दुनिया में आधे से अधिक प्रेग्नेंसी अनचाही होती है: UNFPA रिपोर्ट
तस्वीर साभारः Stiftung India
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दुनिया में सालभर में जितने गर्भ ठहरते हैं उनमें से लगभग आधे अनचाहे गर्भ होते हैं। हर साल 121 मिलियन अनचाहे गर्भ होते हैं। यह आंकड़ा सीधे-सीधे महिलाओं और लड़कियों के यौन और प्रजनन स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। ये आंकड़े संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (यूएनएफपीए) की हाल ही में जारी रिपोर्ट में सामने आए हैं। दुनिया में बड़ी संख्या में महिलाओं और लड़कियों की गर्भधारण के समय अपनी कोई मर्ज़ी नहीं होती। रिपोर्ट मे अनचाहे गर्भ के संकट पर चेतावनी दी गई है कि इस मानवाधिकार संकट का समाज, महिलाओं, लड़कियों और वैश्विक स्वास्थ्य पर गंभीर असर होता है।

संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (यूएनएफपीए) 2022 की ‘सीइंग द अनसीन’ के टाइटल के नाम से जारी रिपोर्ट के अनुसार दुनिया में हर साल 12.1 करोड़ अनचाही प्रेग्नेंसी होती है जिनमें से 60 प्रतिशत से ज्यादा मामलों में अबार्शन करवा दिया जाता है। इसमें भी आधे के करीब अबार्शन असुरक्षित तरीके से होते हैं। 45 प्रतिशत अबॉर्शन पूरी तरह से असुरक्षित होते हैं। मातृत्व मृत्यु में 5 से 13 प्रतिशत ऐसे मामले ही शामिल होते हैं। यही नहीं, यह स्थिति सतत विकास लक्ष्य हासिल करने में बाधा डाल रही है।

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रिपोर्ट के महत्वपूर्ण तथ्य

  • हर साल होनेवाली सारी प्रेग्नेंसियों में से आधी अनचाही होती हैं।
  • हर साल 2015 से 2019 तक वैश्विक स्तर पर 121 मिलियन अनचाही प्रेग्नेसियां हुई। 
  • दुनियाभर में अनुमानित 257 मिलियन महिलाएं जो अबार्शन करवाना चाहती थीं उसके लिए वे सुरक्षित और आधुनिक गर्भनिरोधक तरीकों का इस्तेमाल नहीं कर सकीं।
  • 47 देशों में लगभग 40 प्रतिशत सेक्शुअली एक्टिव महिलाएं गर्भावस्था को रोकने के लिए गर्भनिरोधक का इस्तेमाल नहीं करती हैं। 
  • इंटिमेट पार्टनर वायलेंस का अनुभव करनेवाली महिलाओं में गर्भनिरोधक का इस्तेमाल 53 प्रतिशत कम है। 
  • हर साल असुरक्षित अबार्शन के कारण 70 लाख महिलाओं को अस्पताल में भर्ती करवाना पड़ता है।  

युद्ध के समय और बेकार होती स्थिति

युद्ध के दौरान महिलाओं के लिए यौन और प्रजनन हिंसा की स्थिति सामान्य दिनों से और ज्यादा खराब हो जाती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यूक्रेन युद्ध और दूसरे संघर्षों के कारण अनचाहे गर्भ के मामले और अधिक बढ़ने का अंदेशा है। ऐसे हालात में यौन हिंसा की घटनाएं बढ़ जाती हैं। साथ ही गर्भनिरोधक उपायों की लोगों तक पहुंच भी बाधित हो जाती है। संकट और संघर्ष की स्थिति में महिलाओं से सबसे पहले उनके हक, अधिकार छीन लिए जाते हैं। उनके साथ यौन हिंसा की घटनाएं अधिक होती हैं।

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यही वजह है कि अनचाहे गर्भ का जोखिम ऐसे समय में सबसे ज्यादा बढ़ जाता है। रिपोर्ट में अन्य अध्ययनों का हवाला देते हुए कहा गया है कि 20 प्रतिशत से ज्यादा विस्थापित महिलाओं को यौन हिंसा का सामना करना पड़ता है। साथ यह भी कहा गया है कि यह संख्या असल आकंड़ों से बेहद से कम है। अफगानिस्तान में युद्ध और स्वास्थ्य सेवाओं में रुकावट के कारण साल 2025 तक 48 लाख अनचाहा गर्भ होने का अनुमान है।

युद्ध और संघर्ष की स्थिति में अबार्शन उपायों की उपयोगिता पर UNFPA निदेशक डॉ. नतालिया कनेम का कहना है, “अगर आपके पास घर छोड़ने के लिए पंद्रह मिनट हैं तो आप क्या लेंगे? क्या आप अपना पासपोर्ट लेंगे, क्या आप भोजन लेंगे? लेकिन क्या आपको गर्भनिरोधक लेना याद रहेगा? संघर्ष शुरू होने के दिनों, सप्ताह और महीनों में, यौन और प्रजनन स्वास्थ्य और गर्भनिरोधक सेवा ही महिलाओं और लड़कियों को हानिकारक अनचाही गर्भावस्था से बचा सकती है। यह भोजन, पानी और आश्रय की तरह ही ज़रूरी है।” 

