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ग्लोबल वार्मिंग हमारे लिए एक बहुत बड़ी चुनौती है। इससे निपटने का एक ही तरीका है, जो है पानी और बिजली जैसे संसाधनों का इस्तेमाल सोच-समझकर करना। साथ ही ऐसे किसी सामान का इस्तेमाल न करना जो पर्यावरण को नुकसान पहुंचा सके, जैसे कि प्लास्टिक। हम शायद यह नहीं जानते कि हम जो कपड़े पहनते हैं, जिन फैशन एक्सेसरीज़ का इस्तेमाल करते हैं, उन्हें बनाने की प्रक्रिया पर्यावरण को कितना ज़्यादा नुकसान पहुंचाती है। फैशन उद्योग दुनिया का दूसरा बड़ा उद्योग है जो प्रदूषण के लिए सबसे ज़्यादा ज़िम्मेदार है। आंकड़ों के मुताबिक सिर्फ़ एक शर्ट बनाने में लगभग 2700 लीटर पानी का इस्तेमाल होता है। वायु प्रदूषण में कपड़े बनाने वाली फैक्ट्रियों का 10 फीसद योगदान है। कृत्रिम सामग्री और ज़हरीले रंगों की वजह से जल और भूमि प्रदूषण भी होता है। 

ऐसे में हमें ज़रूरत है ‘सस्टेनेबल फैशन’ की, जिससे सुंदर कपड़े और एक्सेसरीज़ भी बन सकें और जो पर्यावरण को हानि भी न पहुंचाए। भारत में सस्टेनेबल फैशन के कई अच्छे ब्रैंड्स हैं जिनके उत्पाद ईको-फ़्रेंडली होने के साथ साथ बेहद लोकप्रिय भी हैं। हम यहां बात करेंगे पांच भारतीय सस्टेनेबल फैशन ब्रैंड्स की जो कपड़ों के साथ-साथ ज्यूलरी और शो-पीस भी बनाते हैं और पर्यावरण की सुरक्षा में जिनका योगदान महत्वपूर्ण है। 

1. निकोबार: सिमरन लाल और रॉल राय

सिमरन और उनके पति रॉल का फैशन लेबल ‘निकोबार’ दिल्ली के ख़ान मार्केट में स्थित है। कपड़ों का डिजाइन समुद्र और समुद्री जीवन से प्रेरित होने की वजह से उनके ब्रैंड का नाम ‘निकोबार’ है। निकोबार एक 85 फीसद प्लास्टिक मुक्त ब्रैंड है, मतलब बाकी फैशन कंपनियों के मुकाबले यहां 85 फ़ीसद कम प्लास्टिक का इस्तेमाल होता है। यहां तक कि उनके कपड़ों पर जो टैग लगे होते हैं, वे भी प्लास्टिक या सामान्य कागज़ की जगह हाथी के गोबर से बनाए गए कागज़ के बने होते हैं। यहां पॉलीएस्टर का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं होता और सारे कपड़े ऑर्गैनिक कॉटन से बनाए जाते हैं। उनकी बनाई जीन्स वगैरह में भी ‘ग्रीन डेनिम’ का इस्तेमाल होता है, जिसे बनाने में साधारण डेनिम से कम पानी और बिजली खर्च होते हैं। 

निकोबार के किड्स वेयर लाइन ‘लिटल निको’ के सभी कपड़े वेस्ट मेटीरियल से बने हैं। इसके अलावा वे बांस से बनाए गए कपड़े या ‘बैम्बू फैब्रिक’ और केले के फ़ाइबर जैसी सामग्री का भी इस्तेमाल करते हैं। 

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2. शिफ़्ट : निमिष शाह 

‘लंडन कॉलेज ऑफ़ फैशन’ से ग्रेजुएट हुए निमिष शाह ने 2011 में ‘शिफ़्ट’ की स्थापना की। मुंबई का यह ब्रैंड सोनम कपूर, अनुष्का शर्मा, कल्कि केकला जैसे कई बॉलीवुड सितारों की पसंद है। शिफ़्ट प्राकृतिक फ़ाइबर और खादी का इस्तेमाल करता है और कपड़ों पर प्रिंटिंग मशीन की जगह हाथ से की जाती है। इस ब्रैंड की लिमिटेड एडिशन रजाइयां फैक्ट्री के बचे हुए कपड़े से, गुजरात की ग्रामीण औरतों द्वारा हाथ से बनाए गए हैं। ‘खरीफ़’ नाम से शिफ़्ट की हैंडमेड मोमबत्तियों की लाइन भी है। 

