समाजमीडिया वॉच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से कैसे प्रभावित हो रही है पत्रकारिता

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से कैसे प्रभावित हो रही है पत्रकारिता

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हमारे जीवन के लगभग सभी पहलूओं में समेत पत्रकारिता में भी शामिल हो गई है। डिजिटल मीडिया की वजह से जाने-अनजाने में ही एआई तकनीक पर आधारित कंटेट का इस्तेमाल कर रहे हैं। चाहे वह यू-ट्यूब के एल्गोदिरम की वजह से आपको दिखते वीडियो हो या वेबसाइट पर दिखने वाले विज्ञापन। सभी का एक कारण एआई तकनीक ही है।

“माननीय प्रधानमंत्री जी हम आभारी हैं कि आप हमारे बीच आए मेरी ऑन दी जॉब लर्निंग अब शुरू हो गई है और 2024 तक मैं देश की सबसे अच्छी जर्नलिस्ट होने की कोशिश करूंगी। उम्मीद करती हूं कि तब आपसे एक एक्सक्यूसिव इंटरव्यू करने का मौका मिलेगा बहुत-बहुत धन्यवाद!” ये शब्द है भारत की एआई बॉट एंकर सना के। आर्टिफिशनल इंटेलिजेंस के मीडिया जगत में बढ़ते इस्तेमाल करने की कई संभावनाएं है। इसी में से एक है कि आने वाले समय में देश के प्रधानमंत्री एक एआई एंकर से देश के भविष्य और योजनाओं के बारे में चर्चा करते दिखें। 

दरअसल आर्टिफिशयल इंटेलिजेंस के टेक्स टू स्पीच फीचर की बदौलत अब भारतीय न्यूजरूम में मशीन को इंसानी चेहरे में ढालकर ख़बरें पेश की जा रही है। इस साल अप्रैल के महीने में इंडिया टुडे ग्रुप ने एआई एंकर से समाचार बुलेटिन का प्रसारण शुरू किया था। लॉन्च कार्यक्रम में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में एंकर का परिचय देते हुए कहा गया था कि वह ब्राइट है, सुंदर है, उम्र का उनपर कोई असर नहीं होता है और न ही कोई थकान होती है, वो बहुत सारी भाषाओं में बात कर सकती हैं। 

तस्वीर साभारः Business Today

हाल के कुछ समय से आर्टिफिशल इंटेलिजेंस बहुत चर्चा का विषय बना हुआ है और पत्रकारिता का क्षेत्र भी इससे अछूता नहीं रह रहा है। मौजूदा समय में भारत की मेनस्ट्रीम मीडिया का बड़ा हिस्सा विज्ञापन, सत्ता पक्ष और कॉर्पोरेट पर निर्भर होकर काम कर रहा है। ऐसे में तकनीक के ज़रिये डेटा के आधार पर समाचार बुलेटिन प्रस्तुत करना और अन्य काम भी इंसान की जगह मशीन की बदौलत होने ने मीडिया इंडस्ट्री के सामने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। पत्रकारिता के भविष्य से लेकर पत्रकारिता करने वाले के भविष्य को लेकर भी संकट खड़ा होने की बात कही जा रही है। एआई पत्रकारिता वास्तव में क्या है? क्या यह चिंता का एक विषय है या फिर सूचना जगत में एक ऐसी नई क्रांति है जो पत्रकारिता के सही आयाम स्थापित करने में कामयाब हो पाएगी।

साल 2018 में चीन की न्यूज़ एजेंसी शिन्हुआ पहला एआई न्यूज़ एंकर दुनिया के सामने लाई। इस एजेंसी के किउ हाओ पहले एआई एंकर है जिसने डिजिटल वर्जन पर समाचार प्रस्तुत किया।

