समाजराजनीति दंसारी अनुसूया उर्फ़ सिथाक्का : आदिवासी महिला नेतृत्व की एक सशक्त मिसाल

दंसारी अनुसूया उर्फ़ सिथाक्का : आदिवासी महिला नेतृत्व की एक सशक्त मिसाल

वर्तमान में वह तेलंगाना राज्य के मूलुग से आदिवासी विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं और अब छत्तीसगढ़ राज्य महिला कांग्रेस की राज्य प्रभारी बन गई हैं।

बीते साल वैश्विक महामारी कोरोनावायरस के कारण जब पूरे देश में लॉकडाउन लगा हुआ था, प्रवासी मज़दूर बिना किसी सुविधा के पैदल और भूखे पेट महानगरों से अपने घरों की ओर प्रस्थान कर रहे थे। अमीर और मध्यम वर्गीय परिवार इस लॉकडाउन का आनंद किसी छुट्टी की तरह ले रहा था। वहीं, गरीब मजदूरों के लिए ये लॉकडाउन एक बहुत बड़ी आफत बनकर उभरा। इन प्रवासी मज़दूरों के घरों में रोज़ाना कमाई के जरिए ही एक समय का भरपेट भोजन नसीब होता था। उनके लिए यह महामारी आर्थिक दृष्टि से एक बड़ी मुसीबत थी। इस दौरान ऐसे भी कई लोग और संगठन मानवता का मिसाल पेश करते हुए सामने आए जो पूरे लॉकडाउन के दौरान हर संभव मदद करने प्रयासरत रहे। यूं तो ऐसे कई नाम है लेकिन इसमें प्रमुखता से शामिल एक बड़ा नाम तेलंगाना के मुलुग विधानसभा क्षेत्र की वर्तमान विधायक दंसारी अनुसूया उर्फ़ सिथाक्का का भी रहा।

सिथाक्का का जन्म 9 जुलाई 1971 में एक गरीब कोया आदिवासी परिवार में हुआ। माता पिता किसान थे इनके पारिवारिक आय का मुख्य स्रोत किसानी ही था, उन दिनों दक्षिण भारत के आदिवासी इलाकों में जमींदार, पूंजीपति और जमीन दलालों का बोलबाला था और यह किसानों के लिए सबसे बड़ी मुसीबत थे। वे किसानों से अधिक कर लेते थे। कर ना चुका पाने पर जमीनों का मालिकाना हक छीनते थे।अपने बचपन के दिनों से ही इन अत्याचारों को देखकर अन्याय के खिलाफ सिथाक्का में एक रोष पैदा हुआ वह अपने हक़ और अधिकारों के लिए लड़ना चाहती थी और जरूरतमंदों को न्याय दिलाने में विश्वास करती थी। न्याय की आस कहीं ना मिलने पर वह 14 साल की कम उम्र में ही नक्सल आंदोलन की ओर प्रेरित हुई, उन्होंने इसका हिस्सा बनने का फैसला किया, जो उनकी विचारधारा का समर्थन करता था। दस सालों तक नक्सल आंदोलन में ईमानदारी पूर्वक काम करते हुए वह निचले तबकों के गरीब और वंचित लोगों के बीच अपने काम के बदौलत बेहद लोकप्रिय हो गई। वह छह मुठभेड़ों से बच निकली और अपने लोगों के लिए मजबूती से डटे रही आंदोलन में अपने जोरदार प्रयासों के बाद उन्होंने सभ्य समाज में कमजोर वर्ग की सहायता के लिए एक विशिष्ट पहचान बनाने की सोच नक्सली आंदोलन से खुद को अलग करते हुए साल 2004 में सरकार के सामने आत्मसमर्पण कर दिया।

खास लोकप्रियता की वजह से आंध्र प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने उन्हें राजनीति में आने का न्यौता दिया उन्होंने ही सिथाक्का को राजनीति में लाया और विधायक का टिकट दिया।

आत्मसमर्पण करने के बाद सिथाक्का ने हैदराबाद से एलएलबी की पढ़ाई की और वारंगल कोर्ट में वकालत शुरू कर दी। खास लोकप्रियता की वजह से आंध्र प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने उन्हें राजनीति में आने का न्यौता दिया उन्होंने ही सिथाक्का को राजनीति में लाया और विधायक का टिकट दिया। वह अपनी राजनीति में आने का उद्देश्य सुशासन के माध्यम से अधिक लोगों की मदद करना बताती हैं और तेलुगू देशम पार्टी में शामिल हो गई। एक बार असफलता के बाद दोबारा साल 2009 में उन्होंने फिर से विधायक के रुप में चुनाव लड़ा और जीत हासिल की बाद में साल 2017 में उन्होंने तेलुगू देशम पार्टी छोड़ दी और कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गई। दो बार विधायक के पद पर नामित होने के बावजूद  का सिथाक्का भारत के राजनेताओं में सबसे लोकप्रिय और विनम्र नेताओं में शामिल हैं एक ईमानदार नेत्री हैं जो जनपक्ष में कार्य करती हैं। 

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विधायक देशव्यापी कोरोना वायरस लॉकडाउन के दौरान अपने विधानसभा क्षेत्र में लगातार 100 दिनों तक कार्य करते हुए एक लाख गरीब परिवारों तक खाद्यान्न सामग्री आपूर्ति करने में सफल रही। सोशल मीडिया में भी सिथाक्का काफी सक्रिय रहती हैं, इसी के माध्यम से उन्होंने कोरोना वायरस लॉकडाउन के दौरान गरीबों तक मुक्त भोजन और आवश्यक सामान पहुंचाने के उनके अभियान के कारण सक्रिय रहीं। वह #MeAt20 के साथ ट्विटर पर अपनी एक पुरानी तस्वीर साझा की इसे कई बार रिट्वीट किया गया था, वह अपने उम्र के बीसवें पड़ाव में एक जन मिलीशिया कमान संभाले हुए थी जिसमें वह नक्सली वेशभूषा के साथ अपने हाथों में राइफल लिए खड़ी थी अपनी साझा किए हुए तस्वीर को कैप्शन देते हुए उन्होंने लिखा ‘चाहे मैं गन के साथ हूं या गनमैन के साथ यह कमजोर वर्गों की खातिर है भोजन, कपड़ा और मकान मैं हमेशा उनके लिए चाहती थी।’ वर्तमान में वह तेलंगाना राज्य के मूलुग से आदिवासी विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं और अब छत्तीसगढ़ राज्य महिला कांग्रेस की राज्य प्रभारी बन गई हैं। साथ ही वह अखिल भारतीय महिला कांग्रेस की महासचिव भी हैं।

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तस्वीर साभार : deccanchronicle

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एक महत्वाकांक्षी लड़की जो खूब पढ़ाई कर अपने समुदाय की लड़कियों को प्रेरित करना चाहती है ताकि वे शादी से पहले अपने सपनों को चुने।

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