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महिला-पुरुष के अंतरंग संबध वाले रिश्ते जैसे शादी, डेटिंग या लिव-इन रिलेशनशिप में एक साथी का दूसरे साथी को शारीरिक, मानसिक या यौन आघात पहुंचाना अंतरंग साथी हिंसा (इंटिमेट पार्टनर वायलेंस) कहलाता है। एक साथी द्वारा दूसरे की शारीरिक स्वतंत्रता को खत्म करना, उसके साथ जबरदस्ती करना और उस पर स्वामित्व स्थापित करना इंटिमेट पार्टनर वायलेंस है। यह ज़रूरी नहीं है कि यह हिंसा केवल हेट्रोसेक्सुअल कपल्स में ही हो। यह हिंसा समलैंगिक जोड़ों में भी होती है। हिंसा का यह प्रारूप घरेलू हिंसा से थोड़ा अलग है। 

घरेलू हिंसा में सर्वाइवर को परिवार के अलग-अलग सदस्य के द्वारा शारीरिक और मानसिक चोट दी जाती है। वहीं, अंतरंग साथी हिंसा में पति और पार्टनर जिसके साथ कोई स्वयं की इच्छा से रिश्ते में रहना चुनता है, हिंसा उसके द्वारा की जाती है। साथ रहने या अलग होने के दौरान अपने साथी पर दबाव डालना और उसकी यौन स्वतंत्रता को नष्ट करना अंतरगं साथी हिंसा कहलाता है। इंटिमेट पार्टनर वायलेंस महिलाओं के खिलाफ होने वाली हिंसा का सबसे आम रूप है। हिंसा के इस रूप में शोषण करने वाला उसका स्वंय का पति या पार्टनर होने के कारण महिलाएं इसके ख़िलाफ़ पूरी उम्र बोल भी नहीं पाती हैं। सामाजिक रूढ़ता और आर्थिक असमर्थता इसका एक प्रमुख कारण है कि वह रिश्तों के नामपर पति और पार्टनर से हिंसा का सामना करती रहती हैं। भारतीय पितृसत्तात्मक सामाजिक संरचना बहुत ही विचित्र है। यहां स्त्री को नियंत्रण में रखना और पुरुष का अनियंत्रित होना उसका हक माना जाता है।

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इंटिमेट पार्टनर हिंसा के प्रकार

शारीरिक हिंसा : एक साथी का दूसरे साथी के व्यवहार पर नज़र रखना, उस पर स्वयं की इच्छा को थोपना और रिश्ते में समान भागीदारी को खत्म कर नियत्रंण बनाना, ताकतवर साथी द्वारा सारे फैसले लेना एक भावनात्मक रिश्ते में हिंसा के प्राथमिक चरण हैं। ऐसी बातें अक्सर प्यार और स्नेह के नामपर नजरअंदाज कर दी जाती हैं लेकिन इस तरह के व्यवहार से बात आगे बढ़ती है और शोषण का तरीका शारीरिक चोट और मानसिक स्वास्थ्य आघात तक आ जाता है। अंतरंग साथी हिंसा में शारीरिक शोषण का सामना अधिकतर महिलाएं ही करती हैं। उन्हें कमज़ोर मानकर एक पुरुष उनके शरीर को चोट पहुंचाता है।

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शादी, डेटिंग या लिव-इन रिलेशनशिप में एक साथी का दूसरे साथी को शारीरिक, मानसिक या यौन आघात पहुंचाना अंतरंग साथी हिंसा (इंटिमेट पार्टनर वायलेंस) कहलाता है। एक साथी द्वारा दूसरे की शारीरिक स्वतंत्रता को खत्म करना, उसके साथ जबरदस्ती करना और उस पर स्वामित्व स्थापित करना इंटिमेट पार्टनर वायलेंस है।

