इंटरसेक्शनलजेंडर सेल्फ लव की बदौलत किस तरह जीवन के प्रति बदला मेरा नज़रिया

सेल्फ लव की बदौलत किस तरह जीवन के प्रति बदला मेरा नज़रिया

इस अनुभव के बाद मुझे यह महसूस हुआ कि खुद से प्रेम करना कितना महत्वपूर्ण है क्योंकि जब हम खुश रहते हैं तब हम अपने आस-पास के लोगों को भी खुश रख सकते हैं। इस अनुभव से मेरे विचारों में भी बहुत बदलाव हुआ है। मैंने कई नई बातें नए दृष्टिकोण से सीखीं, जिसमें से एक ‘प्रेम करना’ भी है।

सेल्फ़ लव, जो मनोविज्ञान और दार्शनिक क्षेत्रों में गहराई से निहित है। यह व्यक्ति के जीवन के विभिन्न पहलुओं पर गहरा प्रभाव डालता है। सेल्फ़ लव को अपनाना, विकसित करना मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य, रिश्तों में सुधार, बढ़ी हुई सहनशक्ति और समग्र व्यक्तिगत विकास की दिशा में ले जा सकता है। सेल्फ़ लव के मुख्य लाभों में से एक मानसिक स्वास्थ्य पर इसके सकारात्मक प्रभाव का होना है। जब व्यक्ति ख़ुद की वास्तविक प्रशंसा विकसित करता हैं तो उसे अक्सर तनाव, चिंता और अवसाद के कम स्तर का अनुभव होता है। अपने स्वाभाविक मूल्य को पहचानकर और अपनी आवश्यकताओं को मूल्य देने के माध्यम से लोग मानसिक सहनशक्ति और भावनात्मक स्थिरता के लिए एक नींव बनाते हैं। यह स्वानुभूति उन्हें जीवन की चुनौतियों को एक अधिक शांति और दृष्टिकोण के साथ नेविगेट करने की क्षमता प्रदान करती है।

ऐसे ही मेरे जीवन में भी सेल्फ लव की खोज कुछ बेहद अवसादग्रस्त होने के बाद सामने आई। मेरी सेल्फ़ लव की खोज से पहले मैं बहुत दिनों तक अवसादग्रस्त रही। कक्षा 12वीं की परीक्षा के समय मेरे पड़ोस में आत्महत्या से हुई मौत ने मुझे बहुत अधिक निराश कर दिया जिसके फलस्वरूप मुझे नींद आने में मुश्किलें होने लगी। इसके बाद स्कूल में बुली होने के बावजूद मैं कभी इस तथ्य को समझ नहीं पायी कि मुझे बुली किया जा रहा है। मेरे साथ ऐसा होता रहा लेकिन मैं इसे महसूस नहीं कर पा रही थी। जब मैं 10वीं कक्षा में थी हमारी नीति शिक्षा के आख़िरी अवधि में हमें एक खेल खिलाया गया था। जहां हमें अपने दोस्तों के नाम लिखकर उन्हें टीचर की मेज पर रखना था, लेकिन मेरा नाम किसी पर्चे में नहीं था। इससे मुझे पहली बार अकेलेपन का एहसास हुआ और यह एहसास बारह सालों के स्कूल के बाद भी रहा।

पहले मुझे अकेलेपन से डर लगता था लेकिन फिर धीरे-धीरे मुझे एकांत अच्छा लगने लगा। इसी दौरान मैंने अपने आत्म-ज्ञान का समय निकाला और नई आदतें डाली जैसे कि सही समय पर उठना, ठीक समय पर खाना खाना और समय पर सोना।

