दक्षिण कोरिया में नारीवाद विरोधी आंदोलन और राष्ट्रपति चुनाव 
तस्वीर साभारः East Asia Forum
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महिलाओं के आरक्षण की निंदा, देश के लिए ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीतने वाली महिला खिलाड़ी को छोटे बालों के लिए ‘फेमिनिस्ट’ कहकर उसकी ऑनलाइन ट्रोलिंग और देश से लैंगिक समानता के मंत्रालय की खत्म करने की कवायद, जैसी प्रतिक्रियाएं दक्षिण कोरियाई समाज में बीते कुछ समय से लगातार देखने को मिल रही हैं। देश में महिलाओं की सार्वजनिक क्षेत्र में सक्रिय भूमिका को समस्या बताया जा रहा है और नारीवाद को इसकी जड़ कहा जा रहा है। यहां तक कि हाल ही में चुनाव में जीत हासिल कर चुके देश के मौजूदा राष्ट्रपति यून सुक-योल भी इसमें शामिल हैं। देश की दोनों प्रमुख पार्टियों के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवारों ने युवा पुरुष मतदाताओं को लुभाने के लिए अपने चुनावी अभियान में नारीवाद विरोधी बयानबाजी का इस्तेमाल किया।

एंटी-फेमिनिस्ट मूवमेंट की शुरुआत कब हुई

दक्षिण कोरिया में नारीवाद को एक मानसिक बीमारी कहा जा रहा है। ऑनलाइन स्पेस में नारीवादी के विरोध में लोगों द्वारा एक आंदोलन चलाया जा रहा है। ‘द डिप्लोमेट’ के अनुसार साल 2017 में राष्ट्रपति मून जे-इन ने ‘नारीवादी राष्ट्रपति’ के वादे के तहत देश में लैंगिक समानता बढ़ाने का अभियान चलाया। लैंगिक असमानता को कम करने के इन प्रयासों के साथ दक्षिण कोरिया में #MeToo आंदोलन की ओर भी ध्यान दिया गया। इसी के साथ दक्षिण कोरिया में एंटी-फेमिनिस्ट मूवमेंट की शुरुआत हुई। साल 2018 में #MeToo और #MyLifeIsNotYourPorn मूवमेंट तेजी से शुरू हुआ। दक्षिण कोरिया में महिलाएं स्पाईकैम से निपटने और महिलाओं के खिलाफ उत्पीड़न और हत्या की बढ़ती घटनाओं पर ध्यान देने के लिए आह्वान कर रही थीं।

महिलाओं के आरक्षण की निंदा, देश के लिए ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीतने वाली महिला खिलाड़ी को छोटे बालों के लिए ‘फेमिनिस्ट’ कहकर उसकी ऑनलाइन ट्रोलिंग और देश से लैंगिक समानता के मंत्रालय की खत्म करने की कवायद, जैसी प्रतिक्रियाएं दक्षिण कोरियाई समाज में बीते कुछ समय से लगातार देखने को मिल रही हैं। देश में महिलाओं की सार्वजनिक क्षेत्र में सक्रिय भूमिका को समस्या बताया जा रहा है और नारीवाद को इसकी जड़ कहा जा रहा है।

मुख्य रूप से जासूसी कैमरों द्वारा यौन उत्पीड़न के बढ़ते मामलों के विरोध में महिलाओं ने विरोध प्रदर्शन करना शुरु किया था। दक्षिण कोरिया में सार्वजनिक जगह, परिवहन, होटल, पब्लिक बॉथरूम, होटल रूम और तो और स्कूल में जासूसी कैमरों से महिलाओं की वीडियो बनाकर उनको धमकी दी जाती थी। दक्षिण कोरिया में जासूसी कैमरों के वीडियो के द्वारा यौन उत्पीड़न के बहुत ज्यादा मामले बढ़ रहे थे। नारीवादी और समानता के इन विचारों के ख़िलाफ़ पीपीई पार्टी नेता और अन्य रूढ़िवादी लोगों ने नारीवादी विचार को एक अधिनाकयवादी प्रतिक्रिया बताया। इसी तरह के विचारों के तहत साल 2021 में दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति चुनाव में लैंगिक समानता और परिवार मंत्रालय को पुरुषों के खिलाफ काम करने की संस्था करार दिया गया।

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लैंगिक समानता में दक्षिण कोरिया की स्थिति