यौन हिंसा : साथ रह रहे एक जोड़े में से किसी भी लिंग का साथी दूसरे साथी के साथ ऐसा अनुचित यौन व्यवहार करे जिसमें उसकी सहमति न हो वह यौन हिंसा की श्रेणी में आता है। दुनियाभर में महिलाओं के साथ किया जाने वाला यह आम दुर्व्यवहार है। निजी रिश्ते में एक पुरुष का अपनी महिला साथी के साथ शारीरिक जबरदस्ती करना, उसकी इच्छा के खिलाफ जाकर उससे यौन संबंध बनाना, उसके शरीर को नौचना और काटना, यौन संबंध बनाने के दौरान सुरक्षित सेक्स साधन अपनाने से मनाही, प्रजनन अधिकार छीनना, गर्भनिरोधक के सेवन से रोकना और उसके साथ इन सब बातों पर उसके साथ मारपीट करना अंतरंग रिश्ते में की जाने वाली यौन हिंसा है। महिला के साथ उसका पति और साथी जबरन यौन-संबंध बनाता है तो वह शर्म और डर के कारण इस बात को खुलकर स्वीकार ही नहीं कर पाती है। पितृसत्तात्मक जड़ों पर आधारित भारतीय समाज मे तो रीति-रिवाज के आधार पर कानूनी तौर पर मैरिटल रैप आज भी वैध है। शादी की संस्था में जबरन अपनी पत्नी के साथ यौन संबंध बनाने की पति को पूरी छूट होती है।  

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पीछा करना : किसी भी अंतरंग रिश्ते में अपने पार्टनर पर नज़र बनाए रखना, अपने साथी के काम पर नज़र रखना, उसकी हर गतिविधि का उससे हिसाब लेना, विश्वास की कमी होना, सुरक्षा के नाम पर उसको बाहर न जाने देना भी हिंसा और शोषण के तरीके हैं। इसके अलावा किसी साथी जिसके साथ पूर्व में अंतरंग रिश्ता रहा हो और उसका लगातार पीछा (स्टॉकिंग) करना भी एक हिंसा है। पहले साथ रह रहे साथी को लगातार टेक्स्ट मेसेज, फोन कॉल करना, उसको बेवजह लगातार उपहार देना, उस स्थान पर अचानक से पहुंचना जहां वह अक्सर जाती है यह भी शोषण का एक तरीका है, जो साथी की निजी स्वतंत्रता व मानसिक चेतना को ठेस पहुंचाता है।

मानसिक शोषण : मौखिक और भावनात्मक रूप से किया गया दुर्व्यवहार भी वह व्यवहार है जिसके द्वारा किसी रिश्ते में बंधे साथी का शोषण किया जा सकता है। उसके व्यवहार को नियंत्रित करना, भावनाओं को दरकिनार करना, पंसद और नापंसद की आलोचना करना और उसकी राय को नज़रअंदाज करने वाला आचरण के परिणाम शरीर पर न दिखे लेकिन इसके आघात बहुत गहरे होते हैं। साथी की गरिमा को ठेस पहुंचाना उसका हनन करना मानसिक स्वास्थ्य पर बहुत बुरा असर डालते हैं। रिश्ते में बात-बात पर साथी का मजाक उड़ाना उसे कमतर मानने वाला व्यवहार करना उसके आत्मविश्वास को कम करता है। इन सब बातों का सीधा असर मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है व डिप्रेशन जैसी बीमारी से पीड़ित हो जाती है।

किसी भी अंतरंग रिश्ते में अपने पार्टनर पर नज़र बनाए रखना, अपने साथी के काम पर नज़र रखना, उसकी हर गतिविधि का उससे हिसाब लेना, विश्वास की कमी होना, सुरक्षा के नामपर उसको बाहर न जाने देना भी हिंसा और शोषण के तरीके हैं।

