निख़त ज़रीन के साथ-साथ ये चार मुक्केबाज़ भी रही हैं वर्ल्ड चैंपियन
निख़त ज़रीन के साथ-साथ ये चार मुक्केबाज़ भी रही हैं वर्ल्ड चैंपियन
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ताकत, तेज़ी और तकनीक, बॉक्सिंग के खेल की पहचान है। प्रतिद्वंदी को हराने के लिए ये तीनों चीज़ें एक बॉक्सर के लिए सबसे ज़रूरी हैं। वहीं, जब इन तीनों गुणों की बात आती है तो महिलाओं को यह कहकर रोक दिया जाता है कि यह तुम्हारे बस की बात नहीं है। लेकिन हर दौर में कई भारतीय महिलाओं ने पितृसत्ता के बनाए नियमों को न सिर्फ तोड़ा है बल्कि विश्व में कीर्तिमान भी बनाए हैं। 

हाल में बॉक्सिंग महिला वर्ल्ड चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल हासिल कर निखत ज़रीन भी ऐसी महिला खिलाड़ियों की लिस्ट में शुमार हुई हैं, जिन्होंने दुनिया में अपनी प्रतिभा के दम पर नाम कमाया है। निखत ज़रीन ऐसा करनेवाली भारत की पांचवीं महिला मुक्केबाज हैं। उनसे पहले मैरी कॉम, सरिता देवी, जेनी आर.एल. और लेखा के.सी. की ने यह ख़िताब अपने नाम किया है। आएइ विस्तार से जानते हैं इन पांच वर्ल्ड चैंपिनय महिला बॉक्सरों के बारे में।

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1- मैरी कॉम 

तस्वीर साभारः Olympics.com

चंग्नेइजैंग मैरी कॉम मैंगते को ज्यादातर लोग एमसी मैरी कॉम के नाम से जानते हैं। ओलंपिक मेडल विजेता, वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियन, एशियन चैंपियन, कॉमनवेल्थ गेम्स गोल्ड मेडल विजेता रह चुकीं मैरी कॉम भारत की सबसे सफ़ल महिला बॉक्सरों में से एक हैं। वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियन बनने वाली मैरी कॉम पहली भारतीय महिला खिलाड़ी हैं जिन्होंने चैंपियनशिप का खिताब एक नहीं दो नहीं पूरे छह बार अपने नाम किया हैं। मैरी कॉम अकेली ऐसी खिलाड़ी हैं जिन्होंने वर्ल्ड चैंपियनशिप में आठ पदक अपने नाम किए हुए हैं। एक समय वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप में मैरी कॉम का पूरा दबदबा रहा है। चैंपियन के तौर पर मैरी कॉम के युग की शुरूआत 2001 में हुई थी। टर्की में आयोजित महिला वर्ल्ड चैंपियनशिप 2002 में मैरी कॉम ने 48 किलोग्राम में गोल्ड मैडल जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं। 

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वर्ल्ड अमेच्योर बॉक्सिंग चैंपियन के तौर पर मैरी कॉम ने 2005, 2006,2008, 2010 और 2018 की प्रतियोगिता में अपनी जीत का परचम लहराया। इसी दौरान मैरी कॉम ने दो बच्चों को जन्म देने के बाद दो साल लगभग अपने खेल से ब्रेक भी लिया था। लेकिन असचैंपियन ने अपनी लय बरकरार रखी और वापसी के बाद विश्व खिताब जीतने का सिलसिला जारी रखा। बॉक्सिंग जगत में बड़ा नाम बन चुकी मैरी कॉम तमाम उतार-चढ़ाव के बाद वर्ल्ड चैंपियन से ओलंपिक मेडल विजेता भी बन गईं। साल 2012 लंदन ओलंपिक में उन्होंने ब्रॉन्ज़ मेडल जीता और देश के लिए ओलंपिक में पदक हासिल करने वाली तीसरी महिला बनीं। इसके अलावा एशियाई चैंपियनशिप में पांच गोल्ड मेडल भी वह अपने नाम कर चुकी हैं।

