लैंगिक समानता कानूनों पर विश्व बैंक की रैंक में फिसलता भारत का ग्राफ
तस्वीर साभारः The Hans India
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लैंगिक असमानता भारत के लिए बड़ी समस्या है। तमाम तरह के बदलावों के बाद लैंगिक भेदभाव भारत से अपनी जड़ बनाए हुए है। हाल ही में विश्व बैंक द्वारा तैयार किए गए एक सूचकांक में भारत की रैंक में पिछले साल के मुकाबले कमी सामने आई है। वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट के अनुसार, कानूनी सुधारों के मामले में भारत का स्कोर पिछले तीन सालों से भले ही स्थिर बना हुआ हो लेकिन लैंगिक समानता में उसका ग्राफ पिछले साल के मुकाबले एक पायदान और नीचे खिसक गया है।

भारत दुनिया के उन देशों में शामिल है जहां लैंगिक असमानता हर क्षेत्र में व्यापक रूप से स्थित है। वर्ल्ड बैंक की स्टडी के अनुसार लैंगिक समानता स्थापित करने में भारत को अभी भी बहुत प्रयास करने बाकी है। साल दर साल भारत की स्थिति इसमें और कमज़ोर होती जा रही है। ‘द फेडरल’ में प्रकाशित ख़बर के अनुसार वर्ल्ड बैंक के 2022 के ‘महिला, व्यापार और कानून’ अध्ययन के तहत दुनिया की 190 अर्थव्यवस्थाएं के आठ क्षेत्रों में कानूनी सुधार को ध्यान में रखकर रैंक किया गया है। यह अध्ययन दो अक्टूबर 2020 से एक अक्टूबर 2021 तक किया गया।

कानूनी लैंगिक सुधार की दृष्टि से लैंगिक समानता में भारत की रैंकिंग 2022 में 190 देशों में 124 वें स्थान पर है। साल 2021 में भारत की रैंकिंग 123वें स्थान पर और 2020 में 117वें स्थान पर थी। विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले तीन सालों में भारत में कानूनी सुधार की दिशा में कोई काम न होने का यह परिणाम है। हालांकि भारत का ओवरऑल स्कोर साउथ एशिया के रीजनल एवरेज 63.7 से बेहतर है। यह रैंकिंग देश की आर्थिक राजधानी मुंबई पर लागू कानूनों और नियमों के आधार पर की गई है।

भारत दुनिया के उन देशों में शामिल है जहां लैंगिक असमानता हर क्षेत्र में व्यापक रूप से स्थित है। वर्ल्ड बैंक स्टडी के अनुसार लैंगिक समानता स्थापित करने में भारत को अभी भी बहुत प्रयास करने बाकी है। साल दर साल भारत की स्थिति इसमें और कमजोर होती जा रही है।

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इसमें महिलाओं के कार्यक्षेत्र में आठ पैमानों के आधार पर अध्ययन किया गया है। इसमें गतिशीलता यानी महिलाओं की काम को लेकर आवाजाही, कार्यस्थल, वेतन, विवाह, माता-पिता होने की स्थिति, संपत्ति, उद्यमिता और पेंशन शामिल है। इन आठ पैमानों पर कुल 35 सवाल बनाए गए थे। उन सवालों के जवाब के आधार पर ही भारत के स्कोर से रैंक की स्थिति तय की गई है। वर्ल्ड बैंक की स्टडी के अनुसार जब भारत में किसी महिला की आवाजाही और गतिशीलता, महिलाओं के काम करने के फैसले पर कटौती नहीं करने, और उनके शादी करने के अधिकारों से जुड़ी की बात पर कोई कानूनी प्रतिबंध नहीं लगाने की बात आती है तो भारत पूरा 100 का स्कोर प्राप्त करता है। इस अध्ययन में आठ पैमानों में भारत का स्कोर अलग-अलग रहा है।

