ब्रेस्ट आयरनिंगः लड़कियों को हिंसा से बचाने के लिए उनपर हिंसा की ही एक कुप्रथा
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परंपरा और मर्यादाओं के नाम पर हमेशा स्त्रियों का शरीर हिंसा का सामना करना आया है। महिलाओं के साथ होनेवाली हिंसा का लंबा इतिहास है। पूरी दुनिया में अलग-अलग दौर में अलग-अलग समुदाय में पितृसत्ता के बनाए रिवाजों के अनुसार महिलाएं हिंसा का सामना करती आ रही हैं। महिलाओं के शरीर पर स्वायत्ता बनाए रखने के लिए परंपराओं को हथियार बनाकर इस्तेमाल किया जाता रहा है। ऐसी पितृसत्तात्मक परंपराओं के केंद्र में केवल ‘महिला का शरीर’ होता है। हानिकारक पारंपरिक कुप्रथाओं को धर्म, संस्कृति और समुदाय के नाम पर पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ाया जा रहा है। 

11 साल की उम्र की लड़की के दिमाग में उस वक्त क्या चल रहा होता होगा जब उसे रोज रसोई में बंद करके उसकी ही मां द्वारा उसके उभरते स्तनों को दबाने के लिए गर्म पत्थर और आग का इस्तेमाल किया जाता है। जलन और दर्द होने पर उसे आवाज़ निकलना भी मना होता है और इस प्रक्रिया के बारे में किसी और से ज़िक्र करना तो गुनाह है। यह प्रक्रिया कई बार महीनों तक चलती है। दर्द और डर प्रथाओं के नाम पर उसके बचपन का हिस्सा बन जाते हैं। लड़कियों को यह मानने पर मजबूर किया जाता है कि स्तन का विकास होना शर्मनाक और खतरनाक है। किशोर लड़कियों के स्तन को गर्म चीज़ से दबाकर उसकी मालिश करना ब्रेस्ट आयरनिंग है। यह कुप्रथा दुनिया में आज भी प्रचलित है।

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ब्रेस्ट आयरनिंग यानि छाती को गरम प्रेस से दबाना

ब्रेस्ट आयरनिंग की परंपरा के अनुसार किशोर लड़कियों के स्तन के उभार को किसी गर्म चीज़ से दबाना, मालिश करना या बांधना है ताकि उनके विकास को रोका जा सके। ये सब इसलिए किया जाता है जिससे लड़कियों को ‘पुरुषों की नज़र’ से बचाया जा सकें। लड़कियों के स्तन उनका ध्यान अपनी ओर न खीच सकें। इस परंपरा के अनुसार लड़कियों के स्तन को विकसित होने से रोकना उनको पूरी तरह से समतल करना है। इस कारण इस प्रथा को ‘ब्रेस्ट फ्लैटनिंग’ के नाम से भी जाना जाता है। यह परंपरा पश्चिमी अफ्रीका से लेकर ब्रिटेन समेत यूरोप के कुछ अन्य क्षेत्रों तक पहुंच गई है।

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11 साल की उम्र की लड़की के दिमाग में उस वक्त क्या चल रहा होता होगा जब उसे रोज रसोई में बंद करके उसकी ही मां द्वारा उसके उभरते स्तनों को दबाने के लिए गर्म पत्थर और आग का इस्तेमाल किया जाता है। जलन और दर्द होने पर उसे आवाज़ निकलना भी मना होता है और इस प्रक्रिया के बारे में किसी और से ज़िक्र करना तो गुनाह है। किशोर लड़कियों के स्तन को गर्म चीज़ से दबाकर उसकी मालिश करना ब्रेस्ट आयरनिंग कहलाता है।

आमतौर पर यह परंपरा 11 और 15 साल की उम्र की लड़कियों के साथ की जाती है, जब वे युवावस्था में प्रवेश करती है। इस दौरान लड़कियों के शरीर में कई बदलाव होते हैं, जिसमें स्तन का उभार प्रमुख है। लड़कियों के साथ ऐसा उनके परिवार की ही महिला सदस्यों यानि मां, दादी या चाची के द्वारा किया जाता है। लड़कियों के साथ ऐसा करने का प्रमुख कारण है उन्हें यौन उत्पीड़न से बचाना।

क्या-क्या इस्तेमाल किया जाता है

ब्रेस्ट आयरनिंग के लिए अलग-अलग चीज़ों का इस्तेमाल किया जाता है। जैसे गर्म पीसने वाला पत्थर (बट्टा), कच्चा लोहा, हथौड़ा, मूसल, चम्मच या इलेक्ट्रॉनिक प्रेस आदि। इसके अलावा नारियल, केले के छिलके और कुछ पारंपरिक औषधी आदि इस्तेमाल किए जाते हैं। ब्रेस्ट आयरनिंग में युवा लड़कियों की छाती के चारों ओर कसकर पट्टियां भी बांधी जाती हैं जिसका मकसद स्तन के चारों ओर दबाव बनाना और उनको उभरने से रोकना है।  