खुद का ख्याल रहने से बदला मेरा जीवन

मैंने कोई दोस्त नहीं बनाए, न स्कूल में और न ही जीवन में। इससे पहले अकेलेपन का एहसास मुझे छठी कक्षा में हुआ था जब मेरी मासी की शादी हुई थी क्योंकि मैं बचपन से नानी के घर पली बड़ी हूं इसलिए मुझे माँ के साथ होने का एहसास कम होता था। धीरे-धीरे कक्षा के बाद मुझे महसूस हुआ कि इस जीवन में भी मैं अकेली हूँ हालांकि लोग मेरे साथ हैं लेकिन कोई साथी नहीं है। कोविड के समय मैंने कुछ नए लोगों से जुड़कर जीवन में नये पहलू और खुद के ख्याल और प्यार के महत्व का अनुभव किया। उन्होंने मेरे अवसाद के बावजूद मुझे समझा और मेरे लिए कई सुझाव दिए। उनमें से एक था डायरी लिखने की आदत इससे मेरे जीवन को बेहतर बनाने का रास्ता बना। मैंने समझा कि किसी व्यक्ति की मौजूदगी ने मेरे जीवन को इतना प्रभावित नहीं किया जितना मैंने सोचा था और इससे मैंने अलगाव करना सीखा और ख़ुद से अधिक प्यार करना शुरू किया। 

पहले मुझे अकेलेपन से डर लगता था लेकिन फिर धीरे-धीरे मुझे एकांत अच्छा लगने लगा। इसी दौरान मैंने अपने आत्म-ज्ञान का समय निकाला और नई आदतें डाली जैसे कि सही समय पर उठना, ठीक समय पर खाना खाना और समय पर सोना। मैंने नए स्थानों की यात्राएं की, दोबारा से फ़िल्मो की ओर लौटी, पुराने गाने सुने और अपने शहर की खोज में निकली। धीरे-धीरे मैंने जीवन का आनंद लेना शुरू किया और एकाकीपन को समझा। इस अनुभव के बाद मुझे यह महसूस हुआ कि खुद से प्रेम करना कितना महत्वपूर्ण है क्योंकि जब हम खुश रहते हैं तब हम अपने आस-पास के लोगों को भी खुश रख सकते हैं। इस अनुभव से मेरे विचारों में भी बहुत बदलाव हुआ है। मैंने कई नई बातें नए दृष्टिकोण से सीखीं, जिसमें से एक ‘प्रेम करना’ भी है।

फेमिनिज़म इन इंडिया के लिए रितिका बैनर्जी।

मेरी इस खोज के दौरान मुझे अपने बारे में जो चीज़ दिखी वो है “स्वीकारिता”। मैंने अपने आत्मविश्लेषण में वृद्धि करते हुए अपनी स्वीकृति की और खुद के साथ खुलकर मुकाबला किया। अपनी गलतियों और गुणों को स्वीकार किया और इसके बाद खुद पर काम किया और यह प्रक्रिया अभी चल रही है। इससे मेरा जीवन सहज बन गया है और अब मुझे अपनी गलतियों से सीखने में कोई शर्म नहीं आती। मेरी स्वीकृति ने मुझे अधिक सहिष्णुता और खुद की शारीरिक स्थिति को लेकर भी स्वीकारिता दी जिसके कारण मैं हमेशा चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों का सामना करती रही हूँ। इस दौरान मैंने जो अनुभव किया उसमें सेल्फ लव व्यक्तिगत विकास के लिए एक प्रेरक भी बनता है। जब हम खुद के भले को प्राथमिकता देते हैं और अपने विकास में निवेश करते हैं तो सतत सुधार की यात्रा पर निकलते हैं। इसमें अपनी रुचियों का पीछा करना, लक्ष्य तय करना, प्राप्ति करना,  सीखने और आत्म-प्रकटन के लिए अवसरों को अपनाना शामिल हो सकता है। इस प्रक्रिया के माध्यम से व्यक्ति न केवल अपने कौशल और क्षमताओं को बढ़ाते हैं बल्कि अपने मूल्यों और आकांक्षाओं की गहरी समझ भी हासिल करते हैं।