भारत का डब्ल्यूबीएल 2022 इंडेक्स स्कोर 74.4 रहा है। इससे अलग-अलग क्षेत्र में भारत ने इस प्रकार अंक हासिल किए है। वेतन में 25, शादी में 100, कार्यस्थल में 100, आवाजाही में 100, पैरेंटहुड में 40, उद्यमिता में 75, संपत्ति में 80 और पेंशन में 75 अंक हासिल किए है। वेतन में असमानता में भारत का स्कोर सबसे खराब रहा है। यह दिखाता है कि भारत में वेतन में लैंगिक गैर-बराबरी सबसे ज्यादा मौजूद है।

भारत ने वेतन में असमानता में 100 में से 25 अंक हासिल किए है। यह स्कोर बताता है कि भारत में समान काम के लिए समान वेतन के कानून को प्रभावी तरीके से लागू होने का अभाव है। यही नहीं बच्चे के बाद महिलाओं के काम में भारत ने 40 अंक हासिल किए है। यानी बच्चे होने के बाद भी महिलाओं की काम की स्थिति इससे अधिक प्रभावित होती है। बच्चे के जन्म के बाद महिलाएं काम पाने व करने में बाधा के साथ कार्यक्षेत्र में उन्हें उस तरह की सुविधाएं नहीं मिलती है जिसकी उन्हें आवश्यकता होती है।

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भारत ने वेतन में असमानता में 100 में से 25 अंक हासिल किए है। यह स्कोर बताता है कि भारत में समान काम के लिए समान वेतन के कानून लागू होने का अभाव है। यही नहीं बच्चे के बाद महिलाओं के काम में भारत ने 40 अंक हासिल किए है।

इसके अलावा उद्यमिता और बिजनेज को बढ़ावा देने की तमाम कार्यक्रमों के बाद महिलाओं को बाधा का सामना करना पड़ता है। उद्यमिता की कैटेगरी में भारत ने 100 में से 75 अंक हासिल किए है। यही नहीं महिला की पेंशन को प्रभावित करने वाले कानून में भी भारत का स्कोर 75 ही रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत को महिलाओं के कानूनी समानता लागू करने के लिए सुधार करने की आवश्यकता है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि वेतन में लैंगिक समानता को लागू करने के लिए भारत को इस दिशा में कई कदम उठाने की आवश्यकता है। समान वेतन के कानूनी प्रावधान के अतिरिक्त महिलाओं को समान काम के लिए समान अवसर देने की आवश्यकता है। महिलाओं को पुरुषों के समान काम करने के विकल्प देने होंगे। महिलाओं को पुरुषों के समान रात को भी काम करने अधिकार होना चाहिए। यही नहीं औद्योगिक क्षेत्र में महिलाओं को पुरुषों के समान काम करने का अधिकार मिलना चाहिए।

बिजनेस डेली के अनुसार विशेषज्ञों ने इस रिपोर्ट की व्याख्या करते हुए भारत के संदर्भ में कहा है, भारत अपने स्कोर में सुधार करने में विफल रहा है क्योंकि वह अपने सुधार को लागू करने के बाद उनपर अमल करने में नाकामयाब रहा है। इसके अलावा, भारत के पड़ोसी देश नेपाल ने अपनी स्थिति में सुधार किया है। जो पहले भारत से पीछे था अब उसकी स्थिति में बदलाव आया है। 2021 और 2022 में अपनी स्थिति में नेपाल ने सुधार किया है। वर्तमान में ओवरऑल नेपाल की रैकिंग 88वें नंबर पर है।  

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तस्वीर साभारः The Hans India

मैं पूजा राठी पश्चिमी उत्तर-प्रदेश के मुज़फ़्फ़रनगर की रहने वाली हूँ। अपने आसपास के माहौल मे फ़िट नहीं बैठती हूँ।सामाजिक रूढ़िवाद, जाति-धर्मभेद, असमानता और लैंगिक भेद में गहरी रूचि है। नारीवाद व समावेशी विचारों की पक्षधर हूँ। खुद को एक नौसिखिया मानती हूँ, इसलिए सीखने की प्रक्रिया हमेशा जारी रखती हूँ।

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