भारतीय शादी के बाज़ार में नौकरीपेशा लड़कियों को कम पसंद किया जाता हैंः स्टडी
तस्वीर साभारः The News Minute
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“आपकी वाइफ शादी के बाद जॉब करेगी क्या?” इस सवाल पर अक्सर भारतीय पुरुष साफ शब्दों में ज़ाहिर तो नहीं करते हैं कि उन्हें नौकरी करनेवाली लड़की पसंद नहीं है लेकिन घुमा-फिराकर ज़रूर कह देते हैं कि उनकी होनेवाली पत्नी अगर घर संभाले तो ज्यादा बेहतर होगा। यही सवाल जब हमने मुज़फ़्फ़रनगर के निवासी तुषार दीक्षित से पूछा तो उन्होंने कहा , “लोगों के दिमाग में पहलेवाली चीजें हैं कि नयी दुल्हन है, दूसरे घर से आई, ज्यादा जानती नहीं है, बाहर जाकर काम करने में रिस्क है। इसलिए लोग नौकरी की इजाज़त देने में हिचकते हैं। कुछ लोगों की मानसिकता यह है कि लोग कहते हैं कि बताओ औरत से नौकरी करवा रहे हो, उसके पैसों की क्या ज़रूरत है। कुछ लोग नहीं चाहते हैं कि उनकी पत्नी बाहर जाकर काम करे। जैसे मैं खुद चाहता हूं कि मेरी पत्नी बाहर जाकर काम न करे। मुझे नहीं पसंद है। जिस तरह से लोग देखते हैं, औरतों को नोटिस करते हैं मुझे यह पसंद नहीं है। लोगों के गलत तरीके से देखने की वजह से मैं नहीं चाहता कि मेरी पत्नी बाहर जाकर काम करे।”

“हमारे घर की बहू नौकरी नहीं करती है, घर की औरतों का काम घर संभालना है, बाहर जाकर काम करने पर कैसे-कैसे लोग देखते हैं, औरतों की कमाई से क्या कभी घर चलता है?” ये कुछ बातें हैं जो शादी के बाद लड़कियों के नौकरी न करने देने पर कही जाती हैं। भारत में एक लड़की को कब क्या करना है यह उसके अलावा सब तय करते हैं। शादी के बाद उसके जीवन के फैसले लेनेवालों की लिस्ट और लंबी हो जाती है। इसलिए शादी के ‘बाज़ार’ में कामकाजी लड़कियों को कम वरीयता दी जाती है। उनके नौकरीपेशा होने की वजह से उन्हें पसंद ही नहीं किया जाता है। 

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भले ही भारतीय समाज में लड़कियों की पढ़ाई और करियर के प्रति सोच बदल रही हो जिस वजह से पहले के मुकाबले शिक्षा में उनकी संख्या बढ़ी है। लेकिन जब बात शादी की आती है तो उसमें पढ़ी-लिखी, बड़ी डिग्री वाली लड़कियां तो चाहिए होती हैं लेकिन वे आगे जाकर हाउसवाइफ के तौर पर ही रहें, इसे ही बेहतर माना जाता है। हाल में जारी एक स्टडी में यह बात सामने निकलकर आई है कि भारत के शादी के बाज़ार में घरेलू लड़कियां ज्यादा पसंद की जाती हैं। इस तरह देखने को मिलता है कि अगर लड़की नौकरी और करियर में आगे बढ़ने की आकांक्षाएं रखती हैं तो उस शादी का रिश्ता पाने में भी भेदभाव का सामना करना पड़ता है।

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टाइम्स ऑफ इंडिया में प्रकाशित ख़बर के मुताबिक़ एक अध्ययन के अनुसार कामकाजी महिलाओं को मैट्रिमोनियल साइट्स पर कम पसंद किया जाता है। जो महिलाएं काम करती हैं, उन्हें मैट्रिमोनियल वेबसाइट्स पर मैच मिलने की संभावना कम होती है। यूनिवर्सिटी ऑफ ऑक्सफोर्ड के ब्लावात्निक स्कूल ऑफ गवर्नमेंट से डॉक्टरेट कर रही दिवा धर के शोध के मुताबिक भारतीय लोगों में शादी के लिए कामकाजी, नौकरीपेशा लड़कियों की मांग बहुत कम हैं। उनके मुताबिक जो लड़कियां काम नहीं करती हैं उन्हें नौकरीपेशा लड़कियाें के मुकाबले 15-22 प्रतिशत अधिक पसंद किया गया। सामान्य रूप से हर सौ आदमी ने उस महिला को रिस्पांस दिया जिसने कभी काम नहीं किया है। वहीं, कामकाजी महिलाओं की प्रोफाइल पर केवल 78-85 प्रतिशत ही रिस्पांस दिया गया।

