पोस्ट-अबॉर्शन केयर: क्यों अबॉर्शन के बाद भी ज़रूरत होती है देखभाल की
तस्वीर साभारः Forbes.com
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अबॉर्शन यानी गर्भसमापन यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य से जुड़ा एक अहम मुद्दा है जिसका जिक्र कानून, पितृसत्ता और राजनीति के आधार पर ज्यादा किया जाता है। स्वास्थ्य से अलग इसे कानून के तौर पर भी कई तरह की शर्तों के आधार पर दिया जाता है। विकासशील देश हो या विकसित देश हर जगह अबॉर्शन से जुड़ी जागरूकता और इसके समर्थन की कमी देखी जाती है। अबॉर्शन को यौन और प्रजनन स्वास्थ्य के अधिकार और स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दे की तरह नहीं देखा जाता है। 

अबॉर्शन से जुड़े मिथक और रूढ़िवादी सोच अबॉर्शन की सेवा में सबसे बड़ी बाधा साबित होते हैं। यही वजह है कि अबॉर्शन करवाने के बाद भी लोग इस पर खुलकर बात नहीं कर पाते हैं और पोस्ट अबॉर्शन केयर को तो नजरअंदाज किया जाता है। अबार्शन के बाद जिस तरह की देखभाल की आवश्यकता होती है उसको महत्व न देने के वजह से कई तरह की स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। 

हर साल पूरी दुनिया में 20 मिलियन अनसेफ अबॉर्शन होते हैं जिस वजह से 68,000 लोगों की मौत होती है। इन लोगों में से एक बड़ी संख्या को पोस्ट अबॉर्शन केयर के माध्यम से बचाया जा सकता है, तो आइए इस लेख के माध्यम से जानते हैं पोस्ट अबॉर्शन केयर क्या है?, इसकी ज़रूरत क्यों है और पोस्ट अबॉर्शन केयर के लिए किन-किन चीजों की ज़रूरत होती है।

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अबॉर्शन से जुड़े मिथक और रूढ़िवादी सोच अबॉर्शन की सेवा में सबसे बड़ी बाधा साबित होते हैं। यही वजह है कि अबॉर्शन करवाने के बाद इस पर खुलकर बात नहीं होती है और पोस्ट अबॉर्शन केयर को तो पूरी तरह नज़रअंदाज किया जाता है।

पोस्ट अबॉर्शन केयर क्या है

पोस्ट अबॉर्शन केयर से मतलब अबॉर्शन करवाने के बाद उसके उपचार, डॉक्टर का परामर्श और उससे संबधित देखभाल से है। अबॉर्शन केयर के तहत अबॉर्शन से जुड़ी जटिलताओं, उससे जुड़े निवारण और भविष्य में अनचाहे गर्भ को नियंत्रित करने के लिए बर्थ कंट्रोल उपाय के बारे में जानकारी उपलब्ध करवाना आदि शामिल होता है। पोस्ट अबॉर्शन केयर से मातृत्व मृत्यु दर में कमी और उससे जुड़ी बीमारियों से बचा जा सकता है।    

अबॉर्शन केयर की क्यों ज़रूरत है

अबॉर्शन करवाने के बाद शारीरिक स्वास्थ्य और मानसिक स्वास्थ्य के लिए उचित देखभाल बहुत महत्वपूर्ण है। चिकित्सकीय प्रणाली द्वारा किया जानेवाला अबॉर्शन एक सुरक्षित प्रक्रिया है। अबॉर्शन के चयन के बाद इसके शारीरिक और मानसिक दोंनो स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ता है। अबॉर्शन करवाने के बाद शरीर में कई बदलाव तुरंत आते हैं। अबॉर्शन करवाना भावनात्मक रूप से भी चुनौतीपूर्ण होता है। इस तरह के शारीरिक और मानसिक बदलावों के लिए पोस्ट अबॉर्शन केयर की बहुत आवश्यकता होती है।  

ब्लीडिंग

अबॉर्शन के बाद मेंस्ट्रुअल साइकिल दोबारा से शुरू होता है। प्लैन्ड पेरेंटहु़ड ऑफ मिशीगन के मुताबिक 2 से 6 हफ्ते तक ब्लीडिंग होने की संभावना रहती है। कुछ लोगों में यह महज़ कुछ दिनों तक भी होती है। यह स्थिति प्रेगनेंसी के टाइम पर भी निर्भर करती है कि किस समय में अबॉर्शन हुआ है। कुछ लोगों में ब्लीडिंग नहीं भी होती है। ब्लीडिंग में स्पॉटिंग, डार्क ब्राउन और क्लॉटिंग भी हो सकती है। कुछ स्थिति में अबॉर्शन के तुरंत बाद कुछ दिनों तक ब्लीडिंग नहीं होती है। हॉर्मोनल बदलाव के बाद तीसरे या पांचवें दिन के आसपास की अवधि में ब्लीडिंग हो सकती है। अगर बहुत हेवी ब्लीडिंग हो रही है तो डॉक्टर से परामर्श लेना तुरंत बहुत ज़रूरी होता है।