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3. पेरो : अनीथ अरोड़ा

‘पेरो’ एक मारवाड़ी शब्द है जिसका मतलब है ‘पहनो’। ‘नैशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ फैशन टेक्नॉलजी’ (निफ़्ट) से ग्रेजुएट अनीथ ने 2009 में इसकी स्थापना की। ‘पेरो’ का टैगलाइन है ‘हैंडमेड विद लव’। ऑर्गैनिक कॉटन से बने कपड़ों पर स्थानीय कारीगरों द्वारा हाथ से बारीक कढ़ाई की जाती है। ‘पेरो’ दिल्ली के पटपड़गंज में स्थित है। 

4. उपासना : उमा प्रजापति 

उमा प्रजापति ऑरोविल में रहनेवाली मानवाधिकार कार्यकर्ता और फैशन डिजाइनर हैं। ‘उपासना’ की शुरुआत उन्होंने 1996 में की थी। ‘उपासना’ खादी और ऑर्गैनिक कॉटन के कपड़ों पर कृत्रिम रंगों की जगह प्राकृतिक रंगों का इस्तेमाल करता है। नील, चंदन, तुलसी और नीम जैसे पौधों से बनाए गए रंग ‘उपासना’ के ड्रेसेज़, कुर्तियों और स्कार्फ़ो में जान ला देते हैं। 

‘उपासना’ के तहत उमा प्रजापति ने कई सारी योजनाएं शुरू की हैं। इनमें से कुछ हैं ‘कपास’ (ऑर्गैनिक कॉटन उगाने की योजना), ‘सुनामिका’ (सुनामी-पीड़ित महिला मछुआरों के लिए रोज़गार योजना), ‘पारुथी’ (जैविक खेती योजना) और ‘स्मॉल स्टेप्स’ (प्लास्टिक बैग्स के विकल्प के तौर पर बनाए गए कपड़े के बैग) जैसी योजनाएं शामिल हैं। 

5. नो नैस्टीज़ : अपूर्व कोठारी 

अपूर्व कोठारी अमेरिका में इंजीनियर थे जब उन्होंने भारत में किसान आत्महत्या के बारे में पढ़ना शुरू किया था। अपनी पत्नी श्वेता के साथ उन्होंने फ़ैसला किया एक ऐसा उद्योग शुरू करने का जिससे किसानों की मदद हो। 2011 में अपूर्व और श्वेता ने गोवा में अपने सस्टेनेबल फैशन ब्रैंड ‘नो नैस्टीज़’ की शुरुआत की। ‘नो नैस्टीज़’ के कपड़े ‘नॉन-जीएमओ’ बीजों से उगाए गए ऑर्गैनिक कॉटन से बनते हैं। साधारण रुई की खेती के मुकाबले ऑर्गैनिक कॉटन की खेती में किसानों का 30 फ़ीसद ज़्यादा फ़ायदा होता है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार आता है। नॉन जीएमओ ऑर्गैनिक कॉटन पर्यावरण के लिए हानिकारक भी नहीं है। 

‘नो नैस्टीज़’ भारत का पहला ‘वीगन’ फैशन ब्रैंड है। यह ऐसी किसी सामग्री का प्रयोग नहीं करता जो जानवरों से ली गई हो, यानी चमड़ी, रेशम, ऊन और फ़र पूरी तरह से वर्जित हैं। कपड़ों के बटन भी प्लास्टिक या जानवरों की हड्डियों की जगह नारियल के खोल से बनाए जाते हैं। 

‘सस्टेनेबल फैशन’ पर्यावरण को बचाने की हमारी लड़ाई में काफ़ी महत्वपूर्ण है। हमें कोशिश करनी चाहिए कि हम ऐसे ब्रैंड्स से अपने कपड़े खरीदें जिनका प्रदूषण और ग्लोबल वार्मिंग में योगदान न के बराबर हो। हमें इस मुद्दे पर थोड़ा और जागरूक होना चाहिए और अपने आसपास सस्टेनेबल फैशन उद्योगों को प्रोत्साहित करना चाहिए। 

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तस्वीर साभार : instagram

Eesha is a feminist based in Delhi. Her interests are psychology, pop culture, sexuality, and intersectionality. Writing is her first love. She also loves books, movies, music, and memes.

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