भारत जैसे-जैसे आज़ादी की तरफ अपने कदम बढ़ा रहा था, वैसे-वैसे देश के सामने अनेक चुनौतियां सामने खड़ी थीं। इन अपने चुनौतियों में से एक महिला अधिकार और उनका स्वास्थ्य भी था। उन्हीं चुनौतियों के बीच एक ऐसी महिला सामने उठ आई जिसने विशेषतौर पर महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़े अधिकारों को लेकर आवाज़ उठाई। उस महिला का नाम था धनवंती रामा राव। धनवंती रामा राव एक नारीवादी और समाज सेविका थीं। उन्होंने समाज में महिलाओं के यौन प्रजनन स्वास्थ्य और अधिकारों के बारे में जागरूकता बढ़ाने का काम किया। देश में परिवार नियोजन कार्यक्रम की नींव रखने का श्रेय उन्हीं को जाता है।
भारत में परिवार नियोजन के महत्व को समझाने और उसे नीतियों में शामिल करने के लिए धनवंती रामा राव ने महत्वपूर्ण काम किया। वह फैमिली प्लानिंग असोसिएशन ऑफ इंडिया की संस्थापक भी रही हैं। धनवंती महिलाओं के प्रजनन अधिकारों की चैंपियन और ‘इंटरनेशनल प्लान्ड पेरेंटहुड फेडरेशन‘ की अध्यक्ष थीं। महिला एसोसिएशन के साथ काम करने के लिए ब्रिटिश सरकार नें उन्हें ‘कैसर-ए-हिंद’ से सम्मानित किया था।
शुरुआती जीवन
धनवंती रामा राव का जन्म साल 1893 में हुबली में एक कश्मीरी ब्राह्मण परिवार में हुआ था। परिवार में केवल उनके माता-पिता थे। उनके पिता का नाम कृष्ण हांडू था। उनकी स्कूली शिक्षा हुबली में ही हुई थी। साल 1917 में प्रेसीडेंसी कॉलेज, मद्रास से उन्होंने स्नातक की पढ़ाई पूरी की। अंग्रेजी आनर्स में उन्होंने गोल्ड मेडल के साथ डिग्री प्राप्त की थी। इसके बाद वह सहायक प्रोफेसर के तौर पर क्वीन मैरी कॉलेज में शामिल हुई। धनवंती रामा राव उच्च शिक्षा स्तर पर पढ़ानेवाली पहली भारतीय महिलाओं में से एक हुई हैं। उनकी शादी अर्थशास्त्री और राजनायिक सर बेनेगल रामा राव के साथ हुई। शादी के बाद, उन्होंने अपने पति के साथ इंग्लैंड की यात्रा की। उनके पति साइमन कमीशन में आर्थिक सलाहकार के तौर पर कार्यरत थे।
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धनवंती महिलाओं के प्रजनन अधिकारों की चैंपियन और ‘इंटरनेशनल प्लान्ड पेरेंटहुड फेडरेशन’ की सह-संस्थापक और अध्यक्ष थीं। महिला एसोसिएशन के साथ काम करने के लिए ब्रिटिश सरकार नें उन्हें ‘कैसर-ए-हिंद’ से सम्मानित किया था।
इंग्लैंड में उन्होंने भारत की स्वतंत्रता के लिए अभियान चलानेवाले कई संगठनों के साथ काम किया। उसी दौरान उनकी मुलाकाल सरोजिनी नायडू से हुई। वहां उन्होंने 1932 में अंतरराष्ट्रीय महिला मंच में भारतीय प्रतिनिधिमंडल के सदस्य के रूप में महिलाओं के मतदान और समान नागरिकता के अधिकारों के लिए भी लड़ाई लड़ी। बाद में, उन्होंने महिला सशक्तिकरण के मुद्दों पर भारत और ब्रिटेन दोनों देश की महिलाओं को जोड़ने के इरादे से एक संघ की स्थापना की। जैसे ही भारत स्वतंत्रता की ओर बढ़ा वह भारत वापस चली आई क्योंकि वह एक स्वतंत्र राष्ट्र के निर्माण में योगदान देना चाहती थी।
महिला अधिकारों के लिए उठाई आवाज़
आज़ादी के बाद धनवंती ने तेजी से राष्ट्र निर्माण में अपना स्थान बना लिया। देश में आर्थिक असमानता, अत्यधिक गरीबी और अधिक प्रजनन दर का सामना कर रहा था। उन्होंने महिलाओं के यौन प्रजनन स्वास्थ्य और अधिकारों के बारे में काम करना शुरू किया। उनका मानना था कि बच्चे पैदा करने का अधिकार महिलाओं के पास रहना चाहिए और अगर प्रजनन का अधिकार महिलाओं के पास है, तो जन्म नियंत्रण का कार्य आसान हो जाएगा। धनवंती जन्म नियंत्रण कार्यक्रम के लिए एक मॉड्यूल बनाया जिसे राष्ट्र निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना गया।