दिवा धर ने भारत की एक प्रमुख मैट्रिमोनियल वेबसाइट पर 20 अलग-अलग लड़कियों की शादी के प्रोफाइल बनाए। उम्र, लाइफस्टाइल, कल्चर, डाइट, खाना और धार्मिक रुझान जैसे सवालों पर सारी प्रोफाइल पर एक जैसे जवाब दिए गए थे। लेकिन इन सभी प्रोफाइल के एक सवाल का जबाव अलग-अलग था। लड़कियाें के नौकरी करने, उनके पैसे कमाने और भविष्य में शादी के बाद भी काम करने को लेकर उन लड़कियों की क्या सोच है जैसे सवालों के जवाब अलग-अलग थे। उन्होंने ये प्रोफाइल अलग-अलग कास्ट ग्रुप में बनाई थी।

हमारे घर की बहू नौकरी नहीं करती है, घर की औरतों का काम घर संभालना हैं, बाहर जाकर काम करने पर कैसे-कैसे लोग देखते हैं, औरतों की कमाई से क्या कभी घर चलता है ये कुछ बातें हैं जो शादी के बाद लड़कियों के नौकरी न करने देने पर कही जाती है।

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धर के मुताबिक़ जिन प्रोफाइल्स में यह लिखा था कि वह नौकरी नहीं करती हैं, उन प्रोफाइल्स पर पुरुषों के सबसे ज्यादा रिस्पांस मिले। जिन प्रोफाइल्स पर यह लिखा था कि अभी वे नौकरी कर रही हैं, लेकिन शादी के बाद उनकी नौकरी करने की कोई इच्छा नहीं है और वे नौकरी छोड़ देंगी, पुरुषों के रिस्पांस के मामले में ऐसी प्रोफाइल्स दूसरे नंबर पर रही हैं। जिन प्रोफाइल पर लड़कियों ने शादी के बाद भी नौकरी करने की बात कही थी, उन्हें सबसे कम पसंद किया गया। दिलचस्प बात यह है कि जो लड़कियां शादी के बाद काम करना जारी रखना चाहती हैं, उनमें ऊंची सैलरी कमाने वाली लड़कियों को मिड रेंज सैलरी वाली से ज्यादा वरीयता दी गई। अध्ययन में आगे पुरुषों का खुद से ज्यादा कमाने वाली लड़कियों की प्रोफाइल्स पर रिस्पांस देने के चांस 10 प्रतिशत कम होते हैं।

इस रिसर्च में धर कहती हैं कि ये सारी बातें लेबर फोर्स में महिलाओं की हिस्सेदारी को प्रभावित करती है। दिवा धर कहती हैं, “भारत में 99 प्रतिशत भारतीय महिलाओं की शादी 40 साल की उम्र तक हो जाती है। अगर आप जानते हैं कि आपको शादी करनी है तो आपका कामकाजी होना आपके लिए सज़ा है। इसका मतलब तो यह है कि महिलाओं को शादी से पहले अपना कोई करियर नहीं बनाना चाहिए या शादी के बाद काम करना बंद कर देना चाहिए।” 

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गाजियाबाद निवासी साहिल शर्मा पत्नी के काम करने के सवाल के जबाव में कहते हैं, “मैं शादी के लिए वर्किंग वीमन प्रेफर करूंगा लेकिन मेरी कंडिशन यह है कि उसका जो काम हो वह मेरे बिजनेस से जुड़ा हो। वह जो काम करे, मेरे साथ मिलकर करे तो बेहतर होगा। मैं चाहता हूं कि वह घर से बाहर जाकर काम न करे। नौकरी करने से बेहतर मेरे साथ ही बिजनेस कर सकती है। मुझे नहीं पसंद है कि मेरी पत्नी किसी और के यहां काम करे।”

