अंजू बॉबी जॉर्जः वर्ल्ड चैंपियशिप में मेडल जीतने वाली इकलौती भारतीय एथलीट
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लॉन्ग जंप एथलीट अंजू बॉबी जॉर्ज वह नाम हैं जिन्होंने कई उपलब्धियां हासिल कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम ऊंचा किया है। 30 अगस्त, 2003 से वर्तमान तक अंजू बॉबी जॉर्ज ने विश्व चैंपियनशिप के कांस्य पदक विजेता से लेकर खेल प्रशासक के रूप में खुद को कामयाबी के मुकाम पर बनाए रखा हैं। अंजू, देश में महिला खिलाड़ियों में सशक्तिकरण की एक मजबूत आवाज़ भी हैं। यहीं नहीं देश में खेलों की दशा-दिशा सुधारने के लिए वह लंबे समय से प्रयासरत है। अंजू बॉबी जॉर्ज को वर्ल्ड एथलेटिक्स ने देश में प्रतिभाओं को तराशने और खेलों में लैंगिक समानता की दिशा में काम करने के लिए साल 2021 में ‘वुमन ऑफ द ईयर’ पुरस्कार से सम्मानित किया।

शुरुआती जीवन

अंजू बॉबी जॉर्ज का जन्म 19 अप्रैल 1977 को केरल में चंगनाश्शेरी तालुक के चीरांचिरा गांव के कोचूपरम्बिल परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम के.टी.मारकोस था। शुरुआत में एथलेटिक्स उनके पिता ने ही सिखाया था। अंजू बॉबी जॉर्ज को एथलेटिक्स का पहला प्रशिक्षण उनके कोरूथोड स्कूल में मिला। ट्रेनिंग के बाद उनकी रूचि खेलों में और बढ़ गई। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा सीकेएम कोरूथोड स्कूल से पूरी की और विमला कॉलेज, त्रिशूर से स्नातक किया। सन 1991 में स्कूल एथलेटिक्स सम्मेलन में उन्होंने 100 मीटर हर्डल व रिले दौड़ जीती। इसके अलावा लॉन्ग जंप और हाई जंप में दूसरा स्थान हासिल किया। अंजू की प्रतिभा मुख्य रूप से नेशनल स्कूल गेम्स में सबकी नजरों में आई। उस प्रतियोगिता में अंजू ने 100 मीटर हर्डल और 4×100 रिले में तीसरा स्थान प्राप्त किया था।

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अंजू, देश में महिला खिलाड़ियों में सशक्तिकरण की एक मजबूत आवाज़ भी हैं। यहीं नहीं देश में खेलों की दशा-दिशा सुधारने के लिए वह लंबे समय से प्रयासरत है। अंजू बॉबी जॉर्ज को वर्ल्ड एथलेटिक्स ने देश में प्रतिभाओं को तराशने और खेलों में लैंगिक समानता की दिशा में काम करने के लिए साल 2021 में ‘वुमन ऑफ द ईयर’ पुरस्कार से सम्मानित किया।

करियर की शुरुआत

शुरुआत में अंजू बॉबी जॉर्ज ने हेप्टाथलान से अपने करियर का आगाज़ किया लेकिन जल्द ही उन्होंने अपना सारा ध्यान लॉन्ग जंप में लगा दिया। अपनी कड़ी मेहनत और अनुशासन से 1996 में उन्होंने दिल्ली जूनियर एशियन चैंपियनशिप में पदक अपने नाम किया। 1999 में अंजू ने बेंगलुरु फेडरेशन कप में ट्रिपल जंप का नेशनल रिकॉर्ड बनाया। इसी साल अंजू ने साउथ एशिया फेडरेशन गेम्स, नेपाल में सिल्वर मेडल जीता। अब अंजू का नाम खेल प्रेमियों और प्रशासकों की जुबान पर आ चुका था।

