समाजख़बर औरतें यौन हिंसा के ख़िलाफ क्यों रहती हैं चुप, साजिद खान की वापसी है इसका जवाब

औरतें यौन हिंसा के ख़िलाफ क्यों रहती हैं चुप, साजिद खान की वापसी है इसका जवाब

भारत में #MeToo अभियान के तहत आरोप लगने में साजिद खान बॉलीवुड के ऐसे शख्स है जिन पर नौ महिलाओं ने यौन शोषण के आरोप लगाए थे। सलोनी चोपड़ा, साजिद खान के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने वाली पहली महिला थीं।

रियलटी शो वास्तव में कितने रियल होते हैं यह तो एक दूसरी बहस है लेकिन पितृसत्ता की पैरवी ये शो कितनी वास्तविकता से करते हैं उसका एक ताजा उदाहरण हमारे बीच है। चर्चित और विवादित टीवी रियलटी शो ‘बिग बॉस’ में फिल्म निर्देशक साजिद खान की एंट्री हुई है। यह वही साजिद खान हैं जिन पर #MeToo अभियान के तहत कई महिलाओं ने यौन शोषण के आरोप लगाए थे। बावजूद इसके साजिद अब रोज रात टीवी पर्दे पर देखे जाएंगे। इंडस्ट्री के ‘सुपर स्टार’ कहे जानेवाले सलमान खान के साथ स्क्रीन शेयर करते दिखेंगे।

साजिद खान का पर्दे पर आना, उसका स्वागत करना भारतीय समाज के ब्राह्मणवादी पितृसत्ता के उस चेहरे को दिखाता है जहां पुरुषों की हर गलती माफ है, यौन हिंसा के आरोपी को आसानी से स्वीकार कर लिया जाता है। इसी तरह टीवी के माध्यम से ऐसे आरोपियों को आसानी से मेनस्ट्रीम में दोबारा स्थापित किया जाता रहा है।

साजिद खान पर #MeToo के तहत लगे थे आरोप

साजिद खान बॉलीवुड के ऐसे शख्स हैं जिन पर नौ महिलाओं ने यौन शोषण के आरोप लगाए थे। सलोनी चोपड़ा, साजिद खान के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने वाली पहली महिला थीं। इंडिया टुडे में छपी ख़बर के अनुसार उन्होंने कहा था कि साल 2011 में साजिद खान के पास नौकरी के इंटरव्यू के लिए गई थीं तो साजिद ने उन्हें बेहद असहज महसूस करवाया था। साजिद ने सलोनी चोपड़ा से असहज करने वाले सवाल किए थे। जैसे, क्या तुम मास्टरबेशन करती हो और हफ्ते में कितनी बार करती हो? नौकरी के बाद उनसे बिकनी की तस्वीरे मांगी थीं। यही नहीं साजिद खान उनके सामने सेक्स की बातें करते थे। सलोनी के अनुसार सेट पर महिलाओं के शरीर को लेकर साजिद भद्दी बातें किया करते थे।   

साजिद पर अन्य महिलाओं ने भी इस तरह के यौन दुर्व्यवहार के आरोप लगाए थे। इसमें राहेल व्हाइट, करिश्मा उपाध्याय, अहाना कुमरा, सिमरन सूरी, मंदाना करीमी, जिया खान, शर्लिन चोपड़ा और डिंपल पॉल के नाम शामिल हैं। इन सारी महिलाओं ने कहा है कि कैसे साजिद ने काम के बदले में उनसे सेक्सुअल फेवर मांगा था, अपने प्राइवेट पार्ट को छूने के लिए मज़बूर किया, महिलाओं से अश्लील बातें की और उन्हें कपड़े उतारने के लिए कहते थे। 

यौन उत्पीड़न के आरोप के बाद कार्रवाई के नाम पर साजिद खान को उस समय उन्हें फिल्म ‘हाउसफुल-4’ के निर्माण से अलग कर दिया गया था। इंडियन फिल्म एंड टेलीविजन डॉयरेक्टर्स एसोसिएशन की तरफ से उन पर केवल एक साल की पाबंदी लगा दी गई थी