सेल्फ़ लव का व्यक्तिगत भलाइयों और पूर्णता का एक मौलिक पहलू है जो व्यक्ति को खुद की सराहना और स्वीकृति का सामर्थ्य प्रदान करता है। हालांकि, व्यक्तियों द्वारा सेल्फ़ लव को देखने और अमल करने की दृष्टि को सामाजिक रचनाओं विशेषकर जेंडर का भी प्रभाव पड़ता है। कोई व्यक्ति खुद को कैसे देखते हैं और सेल्फ लव को कैसे विकसित करते हैं इसका दूरदर्शी परिणाम होता है विशेषकर महिलाओं और नॉन-बाइनरी व्यक्तियों के संदर्भ में लेकिन लैंगिक भेदभाव और लैंगिक भूमिकाओं के बीच खुद से प्यार करना बहुत कठिन भी होता है। उदाहरणस्वरूप जब कोई मुझ जैसी पतली कद की महिला फिटनेस पर चर्चा करती है तो उसे कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है जिसमें बॉडी शेमिंग एक आम संदर्भ है। 

सेल्फ लव के बीच जेंडर की नहीं होनी चाहिए बाधा

ख़ासकर बाहरी सौंदर्य के मामले में अक्सर इसे काफ़ी हद तक औरतों तक सीमित कर दिया जाता है। सांवले रंग को लेकर आज भी समाज में रूढ़िवाद मौजूद है। ख़ासतौर पर महिलाओं और लड़कियों को सांवले रंग पर उन्हें बहुत कुछ सहना पड़ता है। कई क्रीम के विज्ञापनों में दिखाया जाता है कि गोरे रंग के बिना कोई अस्तित्व नहीं है। दूसरी ओर मर्दों के लिए फेयर एंड हैंडसम जैसे प्रोडक्ट बाजार में आ गए है। लेकिन बात जब सीधे-सीधे मेकअप करने की आती है तो हम मर्दों के बारे में संदिग्ध हो जाते है और उन्हें संपूर्ण रूप से मर्द मानने से भी इंकार करते है। कई बार मेकअप करते हुए मर्दों को देखकर लोग उन्हें अपमानजनक संबोधन से पुकारते हैं। इससे यह समझ में आता है हम न केवल महिलाओं को बल्कि पुरुषों को लेकर भी काफ़ी हद तक असहज है। 

नॉन-बाइनरी व्यक्तियों को मेकअप करते हुए देखा जाता है तो लोग आश्चर्यचकित होते हैं जैसे सजना संवरना केवल एक जेंडर से ही संबंधित है। मेकअप का इतिहास 6000 बीसवीं तक जाता है, जब मिस्र के लोगों ने इसे ईश्वरीयता के प्रति भक्ति का एक रूप माना और सभी सामाजिक वर्गों के पुरुष और महिलाएं इसे धारण करते थे। हालांकि, आजकल बाहरी सौंदर्य की प्रोत्साहना में जेंडर भेदभाव आ सकता है, जब व्यक्ति अपनी स्वस्थ अनुकूलता को महत्व देता है। मेरे कई पुरुष दोस्तों ने अपनी नोज़ पियर्सिंग को लेकर यह अनुभव किया है कि समाज इसे गलत समझता है।

सेल्फ लव का एक पहलुओं में यह है कि हमें अपनी देखभाल स्वयं करनी चाहिए, इसे हम सेल्फ केयर कहते हैं।  लेकिन कई बार हमारे छोटे या बड़े भाई जब भी घर के या रसोई से जुड़े कार्यों में भाग लेते हैं तो उन्हें टोक दिया जाता है। जिससे उन्हें अकेले रहने के लिए कभी तैयार नहीं किया जाता और वे हमेशा किसी पर निर्भर रहते हैं।

मेरे आसपास कितनी महिलाएं हैं जो सेल्फ लव और सामाजिक जागरूकता की कमी से गुजर रही हैं या फिर यह कह सकती हूँ कि सामाजिक चेतना के कारण कभी-कभी वे अपने बारे में ध्यान नहीं दे पातीं। मेरी मासी, जिनकी उम्र लगभग 40 साल है उनको यह आबूझ गया है कि वह बूढ़ी हो रही हैं और उन्हें जल्दी ही शादी कर लेनी चाहिए। क्योंकि उन्हें लगता है कि उनके शारीरिक सौंदर्य ख़त्म होने के बाद कोई उन्हें पसंद नहीं करेगा। यह समाज में एक अजीब परिप्रेक्ष्य प्रकट करता है जो कम उम्र की महिलाओं को ही स्वीकार करता है। यही वजह कि बढ़ती उम्र की महिलाओं को इस वजह से मिसफिट महसूस करा देता है। 