एआई और पत्रकारिता

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हमारे जीवन के लगभग सभी पहलूओं समेत पत्रकारिता में भी शामिल हो गई है। डिजिटल मीडिया की वजह से जाने-अनजाने में ही एआई तकनीक पर आधारित कंटेंट का इस्तेमाल कर रहे हैं। चाहे वह यू-ट्यूब के एल्गोदिरम की वजह से आपको दिखते वीडियो हो या वेबसाइट पर दिखने वाले विज्ञापन। सभी का एक कारण एआई तकनीक ही है। सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव की वजह से एआई पत्रकारिता में बड़ी भूमिका निभा रहा है। मीडिया कंपनियां अपने कंटेंट को अधिक बूस्ट करने के लिए एआई की मदद ले रही है। लेख लिखने से लेकर बुलेटिन प्रसारित करने तक में एआई का सहारा लिया जा रहा है। दुनिया भर के बड़े-बड़े मीडिया हाउस एआई द्वारा लिखे लेख को प्रकाशित कर रहे हैं। एक तरफ तो यह काम को आसान और तेजी से कर रहा है दूसरी ओर यह कई सवाल भी खड़े करता है जिसमें विश्वसनीयता और अखंडता सबसे पहले है। साथ ही सजृनशीलता पर आधारित क्षेत्र में एआई से डेटा आधारित बातचीत और जानकारी पत्रकारिता के धरातल पर काम कर पाएगी। पत्रकारिता के सबसे मजबूत और शुरुआती मूल्य ग्राउंड रिपोर्टिंग का भविष्य इससे बच पाएगा। 

तस्वीर साभारः BMN

खतरे में पत्रकारिता की नौकरियां

इंसान की जगह मशीन, तकनीक के इस्तेमाल होने का पहला खतरा इंसानों पर ही पड़ता है। न्यूज़जीपीटी, दुनिया का पहला समाचार चैनल है जिसका पूरा कंटेंट आर्टिफिशल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया जा रहा है। ख़बर के अनुसार चैनल के प्रमुख एलन लैवी ने इसे ख़बरों की दुनिया का गेम चेंजर कहा था क्योंकि ना इसमें कोई रिपोर्टर है ना ही किसी से प्रभावित है। यहां यही बात मीडिया जगत में काम करने वाले लोगों के लिए बड़ा खतरा है। जैसे-जैसे मीडिया के क्षेत्र में एआई का प्रभुत्व बढ़ रहा है वहां मौजूदा पैटर्न के मीडिया में लोगों की नौकरियों पर तकनीक का कब्जा होने की संभावना ज्यादा नज़र आ रही है। लेखन, संपादन, एंकरिंग, प्रस्तुतीकरण तक के सारे कामों में एआई का सहारा लिया जा रहा है। 

बीबीसी में छपी ख़बर के अनुसार साल 2020 में माइक्रोसॉफ्ट ने बड़ी संख्या मे एमएसएन वेबसाइट के लिए लेखों के चयन, क्यूरेटिंग, हेडलाइन तय करने और एडिटिंग करने वाले पत्रकारों की जगह स्वचलित सिस्टम को अपनाने की योजना बनाई। ख़बर के अनुसार कंपनी ने एआई तकनीक के सहारे ख़बरों के प्रोडक्शन के कामों को पूरा करना तय किया। माइक्रोसॉफ्ट जैसी अन्य टेक कंपनियां मीडिया संस्थानों को अपना कंटेंट इस्तेमाल करने के लिए भुगतान करती है। यह सब काम के लिए पेशेवर पत्रकारों की मदद ली जाती आई है जो कहानियां तय करने, उनका प्रकाशन कैसे होना है, हेंडलाइन तय करने जैसे काम करते है। लेकिन माइक्रोसॉफ्ट के एआई तकनीक के इस्तेमाल के बाद से लगभग 50 न्यूज प्रोड्यूसर को अपनी नौकरी गंवानी पड़ी। 

ठीक इसी तरह साल 2022 के अंत में एक न्यूज वेबसाइट में छपी जानकारी के अनुसार अमेरिकी टेकनोलॉजी न्यूज़ वेबसाइट सीएनईटी ने एआई तकनीक का इस्तेमाल करते हुए चीजें अलग ही स्तर पर ले गई। कंपनी ने एआई प्रोग्राम के तहत लिखे गए दर्जनों फीचर लेख चुपचाप तरीके से प्रकाशित किए। इस साल जनवरी तक कंपनी ने इन सब अटकलों की पुष्टि नहीं की थी, जिसने केवल एक प्रयोग बताया जा रहा था। इतना ही नहीं एसोसिएटेड प्रेस ने भी अपनी कहानियों के लिए एआई का इस्तेमाल किया। ये सब बातें बताती हैं कि कैसे समाचारों को चुनने उनको व्यवस्थित करने के लिए काम करने वाले मीडिया के पेशेवरों की नौकरियां एआई ले रहा है। 

