। भाजपा ने नौकरी के इच्छुक युवाओं के लिए अपने घोषणापत्र में अनेक वादे किए हैं। वहीं, हाल में केंद्र सरकार ने ही बताया है कि साल 2018 से 2020 के दौरान 25,000 भारतीय नें बेरोजगारी की वजह से आत्महत्या कर ली।

खेती-किसानी के उत्थान को लेकर फिर से नये वादे

समृद्ध कृषि करने के लिए प्रदेश में भाजपा ने तेरह सूत्रीय वादों को जारी किया है। कृषि कानून के विरोध में आंदोलन और लखीमपुर की घटना के बाद से किसानों को खुश करने के लिए तमाम तरह की कोशिशे की गई है। भाजपा ने आनेवाले पांच सालों के लिए सभी किसानों को सिंचाई के लिए मुफ्त बिजली उपलब्ध कराने का वादा किया है। गन्ना बेल्ट की राजनीति पर फोकस करते हुए भाजपा के घोषणा पत्र में गन्ने के किसानों की चिंता को दूर करने के लिए फिर से वादे किए हैं। गन्ना किसानों को 14 दिनों के भीतर उनका भुगतान प्राप्त करने के साथ प्रदेश में गन्ना मिलों के नवीनीकरण मिशन की योजना का भी प्रस्ताव रखा है। 

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वहीं, अगले 5 वर्षों में सरकार द्वारा गेहूं व धान की खरीद पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को लागू करने को भी कहा गया है। एमएसपी सरकार और किसान के बीच एक बड़ा मुद्दा है। किसान लगातार फसलों के उचित दाम की मांग कर रहे हैं। किसान आंदोलन को रद्द करने के सहमति पत्र में एमएसपी एक मुख्य विषय है। घोषणापत्र में किसानों की फसल के उचित दाम पर बात करते हुए भाजपा किसानों के विरोध की महत्वता को समझती है। हालांकि केंद्र की भाजपा सरकार ने 2022 में किसानों की आय के दुगुनी होने का वादा भी किया था। भाजपा अपने घोषणापत्र के तहत अपनी किसान विरोधी छवि को बदलकर किसान हितैषी के रूप में दिखाना चाहती है। यह बात अलग है कि लखमीपुरी किसान हत्याकांड में आरोपी गृहराज्य मंत्री के बेटे आशीष टेनी की ज़मानत पहले चरण के चुनाव के दौरान ही हो गई। 

महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तिकरण के नये दावे

उत्तर प्रदेश में महिलाओं की सुरक्षा के विषय को पूरी तरह से राजनीतिक मुद्दा बनाया हुआ है। चुनाव में पक्ष-विपक्ष एक दूसरे पर महिलाओं की सुरक्षा को लेकर लगातार घेरते हुए दिखता है। भाजपा सरकार ने अपने घोषणा-पत्र में नारी सशक्तिकरण के लिए अनेक योजनाओं का एलान किया है। भाजपा सरकार 2017 के बाद से विशेष रूप से महिला को सुरक्षित वातावरण देने के पर अपनी पीठ थपथपाती नजर आती है। यह बात अलग है कि भारत सरकार के ही आंकड़े बताते हैं कि महिलाओं के खिलाफ होनेवाले अपराध में उत्तर प्रदेश की स्थिति में कोई खास बदलाव नहीं हुआ है।

भाजपा सरकार ने अपने महिला सुरक्षा के लिए 3 नयी महिला बटालियन बनाने की घोषणा की है। सभी सार्वजनिक स्थानों और शैक्षणिक स्थानों के पास सीसीटीवी कैमरे लगवाने की बात कही है। इस तरह की घोषणा महिलाओं की सुरक्षा के नामपर निगरानी रखने और उनकी खुलकर आवाजाही पर रोक लगाती हुई भी प्रतीत होती है। दूसरा महिला सुरक्षा के लिए बटालियन के साथ माहौल को सुरक्षित करना ज्यादा आवश्यक है। महिलाओं के लिए समान अवसर बनाना बहुत आवश्यक है। घोषणापत्र में 60 साल से अधिक उम्र की महिलाओं के लिए सार्वजनिक परिवहन में मुफ्त यात्रा करने की घोषणा की गई है। साथ ही कॉलेज जाने वाली छात्राओं को मुफ्त स्कूटी देने का वादा भी किया गया। इसके साथ यूपीपीसीएस सहित सभी सरकारी नौकरियों में महिलाओं की संख्या को दोगुना करने का वादा किया गया है।

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घोषणा पत्र में महिलाओं के लिए विशेष तौर पर मिशन ‘पिंक टॉयलेट योजना की घोषणा की गई है। सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं के लिए सुगम शौचालयों की व्यवस्था बहुत महत्वपूर्ण योजना है। स्वच्छता का मुद्दा हर जेंडर के एक आवश्यक मुद्दा है। पिंक टॉयलेट का वादा केवल सिर्फ औरतों की जरूरतों को ध्यान में रखकर किया गया है। यह ट्रांस समुदाय के हितों की अनदेखी और भेदभावपूर्ण वाला नजरिया साफ दिखाता है।