वहीं, दिल्ली में काम करनेवाले मोहित का कहना है, “औरतों के बाहर जाकर काम करने में कोई परेशानी नहीं हैं। हमारी सोसायटी के लिए बेहतर है कि वे काम बाहर निकलकर काम करें। मुझे निजी तौर पर वैसे पसंद नहीं है कि मेरी वाइफ बाहर जाकर नौकरी करे। वाइफ के बाहर जाकर काम करने से पूरा घर डिस्टर्ब रहता है। शादी के बाद लड़की का सारा फोकस घर-परिवार पर ही होना चाहिए।”

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“भारत में 99 प्रतिशत भारतीय महिलाओं की शादी 40 साल की उम्र तक हो जाती है। अगर आप जानते हैं कि आपको शादी करनी है तो आपका कामकाजी होना आपके लिए सजा है। इसका मतलब तो यह है कि महिलाओं को शादी से पहले अपना कोई करियर नहीं बनाना चाहिए या शादी के बाद काम करना बंद कर देना चाहिए।” 

भारत में कार्यक्षेत्र में महिलाओं की कम भागीदारी

भारत में शादीशुदा कामकाजी महिलाओं की कार्यक्षेत्र में भागीदारी की बात करें तो उसमें पुरुषों के मुकाबले बहुत बड़ा अंतर है। नैशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के अनुसार देश में केवल 32 प्रतिशत शादीशुदा महिलाएं नौकरी करती हैं। बिजनेस स्टैडर्ड में प्रकाशित ख़बर के अनुसार भारत में पुरुषों में यह आंकड़ा 98 प्रतिशत है। 15 से 49 साल की शादीशुदा महिलाओं में से मात्र 32 प्रतिशत महिलाएं घर से बाहर जाकर नौकरी करती हैं। दूसरी ओर, सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकॉनामिक के डेटा के मुताबिक 21 मिलियन महिलाएं कार्यक्षेत्र से घट गई।

दूसरी और एक चौंकानेवाला तथ्य यह है कि भारत में 15 प्रतिशत कामकाजी महिलाओं को उनके काम का वेतन नहीं मिल पाता है। वहीं, पुरुषों में काम के बदले वेतन न मिलने का प्रतिशत 4 फीसदी है। कामकाजी महिलाओं के लिए असमानता यही खत्म नहीं होती है। ख़बर के अनुसार 85 प्रतिशत कैश के तौर पर सैलरी पानेवाली महिलाएं खुद या पति के साथ मिलकर तय करती हैं कि पैसा कैसे खर्च किया जाएगा। भारतीय महिलाओं में यह बहुत सामान्य है कि महिलाएं अपनी कमाई खर्च करने का फैसला पति के साथ मिलकर लेती हैं। 

भारत में नौकरियों में महिलाओं की लिए पहले ही बहुत असमानता है और शादी के बाद नौकरी छोड़ने में महिलाएं की एक बड़ी संख्या है। वर्ल्ड बैंक के डेटा के मुताबिक भारत में लेबर फोर्स में लगातार गिरावट देखी जा रही है। साल 2005 के बाद से इसमें लगातार गिरावट देखने को मिल रही है। 2005 में भारत में लेबर फोर्स में 26.7 प्रतिशत महिलाएं थीं। साल 2021 में गिरावट के साथ केवल 20.3 प्रतिशत महिलाएं लेबर फोर्स में हैं। इसके अलावा नौकरी के चयन में महिलाओं से शादी से जुड़े सवाल पूछे जाते हैं। एक सर्वे के मुताबिक़ महिलाओं से नौकरी के इंटरव्यू में उनके शादीशुदा होने और शादी प्लान के बारे में पूछा जाता है। बहुत सी कंपनियों इस बात का बचाव करते हुए कहती है कि समाज में शादी के बाद लड़कियों को घर बदलना पड़ता है। कंपनियां इस बदलाव से खुद को सुरक्षित रखना चाहती हैं। 

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तस्वीर साभारः The News Minute

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