बॉक्सिंग में तमाम अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियां हासिल करने वाली मैरी कॉम 2003 में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित की गई। 2009 में भारत सरकार ने मुक्केबाजी में असाधारण उपलब्धियों के लिए सर्वोच्च खेल सम्मान ‘राजीव गांधी खेल रत्न’ से सम्मानित किया गया । इसके अलावा 2006 में ‘पद्मश्री’, 2013 में ‘पद्म विभूषण’ पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका हैं। साल 2016 में मैरी कॉम को तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की ओर से राज्यसभा के लिए नामित किया गया था।

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2- लेखा के.सी. (2006)

तस्वीर साभारः Twitter

लेखा के.सी. का जन्म 22 अप्रैल 1981 में कुन्नूर, केरल में हुआ था। लेखा ने बॉक्सिंग की ट्रेनिंग की शुरूआत स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया के कोल्लम सेंटर से ली थी। वह छह बार राष्ट्रीय महिला बॉक्सिंग चैपियनशिप विजेता रही हैं। वह दूसरी भारतीय महिला मुक्केबाज हैं जिन्होंने वर्ल्ड चैंपियनशिप का खिलाब अपने नाम किया। 2006 में 75 किलोग्राम वर्ग में लेखा के.सी. ने गोल्ड मेडल जीतकर यह उपलब्धि अपने नाम की थी। इसके अलावा लेखा 2005 में एशियन चैंपियनशिप में गोल्ड, 2008 में सिल्वर पदक अपने नाम कर चुकी हैं। खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन और विश्वभर में नाम कमाने वाली लेखा को 2021 में भारत सरकार की ओर से ध्यानचंद पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

3- लेशराम सरिता देवी (2006)

तस्वीर साभारः NDTV

दिग्गज भारतीय मुक्केबाज लेशराम सरिता देवी का जन्म 1 मार्च 1982 में मणिपुर में हुआ था। सरिता देवी के बॉक्सर बनने की सबसे बड़ी प्रेरणा मुहम्मद अली है। साल 2000 में सरिता देवी ने एशियन बॉक्सिंग चैंपियनशिप, बैंकांग में हिस्सा लिया और अपने वेट क्लास में सिल्वर मेडल जीता। इस शुरूआत के साथ उन्होंने एक के बाद एक टूर्नामेंट में हिस्सा लिया और वहां अपने शानदार प्रदर्शन के बदौलत पदक अपने नाम किए। साल 2006 में नई दिल्ली में आयोजित महिला वर्ल्ड चैंपियनशिप में हिस्सा लेकर सरिता देवी अपने 52 किलोग्राम वर्ग में पूरे टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन किया और चैंपियनशिप का खिताब जीता। सरिता देवी ने इसके अलावा तीसरी विश्व महिला मुक्केबाजी चैंपियनशिप, रूस में कांस्य पदक जीता। साल 2014 में कॉमनवेल्थ गेम्स में अच्छा प्रदर्शन करते हुए वह सिल्वर मेडल जीतने में कामयाब रही। सरिता देवी मणिपुर पुलिस विभाग में डीएसपी रैंक की अधिकारी हैं। 

वर्ल्ड चैंपियनशिप में एक बार गोल्ड मेडल के अलावा सरिता देवी 2005 और 2008 में कांस्य पदक हासिल कर चुकी हैं। यही नहीं एशियन चैंपियनशिप में वह पांच गोल्ड मेडल जीत चुकी हैं। 2014 में एशियन गेम्स के समय हुए विवाद के बाद सरिता देवी पर इंटरनेशनल बॉक्सिंग एसोसिएशन की तरफ से एक साल का बैन भी लगाया गया था। इंचियोन में आयोजित एशियाई खेलों में महिलाओं के 60 किलोग्राम वर्ग में कांस्य पदक जीतने वाली सरिता देवी ने नतीजे का विरोध करते हुए पदक लेने से इंकार कर दिया था। सेमीफाइनल मुकाबले के परिणाम को सही नहीं मानते हुए सरिता देवी इसका विरोध किया था जिस वजह से उन पर आइबा ने कुछ समय तक बॉक्सिंग प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने से प्रतिबंधित कर दिया था। बाद में सरिता देवी ने पदक स्वीकार कर लिया था। 

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4- जेनी आर.एल. (2006)