फैमिली प्लेनिंग एसोसिएशन की स्थापना
साल 1949 में उन्होंने फैमिली प्लानिंग एसोसिएशन ऑफ इंडिया की स्थापना की। यह भारत में जनसंख्या नियंत्रण, प्रजनन स्वास्थ्य एवं अधिकार के क्षेत्र में काम करनेवाला सबसे बड़ा संगठन था। उन्होंने परिवार नियोजन को पहली पंचवर्षीय योजना में शामिल करने के लिए अभियान चलाया। इसके लिए उन्हें महात्मा गांधी के विरोध का भी सामना करना पड़ा। वह गांधी के कृत्रिम गर्भनिरोधक के अज्ञान और अंधविश्वास के ख़िलाफ़ भी लड़ी।

हालांकि, जन्म नियंत्रण के उनके गहन जागरूकता प्रयासों से ही भारत के परिवार नियोजन कार्यक्रमों को वैश्विक मान्यता मिली और कई देशों ने इसे अपने राष्ट्रीय एजेंडा के रूप में भी अपनाया। भारत में परिवार नियोजन के मुद्दे पर धनवंती ने लोगों की सोच को बदलने का प्रयास किया। उन्होंने प्रजनन अधिकारों और जनसंख्या से जुड़े कार्यक्रमों में सरकार की योजनाओं में महिलाओं और बच्चों के दृष्टिकोण को शामिल करने पर विशेष ज़ोर दिया था। वह राष्ट्र विकास में महिलाओं के कल्याण को पहचानने वाली एक उल्लेखनीय महिला थीं उन्होंने एक ऐसा मॉडल बनाया जिसे बाद में दुनियाभर में सराहा गया।
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राव जल्द ही महसूस हुआ कि देश की अधिकांश समस्याओं का एक उपाय जन्म नियंत्रण भी है। धनवंती के लिए इस दिशा में काम करने के लिए पहली चुनौती एक पारंपरिक समाज में अधिकतर अशिक्षित लोगों में इसकी जानकारी देनी थी। जिसमें अधिकांश लोगों का दृढ़ विश्वास था कि बच्चे भगवान की कृपा से पैदा होते हैं और जन्म नियंत्रण भगवान की इच्छा के विरुद्ध है।
परिवार नियोजन अभियान में पुरुषों को किया शामिल
राव ने महिलाओं को सशक्त बनाने और जन्म नियंत्रण जागरूक कार्यक्रमों में पुरुषों को भी शामिल किया। उन्होंने परिवार नियोजन जागरूकता कार्यक्रमों के लिए पुरुषों को शिक्षित किया क्योंकि महिलाओं की तुलना में पुरुषों के लिए गर्भनिरोधक के उपाय आसान होते हैं। इसके अलावा, अगर पुरुषों को एक छोटे परिवार के मूल्य का एहसास होता है तो वे इन साधनों का इस्तेमाल करेंगे और महिला को भी परिवार नियोजन के बारे में जानकारी देंगे। भारत मे अधिक संख्या में स्वैच्छिक पुरुष नसबंदी करवाने का श्रेय उन्हीं को जाता है।
धनवंती ने 1977 में अपनी आत्मकथा ‘एन इनहेरिटेंस: द मेमॉयर्स ऑफ धनवंती रामा राव’ के नाम की किताब प्रकाशित करवाई। जो अपने पाठकों को उनकी यादगार जीवन यात्रा और फैमिलि प्लानिंग के लिए उनके प्रयासों के बारे में जानकारी देती है। 1959 में समाज उत्थान के लिए दिए योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया था। 1987 में 94 साल की उम्र में मुंबई में उनका निधन हो गया था।
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तस्वीर साभारः Madras Courier
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मेरा नाम तलत परवीन है. मैंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से जर्नलिज्म की पढ़ाई की है. बोलने में थोड़ी सी हिचकिचाहट है लेकिन लिखने में पूरा जज़्बा है, अपनी बात बोलकर कम, लिखकर ज्यादा लोगों तक पहुंचाने का हुनर है। खाने-पीने का तो वैसे ही शौक रखते हैं लेकिन घुमक्कड़ी में भी मज़ा आता है.