इतना ही नहीं बॉलीवुड की कई अन्य अभिनेत्रियों ने भी साजिद खान के बारे में कहा था कि महिलाओं के साथ साजिद खान का व्यवहार अनुचित होता है। अभिनेत्री दिया मिर्जा ने भी साजिद खान को बेहद बदतमीज़ और महिलाओं से गंदा मजाक करने वाला व्यक्ति कहा है। अभिनेत्री बिपाशा बासु कह चुकी हैं कि साजिद खान का व्यवहार फीमेल कास्ट और क्रू के साथ बहुत ही अजीब और परेशान करने वाला होता था। वे महिलाओं के सामने भंदे जोक्स करते है और महिलाओं के प्रति बहुत असभ्य है।यौन उत्पीड़न के आरोप के बाद कार्रवाई के नाम पर साजिद खान उस समय उन्हें फिल्म ‘हाउसफुल-4’ के निर्माण से अलग कर दिया गया था। इंडियन फिल्म एंड टेलीविजन डॉयरेक्टर्स एसोसिएशन की तरफ से उनपर केवल एक साल की पाबंदी लगा दी गई थी।  

सोशल मीडिया पर लोग जता रहे हैं नाराज़गी

टीवी पर साजिद खान की वापसी के बाद सोशल मीडिया पर कलर्स टीवी की बहुत आलोचना हो रही है। कई लोग इसके ख़िलाफ़ ट्वीट लिखकर अपना गुस्सा जाहिर कर रहे हैं। गायिका सोना मोहपात्रा ने साजिद खान के बिग बॉस में आने पर अपनी नाराज़गी जताई है। सोना ने ट्वीट करते हुए लिखा है kf यह साजिद खान हैं, जो एक रियलटी टीवी शो में नज़र आ रहे है। अनु मलिक और कैलाश खेर भी म्यूजिक रियलटी शो को जज कर रहे हैं। इस सभी के ख़िलाफ़ कई महिलाओं ने #Metoo का आरोप लगाया गया था।

जेनिस सिक्केरा ने ट्वीट करते हुए लिखा है कि पार्टियों में महिलाओं के साथ बदसलूकी करते थे, कास्टिंग के लिए अभिनेत्रियों को अपनी न्यूड तस्वीरें भेजने के लिए कहा करते थे। अपनी महिला स्टाफ के सामने पोर्न वीडियो देखा करते थे। ये ही सब चीजें हैं जो आरोपी फिल्ममेकर को रियलटी कन्टेस्टेंट बनाती हैं। 

‘द इंडिपेंडेट’ की साउथ एशिया एडिटर रितुपर्णा चैटर्जी ने ट्वीट करके के लिखा है- जरा भष्ट्रता की गहराई के बारे में सोचिए। कलर्स टीवी को चर्चा के दौरान ही पता चल गया होगा कि साजिद खान के नाम घोषित होने का क्या असर पड़ेगा। उन्हें मालूम होगा कि नौ महिलाओं के आरोपी के लिए लोग मीटू को रिन्यू करेंगे और परिणाम सामने हैं, बिगबॉस ट्रेंड कर रहा है। इसके अलावा सोशल मीडिया पर काफी लोग साजिद खान को शो से बाहर निकालने की मांग कर रहे हैं। यही नहीं उन्हें बाहर निकालने के लिए एक पिटीशन भी डाली गई है जिसे अबतक 6000 से अधिक लोग साइन कर चुके हैं। 

