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बीते दिनों टोक्यो ओलंपिक्स 2020 बड़े ही धूमधाम से आयोजित हुआ। भारत ने ओलंपिक्स के इतिहास में अपना सबसे शानदार प्रदर्शन दिखाया। कई कीर्तिमान भी रचे गए। खेल के पहले दिन वेटलिफ्टिंग में रजत पदक जीतने वाली मीराबाई चानू से लेकर आखिरी दिन जेवलिन थ्रो में स्वर्ण पदक जीतने वाले  नीरज चोपड़ा का नाम सबकी ज़ुबान पर बार-बार आता है और प्रशंसा का पात्र बनता है। अब अपना ध्यान हम लाते हैं ओलंपिक्स की ही एक और कड़ी पैरालंपिक्स की ओर। यह खेल श्रृंखला साल 1948 में इंग्लैंड में द्वितीय विश्व युद्ध में घायल 16 चोटिल खिलाड़ियों के लिए पहली बार आयोजित की गई थी। तब ही इसका नाम दिया गया पैरालंपिक्स। ‘पैरा’ का अर्थ होता है ‘साथ में किए जाने वाला’। इसलिए ओलपिंक्स के ठीक बाद ही पैरालंपिक्स का भी आयोजन उतने ही उल्लास के साथ किया जाता है।

भारत ने साल 1968 में पहली बार इन खेलों में अपनी हिस्सेदारी दर्ज़ की। इसके बाद साल 1972 में भारत ने फिर इसमें हिस्सा लिया। हालांकि साल 1984 के बाद से ही आज तक भारत लगातार इन खेलों में हिस्सा लेता आया है। साल-दर-साल हमारी खिलाड़ियों और पदकों की संख्या, दोंनो ही बढ़ती रही। रियो में आयोजित साल 2016 के ग्रीष्मकालीन पैरालंपिक्स में भारत से 19 खिलाड़ियों ने भाग लिया था। इसमें भारत ने 4 पदक (2 स्वर्ण, 1 रजत, 1 कांस्य) अपने नाम किए थे। इस बार 25 अगस्त से 6 सितंबर 2021 के बीच होने वाले ग्रीष्मकालीन पैरालंपिक्स में कुल 54 खिलाड़ी हिस्सा लेंगे, जो कि अब तक पैरालंपिक्स में हिस्सा लेने वाले खिलाड़ियों की सबसे बड़ी संख्या है। इसी स्पर्धा में हिस्सा ले रही हैं भारतीय पैरा शूटर अवनी लेखरा। शूटर अवनी लखेरा ने टोक्यो पैरालंपिक 2020 में 10 मीटर एयर राइफल में गोल्ड मेडल जीता। अवनी ने पैरालंपिक में 249.6 का रिकॉर्ड बनाकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया। पैरालैंपिक के इतिहास में शूटिंग में भारत का यह पहला गोल्ड मेडल है। 

तस्वीर साभार: Twitter

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इस बार रिकार्ड 10 शूटर्स ने टोक्यो पैरालंपिक्स में अपनी जगह बनाई है। उसी में सिर्फ 19 साल की अवनी लेखरा पदक की अहम दावेदार हैं। अवनी लेखरा महत्वाकांक्षा और आत्मविश्वास से भरी हुई हैं। वह इस समय पैरा महिला 10 मीटर एयर राइफल श्रेणी के विश्व पैरा खेल रैंकिंग में पांचवें नंबर पर हैं। जयपुर में जन्मी अवनी की कहानी जितनी हृदय-स्पर्शी है उतनी ही प्रेरणादायक भी। 

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साल 2012 में महज़ ग्यारह साल की उम्र में अवनी को एक सड़क दुर्घटना में गंभीर चोटें आईं जिसके कारण उनके स्पाइनल कॉर्ड पर बुरा असर पड़ा। उनकी कमर के नीचे का शरीर पैरालाइज हो गया। अवनी उस हादसे के बाद चल नहीं पाईं। अवनी के पापा ने उस दौरान उन्हें ओलंपिक पद विजेता भारतीय शूटर अभिनव बिंद्रा की पुस्तक ‘A Shot At History‘ तोहफे में दी और उन्हें खेल से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित किया। पुस्तक पढ़कर मानिए अवनी में नई ऊर्जा आ गई। अपने हीरो अभिनव बिंद्रा की तरह ही उन्होंने भी शूटिंग में अपना दम-खम दिखाने की ठानी।

साल 2015 में जयपुर के ही जगतपुरा स्पोर्ट्स काम्प्लेक्स में अवनी ने अपना अभ्यास शुरू किया। केवल शुरुआती पांच साल के करियर में ही अवनी ने बहुत से नई उपलब्धियां हासिल कीं। साल 2015 और 2016 में लगातार अवनी ने राष्ट्रीय शूटिंग चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक हासिल किया। साल 2017 में दुबई में IPC पैरा शूटिंग विश्व कप में उन्होंने रजत पदक अपने नाम किया। हाल ही में यूक्रेन में आयोजित 2021 विश्व शूटिंग पैरा खेल विश्व कप में उन्होंने रजत पदक अपने नाम किया। दीपा मलिक, पैरालंपिक्स (2016 रियो) में शॉटपुट में रजत पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला और पैरालंपिक इंडिया की अध्यक्ष ने उन्हें बधाई देते हुए ट्विटर पर कहा कि पैरालंपिक इंडियो को उनकी इस उपलब्धि पर गर्व है। कोविड 19 के कारण भी उनकी प्रैक्टिस में काफी दिक्कतें आई लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।

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तस्वीर साभार : Instagram

सुचेता चौरसिया टाटा सामाजिक विज्ञान संस्थान (TISS) मुंम्बई में मीडिया एंड कल्चरल स्टडीज़ की छात्रा हैं। अपने लेखन के ज़रिए वह समाज के हर भाग के लोगों में समरसता का भाव लाना चाहती हैं। वह पर्यावरण, लैंगिक समानता, फ़िल्म व साहित्य से जुड़े मुद्दों में रुचि रखती हैं। किताबें पढ़ना, बैडमिंटन खेलना, फोटोज़ खींचना उनके अन्य शौक हैं।

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