दुनिया में 16 करोड़ महिलाएं गर्भनिरोध के इस्तेमाल से रह जाती हैं वंचितः लैंसेट अध्ययन
तस्वीर साभारः IPPF
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दुनियाभर में 160 मिलियन यानी 16 करोड़ महिलाएं और किशोरियां हैं जो गर्भनिरोधक तरीके अपनाना चाहती थीं लेकिन गर्भनिरोधक तक उनकी पहुंच न होने की वजह से वे इसमें नाकामयाब रहीं। द लैंसेट जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार भले ही 1970 के बाद से वैश्विक स्तर पर कॉन्ट्रासेप्टिव्स के चलन में बढ़ोतरी हुई हो लेकिन 2019 में बड़ी संख्या में महिलाओं के पास गर्भनिरोधक की आसान पहुंच नहीं बन पाई है। गर्भनिरोधक तक अपनी पहुंच बनानेवाली महिलाओं का प्रतिशत 1970 में 54.9 फीसदी था, जो 2019 में बढ़कर 79.1 फीसदी तक ही पहुंचा है। 

स्टडी में 1970 से 2019 तक के 1162 पॉपूलेशन बेस्ड सर्वे के गर्भनिरोध का इस्तेमाल करनेवाली महिलाओं (15-49) से जुड़े आंकड़ों को शामिल किया गया है। रिसर्चर्स ने दुनियाभर में गर्भनिरोधक के इस्तेमाल पर आंकलन कर डेटा जारी किया गया है। यह गर्भनिरोधक की सभी तरह की ज़रूरतों, उसके तरीके और उपलब्धता पर एक अनुमान बताता है। 1970 से  2019 तक देश, आयु समूह और वैवाहिक स्थिति को आधार बनाकर आंकड़े इकट्ठा किए गए। 

द हिंदू में प्रकाशित ख़बर के अनुसार वाशिंगटन यूनिवर्सिटी में इस्टीट्यूट फॉर हेल्थ मेट्रिक्स एंड इवैल्यूएशन की एनी हाकेनस्टेड ने कहा है, “हालांकि 1970 से हमने वैश्विक स्तर पर गर्भनिरोधक की उपलब्धता में काफ़ी प्रगति देखी है, लेकिन हर महिला और किशोरी तक सामाजिक और आर्थिक स्तर पर गर्भनिरोधक से लाभान्वित करने लिए एक लंबा सफ़र तय करना होगा।” 

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दुनियाभर में 160 मिलियन यानी 16 करोड़ महिलाएं और किशोरियां हैं जो गर्भनिरोधक तरीके अपनाना चाहती थीं लेकिन गर्भनिरोधक तक उनकी पहुंच न होने की वजह से वे इसमें नाकामयाब रहीं।

अध्ययन के अनुसार 2019 में गर्भनिरोधकों की उपलब्धता दुनिया के देशों और अलग-अलग क्षेत्रों के बीच काफी भिन्न थी। इस संदर्भ में एनी हाकेनस्टेड ने कहा है, “हमारे परिणाम दिखाते हैं कि महिला दुनिया में कहां रहती है और उसकी उम्र क्या है यह उसके गर्भनिरोधक के इस्तेमाल को काफी प्रभावित करती है।” बात यदि अलग-अलग हिस्सों की करें तो दक्षिणपूर्व एशिया, पूर्वी एशिया और ओशिनिया में आधुनिक गर्भनिरोधकों (मार्डन कांट्रसेप्टिव) का 65 फीसद इस्तेमाल किया गया।

उप-सहारा अफ्रीका के देशों में आधुनिक गर्भनिरोधक के इस्तेमाल में सबसे नीचे है। उप-सहारा अफ्रीका के क्षेत्र में आधुनिक गर्भनिरोधक के इस्तेमाल करने की दर 24 फीसदी है। वहां पर इससे जुड़ी मांग की संतुष्टि 52 फीसद सबसे कम रही। दुनिया के अलग-अलग क्षेत्र में आधुनिक गर्भनिरोधक के इस्तेमाल में बड़ा अंतर है। आधुनिक गर्भनिरोधक के इस्तेमाल का स्तर दक्षिण सूडान में 2 फीसदी से लेकर नॉर्वे में 88 फीसदी तक था। साल 2019 में अपनी इच्छा के बावजूद गर्भनिरोधक इस्तेमाल न करने वालों में दक्षिण सूडान (35.1%), सेंट्रल अफ्रीकन रिपब्लिक (29.2%) और वानुअतु (28.4%) रहा।    