लैंगिक हिंसा के आरोपियों को शोहरत और मौके

साजिद खान की टीवी पर वापसी के बाद एक सवाल फिर से हमारे सामने है आखिर कब तक यौन हिंसा की घटनाओं को यह समाज इतना सामान्य मानता रहेगा। पुरुष की गलती माफ कर आगे बढ़ने वाला यह रवैया यौन हिंसा की घटनाओं को सामान्य बनाने का काम करता है। मीटू अभियान के दौरान अधिकतर जितने भी कलाकार, नेता, फिल्म निर्देशकों पर आरोप लगे है वे बड़ी आसानी से सार्वजनिक जीवन जीते नज़र आते हैं। पहले की तरह काम करते हैं। यहीं नहीं लोगों को एड्रेस करते भी दिखते हैं। आरोपियों का इस तरह से दोबारा काम पर लौटना सर्वाइवर के लिए कितना मुश्किल भरा होता होगा। इस पक्ष को हमेशा नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है।

साजिद खान के अलावा अन्य आरोपों से घिरे पुरुष उसी तरह से पब्लिक स्पेस में दिखे जैसे पहले थे। काम से महज़ कुछ समय की दूरी के बाद आरोपी पुरुषों की वापसी का व्यवहार दिखाता है कि लोग जल्द ही बात भूल जाएंगे। भूलने वाला तर्क यौन हिंसा की घटनाओं के प्रति समाज की असंवेदनशीलता को दिखाता है। यहां बात भूलकर आगे बढ़ने का नियम केवल पुरुषों के लिए है क्योंकि सर्वाइवर की शेमिंग कर उसके लिए तो रास्ते बंद करने का चलन है। दूसरी ओर सर्वाइवर क्या कभी आरोपी व्यक्ति की स्वीकृति वाले समाज में सहजता से रह पाती होगी। समाज का आरोपी लोगों के काम और उनकी वापसी की प्रशंसा करना सर्वाइवर के लिए कितना मुश्किल होता हो इन बातों को सवाल बनने में आखिर अभी कितना समय लगेगा। 

भारत का विक्टिम ब्लेमिंग की संस्कृति की वजह से यौन हिंसा के ख़िलाफ़ बोलने वाले लोगों को अपमानित किया जाता है। उनके काम और पहचान को धूमिल करने की हर तरह की कोशिश की जाती है। इससे अलग आरोपियों के लिए दूसरे रास्ते बनाकर उन्हे सपोर्ट करने का चलन है।

साजिद खान की बिग बॉस जैसे रियलटी शो में वापसी का आज विरोध हो रहा है लेकिन क्या कोई बड़ी संस्था इसके ख़िलाफ़ आवाज़ उठाएंगी। आरोपी की स्वीकृति वाली संस्कृति को पीछे छोड़ने के लिए कदम उठाने की आवश्यकता है। महिलाओं के ख़िलाफ़ किए गए उनके व्यवहार के लिए उनकी कड़ी आलोचना करनी की बहुत ज्यादा आवश्यकता है। ये वे कदम साबित हो सकते हैं जिससे सर्वाइवर के आत्मविश्वास बना रहा सकता है और उसके लिए समान मौके बनाए जा सकते है। 

बिग बॉस में एंट्री के बाद साजिद खान ने कहा है कि घमंड ने उनका करियर बर्बाद कर दिया है। इकनॉमिक्स टाइम्स के अनुसार आरोपों के बाद उनका काम बहुत प्रभावित हुआ है। उन्होंने खुलासा किया कि वह चार साल से घर बैठे है। उन्हें ज्यादा काम नहीं मिला। साजिद का यहां घमंड और अपने करियर के खत्म होने पर दिया बयान फिर से दिखाता है कि वे यौन शोषण के आरोपों को कितना छोटा दिखा रहे हैं। हिंसा की घटनाओं में उनका नाम सामने आने के बाद उसे घमंड से जोड़ना उस पितृसत्ता की सोच को जाहिर करता है जहां पुरुष हर तरह के व्यवहार में खुद को सही मानता है। 