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साल 2001 में अंजू ने तिरूअनंतपुरम में आयोजित नेशनल सर्किट मीट में लंबी कूद के अपने रिकॉर्ड को और बेहतर बनाकर 6.74 मीटर कर दिया। इसी साल उन्होंने लुधियाना में नेशनल गेम्स में ट्रिपल जंप और लॉन्ग जम्प में गोल्ड मेडल अपने नाम किया। अंजू अपना शानदार प्रदर्शन हर टूर्नामेंट बनाए रखे हुए थीं। अंजू ने हैदराबाद नेशलन गेम्स में अपनी प्रतियोगिता में शीर्ष पर रही। साल 2002 में मैनचेस्टर में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स में उन्होंने 6.49 की छलांग लगाकर कांस्य पदक भारत को दिलाया। इसी साल दक्षिण कोरिया, बुसान में आयोजित एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीता।

तस्वीर साभारः Sportsmatik

और जब इतिहास रच दिया

अंजू बॉबी जॉर्ज लगातार अपने खेल में सुधार कर अपनी उपलब्धियों को बढ़ाती जा रही थी। साल 2003 में उन्होंने वो कर दिखाया जो अभी तक किसी भारतीय एथलीट ने नहीं हासिल किया था। उन्होंने पेरिस में हुई वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 6.70 मीटर लंबी छलांग लगाकर इतिहास में अपना नाम दर्ज कर दिया। वह वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप में पदक जीतने वाली पहली एथलीट बनीं। इसी साल एफ्रो एशियाई खेलों में गोल्ड मेडल भी जीता।

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ओलंपिक में प्रदर्शन

जीत के इस क्रम में अंजू का ध्यान खेलों की सबसे बड़ी प्रतियोगिता ओलंपिक पर था। अपनी शानदार फॉर्म के चलते 2004 के एथेंस ओलंपिक में उन्होंने व्यक्तिगत रूप से अपना सर्वश्रेष्ट प्रदर्शन किया। उन्होंने एंथेस ओलंपिक में 6.83 मीटर की छलांग लगाई। उस साल वह पांचवें स्थान पर रहीं। यह वर्तमान भारतीय राष्ट्रीय रिकॉर्ड है। साल 2005 में इंचियोन, दक्षिण कोरिया में आयोजित 16वें एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में वीमन लॉन्ग जंप में गोल्ड मेडल जीता। इस प्रतियोगिता में उन्होंने 6.65 मीटर छलांग लगाई।

अन्य उपलब्धियां

अंजू ने 2005 में ही आईएएफ वर्ल्ड एथलेटिक्स फाइनल में 6.75 मीटर की छलांग लगाकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया। इस प्रदर्शन को अंजू अपना सर्वश्रेष्ठ बताती है। 2006 में आयोजित 15वें एशियन गेम्स, दोहा में वीमेन लॉन्ग जंप में सिल्वर मेडल जीता। अंजू की जीत का क्रम लगातार बढ़ता जा रहा था। 2007 में उन्होंने 17वें एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीता। इस प्रतियोगिता में उन्होंने 6.65 मीटर की छलांग लगाकर ओसाका वर्ल्ड चैंपियनशिप के लिए क्वालीफाई किया। इस प्रतियोगिता में ये 7वें स्थान पर रही थी। साल 2008 की शुरुआत में उन्होंने दोहा में आयोजित तीसरी एथियन इंडोर चैंपियनशिप में 6.38 मीटर की छलांग लगाकर सिल्वर मेडल अपने नाम किया। भारत में ही आयोजित तीसरी साउथ एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप, कोच्चि में अपने प्रदर्शन में सुधार करते हुए गोल्ड मेडल जीता। उन्होंने 6.50 की लंबी कूद लगाई थी।

तस्वीर साभारः Indian Express

2003 में उन्हें भारत सरकार की ओर से खिलाड़ियों को दिए जाने वाले प्रतिष्ठित अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया। 2004 में वर्ल्ड एथलेटिक मीट में सफलता के बाद उन्हें खेल के सर्वोच्च पुरस्कार राजीव गांधी खेल रत्न से नवाजा गया। 2004 में उन्हें भारत के चौथे बड़े नागरिक सम्मान पदमश्री से भी सम्मानित किया गया। हर सफल इंसान की कहानी में कुछ हिस्सा असफलता का भी जुड़ा होता है। अंजू की खेलों में सफलता का दौर लंबा रहा लेकिन किसी भी खिलाड़ी जीवन का एक पहलू असफलता भी होती है। दुनियाभर में एथलेटिक्स में कई उपलब्धियां अपने नाम कर चुकी अंजू बॉबी जॉर्ज ओलंपिक पदक हासिल करने में नाकामयाब रही। एंथेस और बीजिंग ओलंपिक में उनके तीनों प्रयास फाउल करार दिए गए।