फेमिनिज़म इन इंडिया के लिए श्रिया टिंगल।

सेल्फ लव का एक पहलुओं में यह है कि हमें अपनी देखभाल स्वयं करनी चाहिए, इसे हम सेल्फ केयर कहते हैं।  लेकिन कई बार हमारे छोटे या बड़े भाई जब भी घर के या रसोई से जुड़े कार्यों में भाग लेते हैं तो उन्हें टोक दिया जाता है। जिससे उन्हें अकेले रहने के लिए कभी तैयार नहीं किया जाता और वे हमेशा किसी पर निर्भर रहते हैं। जिसकी वजह से वे अपने आप ख्याल नहीं रख पाती है और हमेशा एक साथी की तालाश में होते है जो उनके कार्य में मदद कर सकें। अगर हम अपने भाइयों को इस दिशा में जागरूक करते हैं तो समाज में न केवल सेल्फ लव और सेल्फ केयर की प्रोत्साहना हो सकती है, बल्कि आत्मनिर्भरता की दिशा में भी कदम बढ़ सकता है और पुरुषों द्वारा महिलाओं को लेकर घरेलू संदर्भ में समानुभुति की भावना बढ़ सकती है और एक सेफ स्पेस बन सकती है।

जब जेंडर भेदभाव के दृष्टिकोण से सेल्फ़ लव को देखा जाता है तो सामाजिक आशाओं और व्यक्तिगत कल्याण के बीच जटिल संबंध का खुलासा होता है। हम एक ओर समृद्धिकारी दुनिया की दिशा में प्रयासरत हैं, इसलिए यह आवश्यक है कि हम उन संरचनाओं को पहचानें और खत्म करें जो जेंडर भेदभाव को बनाए हुए हैं। ऐसा करके, हम सभी लिंगों के व्यक्तियों के लिए एक गहरे सेल्फ लव की भावना विकसित करने के लिए मार्ग खोलते हैं, जो विविधता का समर्थन करने वाले और हर व्यक्ति को उनकी सच्ची पहचान को अपनाने की शक्ति प्रदान करने की जमीन का निर्माण करता है।

डायरी लिखने की आदत इससे मेरे जीवन को बेहतर बनाने का रास्ता बना। मैंने समझा कि किसी व्यक्ति की मौजूदगी ने मेरे जीवन को इतना प्रभावित नहीं किया जितना मैंने सोचा था और इससे मैंने अलगाव करना सीखा और ख़ुद से अधिक प्यार करना शुरू किया। 

मुझे हैरानी है कि सिर्फ महिलाएं ही नहीं, पुरुषों को भी सेल्फ लव से दूर रखने का प्रयास किया जाता है। उन्हें बचपन से ही कठोर मानसिकता में बनने के लिए प्रेरित किया जाता है, जिससे वे खुद को समझने में कभी भी समर्थ नहीं होते। इससे उन्हें अपनी भावनाओं को समझने में कठिनाई होती है और अंसवेदनशीलता के ज्यादा करीब आते हैं। हमें चाहिए कि हम पुरुषों में सेल्फ लव की जागरूकता बढ़ा सकें, ताकि हम समाज को सुंदर और सुरक्षित बना सकें। जहां हर व्यक्ति खुद को समझता है और स्वयं से प्रेम करता है। इससे समझाया जा सकता है कि प्रेम हमारे जीवन में कितना महत्वपूर्ण है और यह साहसी ख्याल हमें स्वतंत्र बना सकता है, जिससे हम अपने और अन्यों के समृद्धि की दिशा में काम कर सकते हैं।


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