#MeToo अभियान के तहत आवाज उठाने वाली सर्वाइवर आज कहां है

प्रिया रमानी, चिन्यमयी श्रीपदा, तनुश्री दत्ता, विनता नंदा, श्रुति चौधरी निष्ठा जैन, केतकी जोशी, श्वेता पंडित जैसी कई फिल्म, मीडिया और अन्य क्षेत्रों में काम करने वाली महिलाओं ने #MeToo के तहत अपने साथ होने वाली यौन हिंसा के बारे में बताया। इनमें बहुत सी महिलाएं ने हिंसा पर बोलने के बाद उन्हें अपने करियर में कई परेशानियों का सामना करना पड़ा। आरोपियों को कही भी अपनी नौकरी नहीं गंवानी पड़ी। उनकी कुछ समय के लिए सोशल मीडिया और संस्था से दूरी के बाद ठीक पहले की तरह काम करते नज़र आए। इससे अलग महिलाओं को एक आब्जेक्ट बनाकर उनके बारे में चर्चाओं का पूरा बाज़ार खड़ा कर दिया गया। खासतौर पर मीडिया जगत में काम करने वाली महिलाओं को फुल टाइम जॉब्स मिलने में बहुत कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। 

भारत में #MeToo के तहत सबसे पहले मुखर होकर बोलने वाली तनुश्री दत्ता ने हाल में कहा है कि कैसे #MeToo के तहत नाना पाटेकर के ख़िलाफ़ बोलने पर उनके करियर को पूरी तरह खत्म कर दिया गया। हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार यौन शोषण पर बोलने के बाद तनुश्री ने किस तरह की परेशानियों का सामना किया उन्हें दोबारा काम पाने के लिए केवल इंतजार करना पड़ रहा है। तनुश्री कहती है, “मैं 2020 में वापसी करना चाहती थी, ऐसा कितनी बार हुआ मैंने गिनना बंद कर दिया था। लोगों के पास एक मैसेज जाता था उन्हें मेरा साथ काम न करने की सलाह दी जाती थी। लोग मुझे बचते थे क्योंकि वे किसी को ठेस नहीं पहुंचाना चाहते थे। वे ताकतवर लोग हैं और लोग उनके साथ उलझना नहीं चाहते। कोई भी मुझे मौका देने को तैयार नहीं होगा।”   

गायिका चिन्मयी श्रीपदा के #MeToo के तहत यौन शोषण के आरोप लगाए थे जिसके बाद चिन्मयी को टॉलीवुड में बैन कर दिया गया था। इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर में गायिका चिन्मयी का कहना है, ‘मीटू अभियान के तहत आवाज़ उठाने के लिए तमिल सिनेमा में उन्हें सहयोग की कमी का सामना करना पड़ा।’ मीटू अभियान के तहत आवाज़ उठाने की वजह से इंडस्ट्री ने उन्हें बैन कर दिया उनके समकक्ष लोगों ने उनका बहुत मजाक उड़ाया। सीनियर लोगों पर यौन शोषण के आरोप लगाने के बाद डबिंग आर्टिस्ट यूनियन ने भी उनको बैन कर दिया था।  

चिन्मयी ने अपने बैन के ख़िलाफ़ कानूनी लड़ाई भी लड़ी। इंडिया टुडे की ख़बर के मुताबिक मार्च 2019 में मद्रास हाई कोर्ट ने उनके बैन रोक लगाई। इसके अलावा चिन्मयी ने गीतकार वेरामुथु पर भी यौन शोषण करने के आरोप लगाए थे। इंडस्ट्री के बड़े नाम पर आरोप लगाने के बाद चिन्मयी को अपने करियर में बहुत सारी समस्याओं से लड़ना पड़ा। 

पत्रकार प्रिया रमानी को न्याय के लिए किस तरह की लड़ाई लड़नी पड़ी वह हम सबके सामने हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री एम. जे. अकबर के द्वारा दायर मानहानि के मामले में अदालत ने जब उन्हें बरी किया वह बहुत निर्णायक था। अदालत ने फैसला सुनाते हुए कहा था, ‘एक महिला को दशकों बाद भी शिकायत करने का अधिकार है।’ यह केस हमें दिखाता है कैसे यौन शोषण के केस में सर्वाइवर के लिए न्याय के लिए रास्ता कितना कठिन हो जाता है। अगर आरोपी बहुत ताकतवर हो तो उसके ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने के लिए उन्हें कितना दबाव और तनाव का सामना करना पड़ता है।  

