इंटरसेक्शनलजेंडर क्यों मायने रखता है महिला नेतृत्व

क्यों मायने रखता है महिला नेतृत्व

आज जब हम औरतों के लिए समानता की बात करते हैं तो महिला नेतृत्व के बिना यह बात अधूरी है। इसलिए ज़रूरी है कि हर स्तर पर महिला नेतृत्व को बढ़ावा दिया जाए।

किसी समाज या देश का नेतृत्व उसकी दिशा को तय करता है। नेतृत्व कैसा होगा उसकी व्यवस्था कैसी होगी ये सबकुछ नेतृत्व की विचारधारा में निर्भर करता है। मतलब कि जैसी विचारधारा होगी नेतृत्व वैसा ही होगा। नेतृत्व करने वाले का विचार ही उसके काम करने के तरीक़े को दर्शाता है। ठीक इसी तरह जब हम महिला नेतृत्व की बात करते हैं तो उस नेतृत्व के अंतर्गत काम करने की दिशा, उसका उद्देश्य और प्रभाव सब कुछ महिलाओं को केंद्रित करके होता है।

अक्सर गाँव में समाजसेवी संस्था में काम करते हुए कई बार लोग पूछते हैं कि आपकी संस्था का नेतृत्व कौन करता है और जब मैं कहती हूं कि वह एक महिला है तो इसका प्रभाव अक्सर लोगों में देखने को मिलता है। वे कहते हैं, “यह बहुत अच्छी बात है कि आपके नेतृत्व में महिला है इसलिए महिलाओं के साथ आपका काम ज़्यादा प्रभावी है।” ये बातें अक्सर गाँव की महिलाओं के लिए भी प्रेरणादायी होती हैं।

हमारी संस्था में महिला नेतृत्व है। सभी कार्य-योजना महिला कार्यकर्ता मिलकर बनाती हैं और उसे समुदाय तक ले जाने का काम भी महिलाएं ही करती हैं। गाँव की समस्याओं के बारे में सोचने से लेकर उसके समाधानों को ज़मीन तक पहुंचाने में जब महिला नेतृत्व मिलता है तो ये सब और भी ज़्यादा प्रभावी हो जाता है। आइए आज हम लोग इस लेख के ज़रिये चर्चा करते है कि महिला नेतृत्व क्यों मायने रखता है।

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आज जब हम औरतों के लिए समानता की बात करते हैं तो महिला नेतृत्व के बिना यह बात अधूरी है। इसलिए ज़रूरी है कि हर स्तर पर महिला नेतृत्व को बढ़ावा दिया जाए।

हाशिए पर गए समुदायों के साथ काम करने के लिए

जब भी हाशिए पर गए समुदाय का मतलब है कि समाज का वह बड़ा हिस्सा जो जाति, वर्ग, धर्म, जेंडर, यौनिकता, विकलांगता, स्थान आदि आधारों कहीं न कहीं किसी वजह से मुख्यधारा से कटा हुआ है। महिलाएं अपने भारतीय पितृसत्तात्मक समाज में जाति, वर्ग, जेंडर आदि के आधार पर हाशिएबद्ध समुदाय में आती हैं। ख़ासकर तब जब उनकी शिक्षा, रोज़गार और अवसर के संसाधनों तक पहुंच सीमित हो। ऐसे में जब महिलाओं को मुख्यधारा से जोड़ने की बात आती है तो इसे प्रभावी ढंग से महिला नेतृत्व ही कर पाता है क्योंकि एक महिला की ज़रूरत, उनकी भावनाएं महिला बेहतर तरीक़े से समझ पाती हैं। इतना ही नहीं, जाति, धर्म और वर्ग के आधार पर हाशिए में रहने वाले समुदायों को आगे लाने के लिए उसी समुदाय की महिलाएं अगर नेतृत्व करें तो परिणाम बेहतर होते हैं, उनकी रणनीति और काम का तरीक़ा अन्य नेतृत्व से अलग होता है। इसलिए हाशिएबद्ध समुदायों के लिए महिला नेतृत्व मायने रखता है।