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2003 में उन्हें भारत सरकार की ओर से खिलाडियों को दिए जाने वाले प्रतिष्ठित अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया। 2004 में वर्ल्ड एथलेटिक मीट में सफलता के बाद उन्हें खेल के सर्वोच्च पुरस्कार राजीव गांधी खेल रत्न से नवाजा गया। 2004 में उन्हें भारत के चौथे बड़े नागरिक सम्मान पदमश्री से भी सम्मानित किया गया।

अंजू की शादी रॉबर्ट बॉबी जॉर्ज से हुई है। राबर्ट ट्रिपल जंप में नेशनल चैंपियन और उनके कोच भी रहे हैं। वर्तमान में अंजू बैंगलुरु में रहती है। वर्तमान में वह एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया में सीनियर वाइस प्रेजीडेंट के पद पर कार्यरत हैं। इस पद को भारतीय इतिहास में किसी महिला ने नहीं संभाला है। उन्होंने 2016 में अंजू बॉबी जॉर्ज स्पोर्टस फाउंडेशन की शुरुआत की थी। यह संस्था युवा लड़कियों को ट्रेनिंग देने का काम करती है।  

अंजू बॉबी जॉर्ज के बारे में एक और चौकाने वाली बात यह है कि उनकी केवल एक किडनी है। विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भारत को पदक दिलाने वाली अंजू को केवल एक किडनी है। इंडियन एक्सप्रेस के लेख के अनुसार 2003 में पेरिस में ऐतिहासिक पदक जीतने के बारे में ट्वीट करके जानकारी दी कि उनके केवल एक किडनी है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार यह स्थिति रेनल एजेनेसिस है जिसका अल्ट्रासांउड से पता चलता है। यह किसी 5000 लोगों में से एक को होती है।  

साल 2021 में वर्ल्ड एथलेटिक्स ने अंजू बॉबी जॉर्ज को देश में प्रतिभाओं को तराशने के लिए ‘वुमेन ऑफ द ईयर’ से सम्मानित किया। यह अवार्ड उन्हें दिया जाता है जिन्होंने अपनी पूरी जिंदगी एथलेटिक्स की दिशा में काम किया हो। अपनी इस उपलब्धि पर उन्होंने द टेलीग्राफ को दिए इंटरव्यू में कहा, “मेरे लिए लैंगिक समानता का मतलब है कि मैं महिलाओं को सशक्त बनाने की कोशिश करूं ताकि वे अपने क्षेत्रों में सफलतापूर्वक काम करें और देश के लिए सम्मान हासिल करने में आगे बढ़ें। एक निश्चत उम्र तक मैंने खुद के लिए काम किया, अपने जुनून का पीछा करते हुए अपना एथलेटिक्स करियर बनाया। लेकिन अब मैं अगली पीड़ी के लिए कुछ करना चाहती हूं।” इस इंटरव्यू में आखिर में उनका कहना है, “अब मेरा सपना है कि मैं अपने बच्चों के माध्यम से ओलंपिक पदक हासिल करूं।”  

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तस्वीर साभारः Olympics

स्रोतः Wikipedia

मैं पूजा राठी पश्चिमी उत्तर-प्रदेश के मुज़फ़्फ़रनगर की रहने वाली हूँ। अपने आसपास के माहौल मे फ़िट नहीं बैठती हूँ।सामाजिक रूढ़िवाद, जाति-धर्मभेद, असमानता और लैंगिक भेद में गहरी रूचि है। नारीवाद व समावेशी विचारों की पक्षधर हूँ। खुद को एक नौसिखिया मानती हूँ, इसलिए सीखने की प्रक्रिया हमेशा जारी रखती हूँ।

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