अन्नु मलिक, राजकुमार हिरानी, कैलाश खेर, नाना पाटेकर, एम.जे. अकबर, विकास बहल, गौरव सावंत, पीयूष मिश्रा या फिर विनोद दुआ ही क्यों ना हो सबको आसानी से चुप रहकर क्लीन चिट दे दी गई।

भारत का विक्टिम ब्लेमिंग की संस्कृति की वजह से यौन हिंसा के ख़िलाफ़ बोलने वाले लोगों को अपमानित किया जाता है। उनके काम और पहचान को धूमिल करने की हर तरह की कोशिश की जाती है। इससे अलग आरोपियों के लिए दूसरे रास्ते बनाकर उन्हे सपोर्ट करने का चलन है। यौन शोषण के आरोपों के बाद अधिकतर पुरुष आरोपी अपने काम को सहजता से करते दिखें। एम. जे. अकबर को भले ही मंत्री पद से हटा दिया गया हो लेकिन वह राज्य सभा के सासंद बने रहे। यौन शोषण के आरोपों के बाद नाना पाटेकर आज भी फिल्मों में लगातार काम कर रहे है। उनकी कुछ फिल्म रिलीज होने वाली है। ठीक इसी तरह यौन शोषण के आरोपों के बावजूद राजकुमार हिरानी पर कोई कार्रवाई होती नहीं दिखी। बल्कि राजकुमारी हिरानी की नयी फिल्म 2023 में रिलीज होने की घोषणा है जिसमें शाहरुख खान, तापनी पन्नू जैसे कई कलाकार काम कर रहे हैं। 

फिल्म निर्देशक और फैंटम सिनेमा के सह-संस्थापक विकास बहल पर यौन शोषण के आरोपों के बाद उन्हें फिल्म सुपर-30 से निकाल दिया था। फैंटम सिनेमा भंग होने के बाद उन्होंने अपने सहयोगियों के ख़िलाफ़ मुकदमा दायर कर दिया था। मुंबई मिरर की रिपोर्ट के अनुसार रिलायंस एंटरटेनमेंट (जिसकी फैंटम में 50 फीसदी हिस्सेदारी) के द्वारा की गई एक आंतरिक जांच में उसे क्लीन चिट दे दी गई। क्लीन चिट के बाद बहल का नाम फिल्म क्रेडिट में शामिल किया गया। यौन शोषण के आरोपों के बाद विकास बहल की बतौर निर्माता-निर्देशक कई फिल्में रीलिज हो गई हैं। वर्तमान में वह अपनी नयी फिल्म का प्रचार करते इन दिनों टीवी पर खूब दिख रहे हैं जिसमें अमिताभ बच्चन मुख्य भूमिका में है। 

अन्नु मलिक, राजकुमार हिरानी, कैलाश खेर, नाना पाटेकर, एम.जे. अकबर, विकास बहल, गौरव सावंत, पीयूष मिश्रा या फिर विनोद दुआ ही क्यों न हो सबको आसानी से चुप रहकर क्लीन चिट दे दी गई। ब्रेक के बाद आरोप लगने वाले पुरुष अपने काम और जीवन जीते दिखे। वही हिंसा और यौन शोषण का आरोप लगाने वाली महिलाओं के हिस्से शर्मिंदगी, बैन, मजाक, काम न मिलना और करियर में बाधा जैसी चीज़ें आई।

Comments:

  1. SHEENA bhati says:

    बहुत हकीकत लिख डाली हैं, ऐसी ही कलमकारों की जरूरत हैं हमारे समाज को जो असल चेहरों को उजागर करें, इससे असर तो होगा ही, और जागरूकता के लिए ये बेहद जरूरी हैं। हमें आप पर गर्व हैं, सैल्यूट यू पूजा जी 🌻 आपकी कलम बेखौफ चलती रहे 👏👏

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