किशोरियों तक गर्भनिरोधक की पहुंच कम

लैंसेट के अध्ययन के अनुसार 15-19 और 20-24 की उम्र की महिलाओं की वैश्विक स्तर पर मांग और उसके पूरे होने की दर सबसे कम थी। यह क्रमशः 65 फीसद और 72 फीसद दर्ज की गई। 15-24 के आयुवर्ग में कुल ज़रूरत 16 फीसद पाई गई। वहीं 27 फीसद की गर्भनिरोध के इस्तेमाल करने की इच्छा दर्ज की गई। अध्ययन के अनुसार दुनिया में 2019 में 4.3 करोड़ युवा महिलाएं और किशोरियों तक उनकी आवश्यकता के मुताबिक़ गर्भनिरोधक की पहुंच नहीं है। युवा शादीशुदा महिलाओं में यह अंतर सबसे ज्यादा पाया गया।  

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साल 2019 में भारत में 8.5 फीसदी महिलाएं और किशोरियां इच्छा के बावजूद गर्भनिरोधक की ज़रूरतों तक अपनी पहुंच नहीं बना पाईं। भारत में लगभग 62.2 फीसदी महिलाओं ने गर्भनिरोधक के तौर पर नसबंदी के तरीके को अपनाया है।

दुनिया में मार्डन कॉन्ट्रसेप्टिव का इस्तेमाल

शोधकर्ताओं ने उल्लेख किया हैं कि दुनियाभर में प्रजनन आयु की महिलाओं में मार्डन कॉन्ट्रसेप्टिव का इस्तेमाल बढ़ा है। 1970 में यह दर 28 फीसदी थी जो 2019 में 48 फीसदी तक पहुंच गई। इसकी मांग में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है जो 1970 के 55 फीसद से 2019 में 79 फीसदी दर्ज की गई। बावजूद इस बढ़त के दुनिया में बड़ी संख्या में महिलाओं की गर्भनिरोधक की ज़रूरत पूरी नहीं हो पा रही है। साल 2019 में गर्भनिरोधक की मांग करनेवाली 100 करोड़ महिलाओं में से लगभग 16 करोड़ महिलाएं दुनिया में अपनी आवश्यकता से इतर गर्भनिरोधक के इस्तेमाल करने से वंचित रहीं। 

क्या कहते हैं भारत के आंकड़े

अध्ययन में प्रकाशित आंकड़े के अनुसार दक्षिण एशिया में महिलाओं में नसबंदी की दर 62.2 प्रतिशत देखी गई है। दुनिया में महिला नसबंदी का सबसे ज्यादा चलन दक्षिण एशिया में है। 2019 में पूरे दक्षिण एशिया प्रांत में गर्भनिरोधक के इस्तेमाल करने की इच्छा 9.3 प्रतिशत दर्ज की गई। साल 2019 में भारत में 8.5 फीसदी महिलाएं और किशोरियां इच्छा के बावजूद गर्भनिरोधक की ज़रूरतों तक अपनी पहुंच नहीं बना पाईं। भारत में लगभग 62.2 फीसदी महिलाओं ने गर्भनिरोधक के तौर पर नसबंदी के तरीके को अपनाया है। भारत के संदर्भ में लिखा गया है कि अनुमान है कि भारत में नसबंदी का इस्तेमाल करनेवाली महिलाओं का बड़ा अनुपात भारत सरकार के नसबंदी प्रोत्साहन के प्रयासों से जुड़ा है।

भारत सरकार के आंकड़े 

समय के साथ देश में महिलाओं की गर्भनिरोधक की पहुंच बढ़ रही है लेकिन नैशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के अनुसार भारत में महिलाओं में नसबंदी की दर पुरुषों से ज्यादा है यानी परिवार नियोजन से का भार महिलाओं के ऊपर ज्यादा है। द मिंट में प्रकाशित ख़बर के अनुसार नैशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-5 (2019-2020) के अनुसार भारत में 15-49 साल 66.7 फीसदी शादीशुदा महिलाएं गर्भनिरोधक का इस्तेमाल कर पाती हैं। भारत में मार्डन कंट्रोसेप्टिव के प्रयोग में कंडोम का इस्तेमाल 9.5 फीसदी तक होता है। वहीं महिला नसबंदी की दर 37.5 फीसदी है। दूसरी ओर भारत में महिला के पास गर्भनिरोधक का इस्तेमाल करने का अधिकार कम है। नैशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-4 (2015-16) के मुताबिक केवल 8 प्रतिशत महिलाएं ही तय कर पाती है कि उन्हें गर्भनिरोधक का कौन सा तरीका इस्तेमाल करना है। भारत में बड़ी संख्या में गर्भनिरोधक से जुड़ा फैसला उनके पति लेते हैं।

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तस्वीर साभारः IPPF

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