नौकरियों में प्रतिस्पर्धाओं का सामना करने वाले कोरियाई पुरुष नारीवादी विचारों को एक ऐसी ताकत के रूप में देखते हैं जो सक्रिय रूप से उनके खिलाफ है। नारीवाद के खिलाफ बोलनेवालों के अनुसार यह विचारधारा महिलाओं को गलत तरीके से फायदा पहुंचा रही है। वहीं, इससे अलग-अलग रिपोर्टों के अनुसार दक्षिण कोरिया के औद्योगिक जगत में महिलाओं के अधिकारों के लिए दुनिया में सबसे खराब रिकॉर्ड है। इंडिया टाइम्स में छपी रिपोर्ट के अनुसार दक्षिण कोरिया के कॉपोरेट जगत में केवल पांच प्रतिशत महिलाएं बोर्ड में शामिल हैं। दक्षिण कोरिया ‘द इकोनॉमिस्ट ग्लास-सीलिंग इंडेक्स’ में लगातार दस वर्षों से निचले पायदान पर है।

संपन्न देशों में शामिल दक्षिण कोरिया वह देश है जहां जेंडर पे गैप बहुत अधिक है। दक्षिण कोरिया में लगभग 70 प्रतिशत महिलाएं कार्यबल में शामिल हैं। लेकिन ओईसीडी देशों की सूची में सबसे अधिक वेतन में असमानता वाले देशों में से दक्षिण कोरिया प्रमुख है। सार्वजनिक रूप से सूचीबद्ध व्यसायाओं में केवल 5.2 प्रतिशत महिलाएं कार्यरत हैं। वर्ल्ड बैंक के अनुसार दक्षिण कोरिया में केवल 17 प्रतिशत सीट महिलाओं के पास हैं। लेकिन इन सब आंकड़ों से इतर हाल में संपन्न हुए राष्ट्रपति के चुनाव में पुरुष मतदाताओं से समर्थन हासिल करने के लिए देश में लैंगिक विभाजन को जोर-शोर से हवा दी गई। पुरुषों को लैंगिक भेदभाव का शिकार बताया गया और लैंगिक समानता मत्रांलय को भंग करने के लिए कहा गया।

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नौकरियों में प्रतिस्पर्धाओं का सामना करने वाले कोरियाई पुरुष नारीवादी विचारों को एक ऐसी ताकत के रूप में देखते हैं जो सक्रिय रूप से उनके खिलाफ है। नारीवाद के खिलाफ बोलनेवालों के अनुसार यह विचारधारा महिलाओं को गलत तरीके से फायदा पहुंचा रही है।

आनलॉइन अधिक मुखर होता आंदोलन

राजनैतिक तौर पर युवा वोटर को अपनी तरफ करने के लिए दक्षिण कोरिया की दोनों प्रमुख पार्टियों की ओर से महिला विरोधी बातें कहीं गई है। एंटी-फेमिनिस्ट मूवमेंट आंदोलन मुख्य रूप से ऑनलाइन स्पेस में बहुत ज्यादा व्यापक है। नारीवादियों को सार्वजनिक रूप से टॉरगेट किया जाता है। उनके छोटे बाल रखने, नारीवादी लेखकों को पढ़ने के कारण उनकी ऑनलाइन ट्रोलिंग की जाती है। विज्ञापनों, महिला विश्वविद्यालय और लैंगिक समानता मंत्रालय को भंग करने की मांग और मंत्रालय को टैक्स के पैसे की बर्बादी कहा गया। नारीवाद का समर्थन करने वाले लोगों के खिलाफ बहुत उग्र प्रतिक्रियाएं इंटरनेट पर देखने को मिलती हैं। यहीं नहीं ‘चैक फैमी’ नाम की एक एंटी फेमिनिस्ट साइट के द्वारा मशहूर हस्तियों को अलग-अलग कैटीगिरी में बांटा हुआ है। इस वेबसाइट ने तीन ग्रुप, संदिग्ध, सत्यापित और अत्याधुनिक में बांटा हुआ है। ‘म्यूजिक मुंडियाल’ पर छपी ख़बर के मुताबिक वेबसाइट एडमिन के अनुसार यह सिस्टम नारीवादियों की पहचान करने के लिए है। लोगों को किस सेलिब्रिटी को फॉलो करना है और किसे नही। इसमें मदद पहुंचाने का काम करता है।