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संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (यूएनएफपीए) 2022 की ‘सीइंग द अनसीन के टाइटल’ के नाम से जारी रिपोर्ट के अनुसार दुनिया में हर साल 12.1 करोड़ अनचाही प्रेग्नेंसी होती है जिनमें से 60 प्रतिशत से ज्यादा मामलों में अबार्शन करवा दिया जाता है। इसमें भी आधे के करीब अबार्शन असुरक्षित तरीके से होते हैं। 45 प्रतिशत अबॉर्शन पूरी तरह से असुरक्षित होते हैं।

अबार्शन के असुरक्षित तरीके

विश्वभर में 257 मिलयन महिलाएं, अबार्शन के लिए सुरक्षित और आधुनिक तरीके नहीं अपना पाती हैं। आंकड़ों के अनुसार एक चौथाई महिलाएं यौन संबंधों के लिए ना नहीं बोल पाती हैं। अनचाही प्रेग्नेंसी के लिए कई कारण भी जिम्मेदार होते हैं जिनमें यौन और प्रजनन स्वास्थ्य देखभाल के बारे में जानकारी का अभाव सबसे प्रमुख है। महिलाओं के शरीर में गर्भनिरोधक उपाय सही सूट न होना भी एक वजह है। 

इसके अलावा महिलाओं का खुद के शरीर को नियंत्रण में रखने के लिए हानिकारक रीतियों का इस्तेमाल करना, गरीबी और लैंगिक असमानता, हिंसा, महिलाओं के लिए स्वास्थ्य सेवाओं लेने के लिए समाज का व्यवहार और प्रजनन दबाव। ये सभी कारण महिलाओं और लड़कियों पर माँ बनने का दबाव डालते हैं। अनचाहा गर्भधारण केवल एक व्यक्तिगत असफलता नहीं है। स्वायत्ता की कमी होना भी इसका एक कारण है क्योंकि समाज महिलाओं के जीवन के मुकाबले मान्यताओं को महत्व दिया जाता है। 

यूएनएफपीए की कार्यकारी निदेशक डॉ नतालिया कनेम कहती हैं,  “प्रभावित महिलाओं के पास गर्भधारण करने का हां या ना का विकल्प मौजूद ही नहीं होता है। महिलाओं और लड़कियों के हाथ में मौलिक अधिकार की शक्ति देकर, समाज में सुनिश्चित किया जा सकता है कि मातृत्व एक आकांक्षा है न कि अनिवार्यता।” 

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इस रिपोर्ट को एक ‘वेकअप कॉल’ कहा गया है। अनचाहे गर्भधारण की चौंका देनेवाली बड़ी संख्या महिलाओं और लड़कियों के बुनियादी मानवाधिकारों को बनाए रखने में दुनिया की नाकामयाबी को दिखाती है। यूएनएफपीए की कार्यकारी निदेशक डॉ नतालिया कनेम कहती हैं,  “प्रभावित महिलाओं के पास गर्भधारण करने का हां या ना का विकल्प मौजूद ही नहीं होता है। महिलाओं और लड़कियों के हाथ में मौलिक अधिकार की शक्ति देकर, समाज में सुनिश्चित किया जा सकता है कि मातृत्व एक आकांक्षा है न कि अनिवार्यता।”

सुझाव के तौर पर इस रिपोर्ट में, फै़सला लेनावालों, नीति निर्माताओं, स्वास्थ्य सेवाओं के अधिकारियों और प्रभारियों को गर्भनिरोधक तरीकों और उपायों को आसानी से उपलब्ध करवाकर अनचाहे गर्भधारण को रोकने में मदद करने के लिए कहा है। अगर वे ऐसा करेंगे तो महिलाओं और लड़कियां समाज में पूरे अधिकारों के साथ योदगान दे पाएंगी। सूचना और ताकत के कारण ही वे माँ बनने के लिए हां या ना कर पाएंगी।

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मैं पूजा राठी पश्चिमी उत्तर-प्रदेश के मुज़फ़्फ़रनगर की रहने वाली हूँ। अपने आसपास के माहौल मे फ़िट नहीं बैठती हूँ।सामाजिक रूढ़िवाद, जाति-धर्मभेद, असमानता और लैंगिक भेद में गहरी रूचि है। नारीवाद व समावेशी विचारों की पक्षधर हूँ। खुद को एक नौसिखिया मानती हूँ, इसलिए सीखने की प्रक्रिया हमेशा जारी रखती हूँ।

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