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अंतरंग साथी हिंसा एक बहुत ही गंभीर और हमारे सामाज में सामान्य होने वाली हिंसा है। किसी भी अंतरंग रिश्ते में लंबे समय तक होने वाला दुर्व्यवहार न केवल दोंनो अंतरंग साथी के जीवन को प्रभावित करता है बल्कि वह स्वास्थ्य को भी हानि पहुंचाता है। भारतीय रूढ़िवादी समाज में तो पति को देवता की पदवी देकर पत्नी को उसकी दासी माना जाता रहा है। पति की हर इच्छा पूरा करना पत्नी का कर्तव्य होता है। एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में हर तीसरी महिला अपने अंतरंग रिश्ते में किसी न किसी हिंसा का शिकार हुई है। पति व पार्टनर के द्वारा की गयी यौन हिंसा महिलाओं के प्रति ज्यादा है। सर्वाइवर दस महिलाओं में से मात्र एक ही चिकित्सक या पुलिस अधिकारी के पास जाकर इस तरह की बात कबूल कर पायी है। लैंगिक भेदभाव पर आधारित हिंसा भारत के परिवेश में बहुत सामान्य है। एक मनुष्य के साथ उसके लैंगिक पहचान के आधार पर किया जाने वाला दुर्व्यवहार की घटना पर सामाजिक प्रतिक्रिया बिल्कुल सामान्य होती है।  

विश्व स्वास्थ्य संगठन की इसी वर्ष की रिपोर्ट के अनुसार दुनिया की 736 मिलियन महिलाओं में से हर तीन में से एक महिला हिंसा और शोषण का सामना करती है। युवा महिलाएं अपने रिश्तों में ज्यादा हिंसा का सामना करती हैं। इस रिपोर्ट के अनुसार किसी रिश्ते में रहने वाली 15 से 24 साल की उम्र वाली एक चौथाई युवतियों ने अपने रिश्ते में इंटिमेट पार्टनर वायलेंस का सामना किया है। दुनियाभर में 641 मिलयन से अधिक महिलाएं अंतरंग साथी द्वारा हिंसा से प्रभावित हैं। महिलाओं के खिलाफ हिंसा का यह सबसे अधिक व्याप्त रूप बताया गया है। दूसरी ओर यौन हिंसा और दुर्व्यवहार के सभी मामले दर्ज न हो पाने और पितृसत्तात्मक सोच की वजह से इन मामलों की वास्तविक संख्या इससे कहीं ज्यादा हो सकती हैं। इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कोविड-19 महामारी के लॉकडाउन की वजह से महिलाओं को साथी के द्वारा की जाने वाली यौन हिंसा का अधिक सामना करना पड़ा। WHO के महानिदेशक टेड्रोस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने कहा है कि कोविड-19 के उलट महिलाओं के खिलाफ होने वाली हिंसा को एक वैक्सीन के ज़रिये नहीं रोका जा सकता है। इसे केवल सरकार, समुदाय और व्यक्ति के निजी तौर पर किये कड़े सतत प्रयासों से ही दूर किया जा सकता है।  

मानव संस्कृति का एक कड़वा सच है हिंसा। महिलाओं के खिलाफ होने वाली हिंसा विश्वभर में व्याप्त है। महिला हिंसा विश्व पटल पर एक लाइलाज बीमारी की तरह बनी हुई है जिसका वक्त के साथ प्रारूप और अधिक क्रूर होता जा रहा है। हिंसा की रोकथाम के लिए एक प्रणाली के तहत सामाजिक सोच के ढ़ांचे में परिवर्तन लाकर ही लैंगिक हिंसा को रोका जा सकता है। वहीं, रिश्तों में स्थित हिंसा को वर्चस्व व ताकत जैसे भाव को खत्म कर लैंगिक भेदभाव पर आधारित व्यवहारों में परिवर्तन कर ही बदलाव लाया जा सकता है।

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तस्वीर साभार : Intermountain healthcare

मैं पूजा राठी पश्चिमी उत्तर-प्रदेश के मुज़फ़्फ़रनगर की रहने वाली हूँ। अपने आसपास के माहौल मे फ़िट नहीं बैठती हूँ।सामाजिक रूढ़िवाद, जाति-धर्मभेद, असमानता और लैंगिक भेद में गहरी रूचि है। नारीवाद व समावेशी विचारों की पक्षधर हूँ। खुद को एक नौसिखिया मानती हूँ, इसलिए सीखने की प्रक्रिया हमेशा जारी रखती हूँ।

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