तस्वीर साभारः The Tribune

63 किलोग्राम वर्ग में गोल्ड मेडल जीतने वाली जेनी आर.एल. भी उन्हीं भारतीय महिला मुक्केबाजों में से एक हैं जिन्होंने वर्ल्ड चैंपियनशिप का खिताब अपने नाम किया हुआ है। जेनी आइजोल मिजोरम की रहनेवाली हैं। इनके पिता का नाम ललथ एंग्लियानी और माता का नाम लल्लियन छुंगा है। जेनी ने बॉक्सिंग करियर की शुरूआत में 2006 में एशियन वुमेंस अमेच्योर बॉक्सिंग चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीतकर नाम कमाया। 2002 में 10वीं सीनियर वीमन नेशनल बॉक्सिंग चैंपियनशिप, जमशेदपुर में हिस्सा लिया। 2006 में वीमन वर्ल्ड अमेच्योर बॉक्सिंग चैंपियनशिप, नई दिल्ली में उन्होंने गोल्ड मेडल अपने नाम किया था। इस उपलब्धि के साथ वह भारत की चैंपियन महिला मुक्केबाजों की लिस्ट में शामिल हुई। इसके बाद 2003 में हिसार में आयोजित एशियन चैंपियनशिप में उन्होंने गोल्ड मेडल जीता।

5- निख़त ज़रीन (2022)

तस्वीर साभारः The Tribune

हाल में विश्व चैंपियन बनी निखत ज़रीन पांचवी महिला मुक्केबाज हैं जिन्होंने यह कीर्तीमान अपने नाम किया है। इतिहास में अपना नाम दर्ज करान वाली निखत ज़रीन के लिए यह सफर आसान नहीं था। निखत ज़रीन का जन्म 14 जून 1996 में निज़ामाबाद, तेलगांना में हुआ था। उनके पिता का नाम मोहम्मद जमील अहमद और माता का नाम परवीन सुल्ताना है। निखत के पिता से उन्हें सबसे पहले खेल की ट्रेनिंग मिली जहां से उनका रूझान खेलों की ओर गया। पिता से एक साल की ट्रेनिंग लेने के बाद उन्होंने स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया, विशाखापतन्नम में द्रोणाचार्य पुरस्कार विजेता राव से आगे की ट्रेनिंग हासिल की। ठीक एक साल बाद 2010 में निखत नेशनल लेवल पर ‘गोल्डन बेस्ट बॉक्सर’ बनीं। इसके बाद निखत ने 2011 में वीमन जूनियर और यूथ वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप का खिताब में गोल्ड मेडल हासिल किया। 2014 में बुल्गारिया में आयोजित यूथ वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीता। 

समय के साथ निखत ज़रीन के खेल में सुधार होता रहा और वह एक के बाद एक टूर्नामेंट में हिस्सा लेकर उसमें बेहतरीन प्रदर्शन करती रही। इसी क्रम में 2019 में थाईलैंड ओपन इंटरनेशनल बॉक्सिंग टूर्नामेंट में सिल्वर मेडल जीता। 2019 में ‘स्ट्रेंडजा मेमोरियल बॉक्सिंग टूर्नामेंट’ में गोल्ड अपने नाम किया। 2022 में दोबारा निखत ने ‘स्ट्रेंडजा बॉक्सिंग टूर्नामेंट’ दोबारा अपने नाम किया। जीत के क्रम को बरकरार रखते हुए 19 मई 2022 को निखत ज़रीन नें 52 किलोग्राम वर्ग में थाईलैंड की जितपोंग जुतामास को हरा कर महिला विश्व मुक्केबाजी चैंपियनशिप का खिताब अपने नाम किया। निखत ज़रीन की जीत पर पूरे देश में जश्न मनाया जा रहा है। 


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मैं पूजा राठी पश्चिमी उत्तर-प्रदेश के मुज़फ़्फ़रनगर की रहने वाली हूँ। अपने आसपास के माहौल मे फ़िट नहीं बैठती हूँ।सामाजिक रूढ़िवाद, जाति-धर्मभेद, असमानता और लैंगिक भेद में गहरी रूचि है। नारीवाद व समावेशी विचारों की पक्षधर हूँ। खुद को एक नौसिखिया मानती हूँ, इसलिए सीखने की प्रक्रिया हमेशा जारी रखती हूँ।

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