लैंगिक समानता की प्रभावी बात के लिए

महिला नेतृत्व जितने मज़बूत और प्रभावी तरीके के साथ लैंगिक समानता की पैरोकारी करता है उतना अन्य नेतृत्व में देखने को नहीं मिलता। जैसे मेरी संस्था ने पीरियड्स लीव की शुरुआत की। हर महीने पीरियड्स के दौरान दो दिन के अवकाश ने हम महिला कार्यकर्ताओं को काफ़ी ज़्यादा राहत दी, इससे हमें काम करने का प्रोत्साहन और सहूलियत भी मिलती है। यह पहल छोटी भले ही लगे लेकिन इसका प्रभाव महिलाओं ने ज़्यादा देखने को मिलता और ये सिर्फ़ महिला नेतृत्व में ही संभव है। हमारी संस्था में महिलाओं को विकास के अवसर के लिए लगातार प्रोत्साहित किया जाता है, क्योंकि आमतौर पर ग्रामीण परिवेश की महिलाओं को विकास के उतने अवसर नहीं मिल पाते हैं और अक्सर ये महिलाएं पिछड़ जाती हैं लेकिन यह महिला नेतृत्व ही है जो महिलाओं के समान विकास को अहमियत देता है।

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महिलाओं का प्रोत्साहन

महिला नेतृत्व आधी आबादी यानी कि महिलाओं को न केवल प्रोत्साहन में सहयोग करता है बल्कि उनके विकास में ही अहम भूमिका अदा करता है। अगर मैं खुद अपने ग्रामीण परिवेश का अनुभव साझा करूं तो हम ग्रामीण महिलाओं को हमेशा महिला नेतृत्व आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करता है और ये हमें सपने देखने की दिशा भी देता है कि हम महिलाएं भी कुछ कर सकती हैं।

सतत विकास में सहायक

महिला नेतृत्व हमेशा देश, समाज या फिर परिवार के स्तर पर कोई भी विकास सतत रूप से दिखाई पड़ता है। कोरोनाकाल में भी हमने दुनियाभर के उन तमाम देशों को देखा जिसका नेतृत्व महिला के हाथों में रहा। उन्होंने इस आपदा से अपने देश को बेहद अच्छे से बचाया और पूरी दुनिया के सामने के एक सशक्त नेतृत्व की मिसाल क़ायम की। केरल राज्य की पूर्व स्वास्थ्य मंत्री केके शैलजा जैसी तमाम महिला नेत्रियों ने कोरोनाकाल में नेतृत्व की मज़बूत मिसाल पेश की।

यूं तो अपने पितृसत्तात्मक समाज में महिला नेतृत्व की स्वीकृति हमेशा से चुनौतीपूर्ण रही है। पितृसत्ता हमेशा महिलाओं को पुरुषों से कमतर आंकती है और हर कदम पर उन पर अपनी हुकूमत बनाए रखने की कोशिश करती है। लेकिन तमाम बंदिशों और नज़रंदाज़ के बाद भी महिला नेतृत्व ने समय-समय पर परिवार से लेकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सतत विकास और सफलता की मिसाल क़ायम की है। आज जब हम औरतों के लिए समानता की बात करते हैं तो महिला नेतृत्व के बिना यह बात अधूरी है। इसलिए ज़रूरी है कि हर स्तर पर महिला नेतृत्व को बढ़ावा दिया जाए।

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तस्वीर साभार: Theigc.org

About the author(s)

रेनू वाराणसी ज़िले के रूपापुर गाँव की रहने वाली है। ग्रामीण महिलाओं और किशोरियों के साथ समुदाय स्तर पर रेनू बतौर सामाजिक कार्यकर्ता काम भी करती हैं और अपने अनुभवों व गाँव में हाशिएबद्ध समुदाय से जुड़ी समस्याओं को लेखन के ज़रिए उजागर करना इन्हें बेहद पसंद है।

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