द्रौपदी मुर्मू हो सकती हैं देश की दूसरी महिला राष्ट्रपति
तस्वीर साभारः The Economic Times
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द्रौपदी मुर्मु देश की पहली आदिवासी महिला हैं जो किसी राज्य की राज्यपाल रह चुकी हैं। वह झारखंड में सबसे लंबे समय तक राज्यपाल के पद आसीन रही हैं। अब द्रौपदी मुर्मू का नाम एनडीए की ओर से देश के आगामी राष्ट्रपति चुनाव में राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के तौर पर घोषित किया गया है। अगर मुर्मू यह चुनाव जीत जाती हैं तो वह भारत की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति बनने का गौरव प्राप्त करेंगी। आइए, इस लेख के माध्यम से जानते हैं उनके राजनीतिक सफर के बारे में। 

एनडीए की ओर से राष्ट्रपति उम्मीदवार

राष्ट्रपति पद के लिए घोषित प्रत्याशी द्रौपदी मुर्मू, इस चुनाव में विजय हासिल करती हैं तो वह भारत की पहली आदिवासी और दूसरी राष्ट्रपति महिला बन सकती हैं। इससे पहले भारत के 12वें राष्ट्रपति के तौर पर प्रतिभा पाटिल देश की पहली महिला राष्ट्रपति बनी थीं। यूपीए की तरफ से वह साल 2007 से 2012 तक भारत के राष्ट्रपति पद पर आसीन रहीं। द्रौपदी मुर्मू ने अपनी उम्मीदवारी की घोषणा के बाद स्थानीय मीडिया कंलिगा टीवी से कहा, “इस घोषणा के बाद मैं आश्चर्यचकित हूं और खुश हूं। मुझे अपनी उम्मीदवारी के बारे में जानकारी टीवी के ज़रिये मिली है। राष्ट्रपति एक संवैधानिक पद है और अगर मैं जीतती हूं तो इसकी गरिमा बनाए रखूंगी। मैं राजनीति से अलग देश के लोगों के लिए काम करूंगी।”

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वहीं, विपक्ष की ओर से यशवंत सिन्हा का नाम इस पद के लिए घोषित किया गया है। यशवंत सिन्हा झारखंड की हजारीबाग सीट से भाजपा के लोकसभा सांसद रह चुके हैं। वह अटल बिहारी सरकार में भारत के वित्त मंत्री के अलावा कई मंत्रालय की कमान संभाल चुके हैं। भाजपा के साथ लंबी राजनीतिक पारी के बाद साल 2018 में वह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए पार्टी से अलग हो गए थे। वर्तमान में वह तृणमूल कांग्रेस से जुड़े हुए हैं। 

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इससे पहले साल 2017 के राष्ट्रपति चुनाव में भी मुर्मू के नाम की चर्चा हुई थी, लेकिन आखिर में बीजेपी ने रामनाथ कोविंद को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बना दिया था। वह चुनाव जीतकर देश के राष्ट्रपति बनें अब उनका कार्यकाल 24 जुलाई को खत्म हो रहा है। आगामी 18 जुलाई को राष्ट्रपति पद के लिए मतदान होगा और 21 जुलाई को नतीजा सबके सामने होगा।

द्रौपदी मुर्मू ने अपनी उम्मीदवारी की घोषणा के बाद स्थानीय मीडिया कंलिगा टीवी से कहा, “इस घोषणा के बाद मैं आश्चर्यचकित हूं और खुश हूं। मुझे अपनी उम्मीदवारी के बारे में जानकारी टीवी के जरिये मिली है। राष्ट्रपति एक संवैधानिक पद है और अगर में जीतती हूं तो इसकी गरिमा बनाए रखूंगी। मैं राजनीति से अलग देश के लोगों के लिए काम करूंगी।”

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प्रारंभिक जीवन

द्रौपदी मुर्मू का जन्म 20 जून, 1958 में ओडिशा के मयूरभंज जिले के बैदापोसी गाँव में आदिवासी परिवार में हुआ था। मुर्मू संथाल समुदाय से ताल्लुक रखती हैं। उनके पिता का नाम बिरंची नारायण टुडू था। उन्होंने भुवनेश्वर के रामा देवी वीमेंस कॉलेज से स्नातक की डिग्री हासिल की। उनका विवाह श्याम चरण मूर्मू के साथ हुआ था लेकिन कम उम्र में ही उनका निधन हो गया था। उनकी तीन संतान, दो बेटे और एक बेटी हुई। हालांकि, उनके दोनों बेटों की मृत्यु असमय हो गई। उनकी एक बेटी इतिश्री मुर्मू हैं। 