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दर्द और क्रैम्प  

अबॉर्शन के बाद क्रैम्पिंग होना बहुत सामान्य और आवश्यक है। यूटरस को पुराने आकार में आने के लिए क्रैंप का सामना करना पड़ता है। मेंस्ट्रुअल साइकिल से पहले या इस दौरान जिस तरह क्रैंप होता है उसी तरह अबॉर्शन के बाद होता है। ब्लीडिंग के तीसरे और पांचवे दिन ब्लीडिंग और क्लोटिंग के साथ क्रैम्पिंग बढ़ती है। आराम के अलावा मसाज से क्रैम्पिंग में राहत मिलती है। 

अन्य कारण

अबॉर्शन करवाने के चौबीस घंटों के बीच जी मिचलना, उल्टी और चक्कर जैसी शिकायतों को भी सामना करना पड़ सकता है। शरीर में बहुत कमज़ोरी की वजह से बेहोशी की शिकायत भी हो सकती है। इस तरह की यदि कोई समस्या होती है तो तुरंत डॉक्टर का परामर्श लेना आवश्यक है। 

“अबॉर्शन के नाम पर हमारे समाज में बहुत सारी गलत धारणाएं है। हमनें बहुत से केसों में देखा है कि पेशेंट को हवा में नहीं लेटना है। मुंह ढककर रखना है। उसे अंदर ही लिटाए रखना है। ऐसे समय में उक्त व्यक्ति को उचित देखभाल इमोशनल सपोर्ट की ज़रूरत होती है न कि उसे अलग-थलग कर देने की।”

भावनात्मक असर

अबॉर्शन कराने का फैसला कई तरह की भावनाओं के बदलाव का भी कारण बनता है। अबॉर्शन की प्रक्रिया के बाद हार्मोनल बदलाव इसे और बढ़ा देते हैं, जिससे मूड में बदलाव हो सकता है। मेडिकल न्यूज़ टुडे के अनुसार अबॉर्शन के बाद एक व्यक्ति के अंदर हार्मोन के स्तर में बदलाव आता है। प्रोजेस्टेरोन और एस्ट्रोजन का लेवल कम हो जाता है। यह क्रिया मूड में बदलाव का कारण बनती है। कई लोगों के लिए अचानक हार्मोनल बदलाव भावनात्मक तनाव की वजह बन जाती है। इस तरह के परिवर्तन से उभरने में एक लंबा समय भी लग सकता है।  

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पोस्ट अबॉर्शन केयर के लिए किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए

अबॉर्शन के बाद कुछ दिनों तक एक उचित देखभाल की आवश्यकता है। अचानक प्रेगनेंसी के खत्म होने की वजह से सेहत पर इसका ज्यादा ना प्रभाव पड़े उसके लिए एक सही खाम-पान के अलावा कई तरह की बातों का ध्यान रखना चाहिए। अपना निजी क्लीनिक चलाने वाली डॉ. भावना भारद्वाज पोस्ट अबॉर्शन केयर के बारे में बात करते हुए कहती हैं कि हर किसी की प्रेगनेंसी अलग-अलग स्टेज पर खत्म होती है तो उसका असर शरीर पर भी अलग-अलग होता है।

यदि कोई अबॉर्शन करवाता है तो उसे सामान्य रूप से एक हफ्ते का आराम करना चाहिए लेकिन आराम के साथ-साथ हल्का चलना-फिरना ही बहुत ज़रूरी है। पूरे समय तक बिस्तर पर लेटे रहने की वजह से कब्ज़ की समस्या का भी सामना करना पड़ता है। इसके साथ ही ज्यादा से ज्यादा पानी पीना चाहिए। पानी कम मात्रा में पीने से शरीर में इंफेक्शन होने की संभावना बनी रहती है। हल्की डाइट लेनी चाहिए। 

अबॉर्शन के नाम पर हमारे समाज में बहुत सारी गलत धारणाएं है। हमने बहुत से केसों में लोगों को कहते देखा है कि पेशेंट को हवा में नहीं लेटना है, मुंह ढककर रखना है। उसे अंदर ही लिटाए रखना है। ऐसे समय में उक्त व्यक्ति को उचित देखभाल इमोशनल सपोर्ट की ज़रूरत होती है न कि उसे अलग-थलग कर देने की। पेशेंट का अच्छे से ध्यान रखना उसको सपोर्ट करना उसकी मेंटल हेल्थ के लिए भी बहुत सही रहता है। इसके अलावा हाइजीन का पूरा ध्यान रखना चाहिए। समय-समय पर पैड्स को बदलते रहना चाहिए।

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मैं पूजा राठी पश्चिमी उत्तर-प्रदेश के मुज़फ़्फ़रनगर की रहने वाली हूँ। अपने आसपास के माहौल मे फ़िट नहीं बैठती हूँ।सामाजिक रूढ़िवाद, जाति-धर्मभेद, असमानता और लैंगिक भेद में गहरी रूचि है। नारीवाद व समावेशी विचारों की पक्षधर हूँ। खुद को एक नौसिखिया मानती हूँ, इसलिए सीखने की प्रक्रिया हमेशा जारी रखती हूँ।

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