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अपने शुरुआती दौर में है लेकिन अभी से न्यूजरूम के भीतर उसकी मौजूदगी, मीडिया पेशवरों की नौकरियों पर संकट बनना शुरू हो चुका है। डायच वेले में छपी ख़बर के अनुसार हाल ही में यूरोप के सबसे बड़े पब्लिकेशन हाउस एक्सल स्प्रिंगर एसई ने कई संपादकीय नौकरियों को एआई को बदल दिया है। स्पिंगर में नौकरियों की कटौती से मीडिया उद्योग के रोबोट पर निर्भरता की आशंकाओं में तेजी ला दी है। 

न्यूज़रूम में एआई एंकर

भारत समेत दुनिया के न्यूज़ एंकर के तौर पर कम्प्यूटर जनित मॉडल यानी एआई एंकर समाचार पढ़ते नज़र आ रहे हैं। बहुत हद तक इंसानी तौर पर दिखने वाले ये न्यूज़ एंकर कॉर्पोरेट मीडिया हाउस के मुनाफे वाले दृष्टिकोण से हितैषी है क्योंकि इन्हें न कोई सैलरी की आवश्यकता है, ना छुट्टी की। ये 24/7 दिन डेटा के आधार पर काम कर सकते हैं। भारत की पहली एआई न्यूज़ एंकर सना के लॉन्च के समय इसी तरह के शब्द कहे गए थे कि वह बिना थके लंबे समय तक काम कर सकती है। 

सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव की वजह से एआई पत्रकारिता में बड़ी भूमिका निभा रहा है। मीडिया कंपनियां अपने कंटेंट को अधिक बूस्ट करने के लिए एआई की मदद ले रही है। लेख लिखने से लेकर बुलेटिन प्रसारित करने तक में एआई का सहारा लिया जा रहा है।

द गार्डियन के अनुसार साल 2018 में चीन की न्यूज़ एजेंसी शिन्हुआ पहला एआई न्यूज़ एंकर दुनिया के सामने लाई। इस एजेंसी के किउ हाओ पहले एआई एंकर है जिसने डिजिटल वर्जन पर समाचार प्रस्तुत किया। शिन्हुआ और चीनी सर्च इंजन सोगो द्वारा यह एआई एंकर विकसित किया गया है। प्रकाशकों ने चीन के वार्षिक वर्ल्ड इंटरनेट कॉन्फ्रेंस के क्रार्यक्रम के दौरान इसकी घोषणा की थी। इसी से जुड़ी दूसरी ख़बर न्यूज़ डॉट.कॉम एयू के अनुसार हाल ही में चीन ने एआई महिला न्यूज़ एंकर रेन जियाओरॉन्ग को लॉन्च किया। चीन सरकार केंद्रित पीपल्स डेली अख़बार ने दावा किया है कि इस एआई न्यूज़ एंकर ने हजारों न्यूज़ एंकर से स्किल सीखे हैं और वह 365 दिन 24 घंटे लगातार ख़बरें बता सकती है। 

चीन के अलावा कुवैत भी अपना एआई न्यूज़ एंकर लॉन्च कर चुका है। बीते हफ्ते न्यूज़ 18 के पंजाब और हरियाणा के क्षेत्रीय चैनल की तरफ से भी एआई एंकर के बारे में बात की गई। इस एंकर का नाम एआई कौर है। हाल ही में रूस ने भी स्वोए टीवी ने स्नेज़ना तुमानोवा को पहले वर्चुअल मौसम की न्यूज़ प्रस्तुत करने वाले के रूप में पेश किया। इस तरह से दुनिया के अलग-अलग मीडिया संस्थानों की ओर से एआई तकनीक के न्यूज़ एंकर को लॉन्च किया जा रहा है। एक के बाद एक एआई न्यूज़ एंकर के लॉन्च को मीडिया की नई क्रांति और बदलाव बताया जा रहा है। अब यह देखना होगा कि सूचना के क्षेत्र में एआई समावेशिता, विश्वसनीयता स्थापित कर पाती है या नहीं। क्योंकि अगर अबतक लॉन्च एआई एंकर के रूप-आकार को लेकर बात करे तो उससे पूरी तरह समावेशिता गायब है। लॉन्च एंकर का आकार यूरो सैंट्रिक ब्यूटी स्टैडर्ड को ध्यान में रखकर गढ़ा गया है जैसे गोरा रंग, एक ख़ास तय किस्म की बॉडी आदि। सूचना के क्षेत्र में प्रस्तुतिकरण में इस तरह से पूर्वाग्रहों को और स्थापित करने का काम किया जा रहा है। 