घोषणापत्र में महिलाओं को ‘उज्जवला योजना’ के तहत होली और दीवाली पर दो मुफ्त सिलेंडर देने का वादा किया गया है। भाजपा सरकार ने उज्जवला योजना के तहत महिला कल्याण के वादे और उसकी बदलती तस्वीरों के विज्ञापनों को खूब प्रचारित किया है। जमीनी हकीकत यह है कि एलपीजी की बढ़ती कीमत और महंगाई की मार से परिवार की घटती आय की वजह से खाना पकाने के महिलाओं को पारंपरिक तरीकों पर ही लौटने पर मजबूर कर दिया है। मीडिया मे ऐसी तमाम रिपोर्ट हैं जहां महिलाएं महंगाई की वजह से दोबारा सिलेंडर नहीं भरा पाई।

दूसरी ओर इस वादे के इस पहलू पर ध्यान देने की आवश्यकता है कि हिंदू धर्म के दो त्योहार पर ऐसी विशेष छूट ही क्यों? प्रदेश में हर धर्म के लोग रहते हैं। भाजपा की ओर से लगातार धर्म की बातें करके हमेशा की तरह चुनाव को सांप्रदायिक करने की पूरी कोशिश की जा रही है। खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस चुनाव को 80 बनाम 20 का बताया। पार्टी के नेताओं की ओर से लगातार इस तरह की बयानबाजी जारी है।

लव जिहाद पर कड़ी सजा का प्रावधान

उत्तर प्रदेश में यदि भाजपा की सत्ता में वापसी होती है तो उन्होंने ‘लव जिहाद’ के मामले में सजा को बढ़ाकर 1 लाख रुपये के जुर्माने के साथ कम से कम 10 साल करने का वादा किया है। 2020 में पारित कानून को भाजपा की ओर से भविष्य में और अधिक मजबूती से लागू होने की बात कही गई है। यह कानून किसी व्यक्ति द्वारा अपना धर्म बदलकर शादी करने को प्रतिबंधित करता है। इस कानून के तहत शादी करने वाले जोड़े को आपराधिक धाराओं का सामना करना पड़ता है। न्यूजक्लिक की एक रिपोर्ट अनुसार यूपी में लव जिहाद कानून के तहत गिरफ़्तार युवक के केस में सालभर तक सुनवाई नहीं हुई।

भारतीय जनता पार्टी के सकंल्प पत्र की घोषणा के बाद प्रमुखता से मीडिया ने इस बात को हाईलाइट किया है। लव-जिहाद के विषय पर सरकार की ऐसी राय खासतौर पर एक विशेष धर्म के प्रति नफरत और सामाजिक सौहार्द की बानगी को बंटवारे की नज़र से पेश करती है। द क्विटं की ख़बर अनुसार यूपी में लव जिहाद कानून बनने के बाद एक भी व्यक्ति इसके तहत सजा का दोषी नहीं सिद्ध हुआ है। लव जिहाद के मुद्दे को लेकर उत्तर प्रदेश में योगी सरकार की ओर से लगातार सांप्रदायिकता और ध्रुवीकरण की राजनीति को तूल दिया जाता रहा है।

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हिंदुत्व की विचारधारा को मजबूत करते हुए और बहुसंख्यक धर्म विशेष को महत्व देते हुए भाजपा ने कई वादे किए हैं जिन्हें सरकार वापसी में प्रमुखता से लागू करने को कहा गया है। सांस्कृतिक धरोहर एवं विकसित पर्यटन के लिए हिंदू धर्म और उससे जुड़े समाज के उत्थान के वादे किए गए हैं। भाजपा ने अपने घोषणा पत्र में भगवान राम से संबधित संस्कृति, शास्त्रों एवं धार्मिक तथ्यों पर शोध के लिए प्रदेश में रामायण विश्वविद्यालय को स्थापित करने का प्रस्ताव रखा है। पार्टी ने कई समुदाय के वोटरों को लुभाने के लिए उनके गुरुओं के नाम से अनेक योजनाओं को लागू करने को भी कहा है।

निषाद वोटरों को के लिए भाजपा ने मुख्य रूप से मछली पकड़ने व इससे जुड़े काम के लिए सब्सिडी की योजना को लागू करने की भी घोषणा की है। यही नहीं पार्टी ने हिंदुत्व की विचारधारा के ध्यान में रखते हुए बुजुर्ग संतो, पुजारियों और पुरोहितों के समग्र कल्याण की योजनाओं का क्रियान्वयन करने के लिए एक बोर्ड की स्थापना करने का वादा किया है। प्रदेश की संस्कृतिक धरोहर की रक्षा व उत्थान के लिए की गई सारी योजनाएं केवल हिंदू धर्म को ध्यान में रखकर ही की गई है।

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तस्वीर साभारः Deccan Herald

मैं पूजा राठी पश्चिमी उत्तर-प्रदेश के मुज़फ़्फ़रनगर की रहने वाली हूँ। अपने आसपास के माहौल मे फ़िट नहीं बैठती हूँ।सामाजिक रूढ़िवाद, जाति-धर्मभेद, असमानता और लैंगिक भेद में गहरी रूचि है। नारीवाद व समावेशी विचारों की पक्षधर हूँ। खुद को एक नौसिखिया मानती हूँ, इसलिए सीखने की प्रक्रिया हमेशा जारी रखती हूँ।

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