इस तरह की डिजिटल हिंसा और ऑनलाइन घृणा दक्षिण कोरियाई इंटरनेट स्पेस में बहुत ज्यादा है। कई स्थितियों में यह बहुत ज्यादा बढ़ जाती है। ऑनलाइन, नारीवाद के विरोध की लाइव स्ट्रीमिंग की गई और बड़ी संख्या में लोगों ने इसमें हिस्सा लिया। नारीवाद विरोधी ग्रुप के मुख्य बई इन-ग्यू ने सोशल मीडिया पर नारीवादियों की अगस्त 2021 में एक रैली की लाइव वीडियो शेयर करते हुए कहा, “मैं सभी का मर्डर करने जा रहा हूं।” जोकर का भेष बनाकर प्रतीकात्मक रूप से पानी वाली बंदूक लेकर वह रैली में पहुंचे। पब्लिक ने इस वीडियो को बड़ी संख्या में पंसद किया था। इस तरह की घटनाएं वास्तविक जीवन में महिलाओं के प्रति खतरा पैदा करती है और उनके खिलाफ हिंसा को उकसाती है।

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राजनीतिक परिदृश्य

दक्षिण कोरिया के 2022 के राष्ट्रपति चुनाव में नारीवादी विरोधी आंदोलन प्रमुख रूप से मुद्दा बना रहा। युवा पुरुषों के वोट को हासिल करने के लिए नारीवादी विरोधी विचारों को बहुत ज्यादा प्रचारित किया गया। ‘द गार्डियन’ के अनुसार पीपल पावर पार्टी के यून सुक-योल ने लिबरल पार्टी के उम्मीदवार ली जे-म्युंग को 2,63,000 वोटों के करीब अंतर से हराया है। यून की जीत में नारीवाद विरोधी प्रतिक्रियाएं जीत का एक प्रमुख कारण रही है। यून ने देश में कम बर्थरेट होने का कारण नारीवाद को ठहराया है। उन्होंने लैंगिक समानता मंत्रालय को खत्म करने को कहा। जिसके बारे में उनका कहना है कि यह बहुत अधिक महिला अधिकारों के बारे में बात करता है जिसकी देश में जरूरत नहीं है। यही नहीं, उन्होंने यौन हिंसा के झूठे आरोपों के लिए सजा बढ़ाने का वादा किया है।

दक्षिण कोरिया के मौजूदा राष्ट्रपति यून सुक-योल, तस्वीर साभार: BBC

यह मंत्रालय मुख्यतः परिवार आधारित सुविधाएं, शिक्षा, और सामाजिक कल्याण की सुविधाएं मुहैया कराता है। इसमें देश के वार्षिक बजट का 0.2 प्रतिशत खर्च होता है। जिसमें से 3 प्रतिशत से भी कम महिलाओं के लिए समानता को बढ़ावा देने की ओर जाता है। दक्षिण कोरिया में प्रमुख पार्टियों ने अपनी चुनीवी रणनीति में मुख्य रूप से नारीवाद विरोधी विचारों को इस्तेमाल किया। 

दक्षिण कोरिया की राजनीति में बहुत ही अधिक उग्र लैंगिक समानता विरोधी विचार मौजूद है। कई युवा पुरुष, महिलाओं की तरक्की को अपनी वित्तीय सुरक्षा के लिए खतरा मानते हैं। नौकरियों में बढ़ती प्रतिस्पर्धा, बढ़ते दाम और सैन्य सेवा करने की बाध्यता को बाधा बताया। एक सर्वे में युवा पुरुषों का कहना है कि वे लैंगिक भेदभाव के शिकार है। बीबीसी में प्रकाशित ख़बर अनुसार पिछले साल एक स्थानीय अखबार द्वारा किए सर्वे के मुताबिक 79% युवाओं का मानना है कि उनके साथ लैंगिक भेदभाव हो रहा है।

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तस्वीर साभारः East Asia Forum

मैं पूजा राठी पश्चिमी उत्तर-प्रदेश के मुज़फ़्फ़रनगर की रहने वाली हूँ। अपने आसपास के माहौल मे फ़िट नहीं बैठती हूँ।सामाजिक रूढ़िवाद, जाति-धर्मभेद, असमानता और लैंगिक भेद में गहरी रूचि है। नारीवाद व समावेशी विचारों की पक्षधर हूँ। खुद को एक नौसिखिया मानती हूँ, इसलिए सीखने की प्रक्रिया हमेशा जारी रखती हूँ।

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