एआई ख़बरों की दुनिया की विश्वसनीयता के लिए कितना सही 

आर्टिफिशल इंटेलिजेंस अभी अपने शुरुआती चरण में है लेकिन यह देखना वास्तव में बहुत दिलचस्प होगा कि यह पत्रकारिता को किस तरह से बदलेगा। क्योंकि आज क्लिकबेट पत्रकारिता, फेक न्यूज़ और प्राइम टाइम में चिल्लाने वाली पत्रकारिता का दौर है। ऐसे में रोबोट इंसानी रवैये के इतर विवेक के साथ पत्रकारिता करेंगे? डीडब्ल्यू में मीडिया स्तंभकार पामेल फिलिपोज ने कहा है कि एआई और उसके इस्तेमाल से पैदा खतरे वास्तविक है। एआई अधिक बहुस्तरीय समस्या को पैदा कर सकता है जैसे एआई दुष्प्रचार अधिक फैला सकता है। 

फिलिपोज ने आगे कहा है कि फेक न्यूज़ अब व्हाट्सएप टेक्स्ट और तस्वीरों के माध्यम से प्रसारित की जाती है जिसमें तय समुदाय को कलंकित करना बहुत आसान काम है और एआई की पूरी क्षमता रॉ डेटा को पुर्नजीवित करना है। इस तरह बहुत से पत्रकार और मीडिया पेशवर का मानना है कि एल्गोदिरम और ऑटोमेशन पर बढ़ती निर्भरता से पत्रकारिता की विश्वसनीयता कम होने का खतरा है।

तस्वीर साभारः Analytics Insights

एक लेख में छपी जानकारी के अनुसार अमेरिका स्थित एक अध्ययन फर्म ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि चीन एआई द्वारा बनी डीप फेक वीडियो का इस्तेमाल प्रोपगैंडा फैलाने के लिए इस्तेमाल कर रहा है। उन्होंने वुल्फ न्यूज़ नाम से एक काल्पनिक समाचार आउटलेट के इस्तेमाल करने को कहा है जिसको बनाने का श्रेय चीन के राज्य अधिकारियों को जाता है। ग्राफिक इंटेलिजेंस के उपाध्यक्ष जैक स्टब्स ने एएफपी को बताया है कि यह पहली बार देखा गया है कि हमने किसी राज्य से जुड़े कार्यक्रम के तहत एआई से बनी वीडियो का इस्तेमाल कर राजनीतिक कंटेंट बनाया जा रहा है। इसी तरह न्यूज़रूम की नैतिकता के बारे में भी इस तरह की बातें और चिंताएं उठाई गई है। साथ ही डेटा के माध्यम से जानकारी बनाने और उसके गलत पाए जाने से पत्रकारिता की विश्वसनीयता को खतरा हो सकता है।

एआई न्यूज़ एंकर या पत्रिकारिता में एआई की निर्भरता यह सूचना के क्षेत्र के भविष्य के लिए दोधारी तलवार है। एक तरफ इससे मीडिया के नयेपन और संचार के क्षेत्र की अपार संभावनों पर ध्यान दिया जा रहा है। वहीं इसे नैतिक और जिम्मेदारी तय करने के लिए रेग्यूलेशन और निरीक्षण की आवश्यकता भी है। ऐसे दौर में जहां मीडिया कॉर्पोरेट और सत्ता के प्रभाव की वजह से पहले से ही ग्राउंड रिपोर्ट, खोजी पत्रकारिता और जनपक्ष की कमी है उस समय में एआई तकनीक का बढ़ता प्रभाव सूचनाओं से मानवीय पक्ष को खत्म करने वाला ज्यादा नज़र आ रहा है।


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