द्रौपदी मुर्मू ने राजनीति में कदम रखने से पहले ओडिशा सरकार के सचिवालय में काम कर चुकी हैं। 1979 से 1983 तक वह सिंचाई और ऊर्जा विभाग में जूनियर सहायक के तौर पर नौकरी कर चुकी हैं। उन्होंने कुछ सालों शिक्षक के तौर पर भी काम किया है। 1994 में शिक्षक के तौर पर उन्होंने रायरंगपुर के श्री अरविंदो इटिग्रल एजुकेशन सेंटर में पढ़ाया।

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राजनीतिक सफर

द्रौपदी मुर्मू ने राजनीति में कदम साल 1997 में रखा था। वह पहली बार नगर पंचायत के चुनाव में जीत कर स्थानीय पार्षद बनी थीं। इसी साल उन्होंने भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ली थी। इसके तीन साल बाद उन्होंने विधानसभा चुनाव में हिस्सा लिया। साल 2000 में वह रायरंगपुर विधानसभा सीट से बीजेपी के टिकट से पहली बार विधानसभा पहुंची। इस दौरान वह राज्य सरकार में मंत्री भी रहीं। राज्य में नवीव पटनायक की बीजू जनता दल के साथ भारतीय जनता पार्टी की ओडिशा में गठबंधन सरकार थी। मुर्मू ने 2009 में दोबारा इस सीट से जीत हासिल की थी।  

द्रौपदी मुर्मू ओडिशा की पहली आदिवासी महिला नेता बनीं जिन्हें राज्यपाल के रूप में नियुक्त किया गया। 18 मई 2015 में वह झारखंड की पहली महिला राज्यपाल बनीं। इस पद पर वह 12 जुलाई 2021 तक बनी रहीं। वह झारखंड की पहली राज्यपाल हैं, जिन्होंने अबतक पाँच साल के कार्यकाल से ज्यादा समय तक अपनी सेवा दी।

द्रौपदी मुर्मू ने ओडिशा सरकार में मंत्री भी रह चुकी हैं। मंत्री के तौर पर वह वाणिज्य, परिवहन, मत्स्य पालन और पशु संसाधन विभाग को संभाला। साल 2007 में ओडिशा विधान सभा ने उन्हें सर्वश्रेष्ठ विधायक के लिए ‘नीलकंठ पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया था। राजनीति में वह लगातार आगे बढ़ती चली गई और विधायक के बाद वह राज्यपाल भी चुनी गई।

राज्यपाल बनने से पहले मुर्मू बीजेपी के अनुसूचित जाति मोर्चा की उपाध्यक्ष और बाद में अध्यक्ष चुनी गई। 2006 से 2009 तक वह इस पद पर बनी रही। मुर्मू साल 2010 में मयूरभंज (पश्चिम) की भाजपा जिलाध्यक्ष रह चुकी हैं। 2013 में दोबारा वह इस पद के लिए चुनी गई। इसी साल उन्हें भाजपा राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य के तौर पर भी नामित किया गया। राज्यपाल के पद की शपथ लेने से पहले अप्रैल 2015 तक वह जिलाध्यक्ष के पद पर बनीं रही थी।

झारखंड की पहली महिला राज्यपाल

द्रौपदी मुर्मू ओडिशा की पहली आदिवासी महिला नेता बनीं जिन्हें राज्यपाल के रूप में नियुक्त किया गया। 18 मई 2015 में वह झारखंड की पहली महिला राज्यपाल बनीं। इस पद पर वह 12 जुलाई 2021 तक आसीन रही। वह झारखंड की पहली राज्यपाल हैं, जिन्होंने अब तक पांच साल के कार्यकाल से ज्यादा समय तक अपनी सेवा दी। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण फैसले लिए। 

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मैं पूजा राठी पश्चिमी उत्तर-प्रदेश के मुज़फ़्फ़रनगर की रहने वाली हूँ। अपने आसपास के माहौल मे फ़िट नहीं बैठती हूँ।सामाजिक रूढ़िवाद, जाति-धर्मभेद, असमानता और लैंगिक भेद में गहरी रूचि है। नारीवाद व समावेशी विचारों की पक्षधर हूँ। खुद को एक नौसिखिया मानती हूँ, इसलिए सीखने की प्रक्रिया हमेशा जारी रखती हूँ।

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