यह प्रथा कहां प्रचलित है

यूनाइटेड नेशन के आंकलन के अनुसार दुनियाभर में 3.8 मिलियन लड़कियां ब्रेस्ट आयरनिंग से प्रभावित हैं। पश्चिम अफ्रीका के कैमरून, गिनी-बिसाऊ, चाड, टोगो और बेनिन जैसे कई देशों में ब्रेस्ट आयरनिंग विशेष रूप से व्यापक है। संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष और जर्मन डेवलपमेंट कॉरपोर्शेन के एक सर्वेक्षण अनुसार, कैमरून में हर चार में से एक लड़की के स्तनों को जल्दी विकसित होने से रोकने के लिए उनके घरवालों द्वारा उनके स्तनों को गर्म वस्तुओं से बेरहमी से दबाया जाता है। लगभग 58 प्रतिशत मामलों में यह काम लड़कियों के साथ उनकी मां करती हैं।

पूरे ब्रिटेन में भी लगभग 1000 से अधिक लड़कियों के साथ ब्रेस्ट आयरनिंग की प्रथा का प्रयोग किया जा चुका है। लेकिन इस आंकड़े को वास्तविकता के उलट भी कहा गया है। ब्रिटेन में ब्रेस्ट आयरनिंग के मामलों की संख्या इससे अधिक होने का भी अनुमान है। संयुक्त राष्ट्र ने इसे लिंग आधारित वैश्विक हिंसा की सबसे कम रिपोर्ट दर्ज होने वाले अपराध के रूप में चिन्हित किया है। 

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आमतौर पर यह परंपरा 11 और 15 साल की उम्र की लड़कियों के साथ की जाती है, जब वे युवावस्था में प्रवेश करती है। इस दौरान लड़कियों के शरीर में कई बदलाव होते हैं, जिसमें स्तन का उभार प्रमुख है। लड़कियों के साथ ऐसा उनके परिवार की ही महिला सदस्यों यानि मां, दादी या चाची के द्वारा किया जाता है।

ब्रेस्ट आयरनिंग करने के कारण

  • ब्रेस्ट आयरनिंग के बारे में यह भी कहा गया है कि ब्रेस्ट आयरनिंग की प्रथा को गांवों के मुकाबले शहरी क्षेत्र में मां के द्वारा ज्यादा किया जाता है।
  • इसका प्रमुख कारण लड़कियों को यौन उत्पीड़न और बलात्कार से बचाना है।
  • लड़कियों को जल्दी गर्भाधारण से बचाने के लिए भी यह किया जाता है।
  • बेस्ट आयरनिंग वाली लड़कियां, पुरुषों को यौन रूप से आकर्षित नहीं करती हैं। 
  • लड़कियों को जल्दी शादी करने के लिए मजबूर होने से भी बचाना है।
  • बेस्ट्र आयरनिंग से लड़कियों के साथ यौन हिंसा होने के खतरे को टाल कर उनकी शिक्षा को मंजूरी देना।

ब्रेस्ट आयरनिंग के प्रभाव 

ब्रेस्ट आयरनिंग जैसी हिंसा के प्रचलन के बाद इसके स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों पर बहुत कम शोध हुआ है। यह माना गया है कि ब्रेस्ट आयरनिंग एक बहुत खतरनाक प्रथा है जिसका न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक स्वास्थ्य पर भी बहुत बुरा असर पड़ता है। ब्रेस्ट आयरनिंग की प्रक्रिया के दौरान असहनीय पीड़ा का सामना तो करना पड़ता है साथ ही यह टिशू को खत्म करने का काम करती है। स्तनों को समतल और उनके उभार को दबाने के कारण शरीर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। ब्रेस्ट आयरनिंग के कारण किशोरियों को बुखार होने के साथ-साथ संक्रमण होने का खतरा बहुत ज्यादा होता है। स्तनों पर फोड़ा होना, उसके आस-पास पिंपल होना, स्तन के आकार में परिवर्तन, स्तन का पूरी तरह से ही गायब होना, स्तन में खुजली होना और सीने में दर्द होने जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। चिकित्सा विशेषज्ञो के अनुसार ब्रेस्ट आयरनिंग स्तन कैंसर, स्तन में सिस्ट और भविष्य में स्तनपान में बाधा उत्पन्न होने का बड़ा कारण बनता है।      

दुनियाभर में इस हानिकारक हिंसा के कारण लड़कियों पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ रहा है। यौन उत्पीड़न से बचाने के नाम पर उनके साथ दूसरी हिंसा हो रही है जिसे घरेलू विषय बताकर इस पर खुलकर बातें भी न के बराबर होती है। विश्वभर में ब्रेस्ट आयरनिंग के बारे में ज्यादा चर्चा न होने के कारण इस अपराध के खिलाफ कठोर कानून की कमी है। दुनिया में बड़ी संख्या में लड़कियों को सुरक्षा के नाम पर ऐसी प्रथा के अधीन किया जा रहा है।

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तस्वीर साभारः Daily Express

स्रोत: Breast Ironing as a harmful traditional practice in Cameroon

मैं पूजा राठी पश्चिमी उत्तर-प्रदेश के मुज़फ़्फ़रनगर की रहने वाली हूँ। अपने आसपास के माहौल मे फ़िट नहीं बैठती हूँ।सामाजिक रूढ़िवाद, जाति-धर्मभेद, असमानता और लैंगिक भेद में गहरी रूचि है। नारीवाद व समावेशी विचारों की पक्षधर हूँ। खुद को एक नौसिखिया मानती हूँ, इसलिए सीखने की प्रक्रिया हमेशा जारी रखती हूँ।

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