समाजराजनीति रेणुका चौधरी: राज्यसभा उम्मीदवार और कांग्रेस की मुखर नेत्री

रेणुका चौधरी: राज्यसभा उम्मीदवार और कांग्रेस की मुखर नेत्री

साल 1998 के अंत में, रेणुका ने टीडीपी छोड़ दी और कांग्रेस में शामिल हो गईं। अगले वर्ष, उन्होंने खम्मम से लोकसभा चुनाव लड़ा और अगले 10 वर्षों तक निचले सदन में निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। चौधरी उन दुर्लभ राजनेताओं में से हैं जिन्होंने आंध्र प्रदेश से होने के बावजूद तेलंगाना की राजनीति में अपनी जगह बनाई।

भारत में, महिलाओं की राजनीतिक जागरूकता सदैव एक चर्चित विषय रहा है, जिसे सामाजिक तौर से लोगों ने काफ़ी हद तक अस्वीकार्य किया। लेकिन भारत में कई महिला राजनेता उभरी हैं जो सशक्त और सकारात्मक रूप से राजनीति में योगदान करती दिखी हैं। महिलाओं ने कई राजनीतिक उतार-चढ़ाव देखे लेकिन वे कभी नहीं रुकी। उन्होंने हमेशा संघर्ष किया और राजनीतिक परिदृश्य में अपना स्थान बनाने के लिए लड़ती रहीं। भारतीय राजनीति के इतिहास के बारे में बात करते हुए हमें रज़िया सुलताना, झाँसी की रानी, इंदिरा गांधी, जयललिता, ममता बनर्जी जैसी प्रमुख महिलाओं को याद करना चाहिए।

दूसरी ओर, यदि हम महिलाओं के राजनीतिक योगदान और कांग्रेस को जोड़ें, तो यह देश की उन्नति में अद्वितीय है। इसने अपने शुरुआती दौर में कई महिलाओं को राजनीति में आकर्षित किया, जिस में कमला नेहरू, अन्नी बसंत, कस्तूरबा गांधी, अरुण आसफ आली जैसी महिलाएं शामिल हैं। इसके अलावा आज के दिनों में कांग्रेस पार्टी की प्रमुख नेत्रियों में रेणुका चौधरी एक उभरता नाम हैं। इन्होंने आंध्र प्रदेश से राज्यसभा में कांग्रेस का प्रतिनिधित्व किया। रेणुका भारत सरकार में महिला एवं बाल विकास और पर्यटन मंत्रालय के केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) के रूप में भी काम किया है।

रेणुका का जन्म

रेणुका चौधरी का जन्म 13 अगस्त, 1954 में विशाखापटनम के मदनपल्ली में हुआ। वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की सदस्य हैं। उनकी प्रारंभिक शिक्षा वेलहैम गर्ल्स स्कूल, देहरादून से हुई। इसके बाद उन्होंने बैंगलोर विश्वविद्यालय से इंडस्ट्रियल साइकोलॉजी में बी.ए. की डिग्री हासिल की। रेणुका का जन्म 13 अगस्त 1954 को आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में एयर कमोडोर सूर्यनारायण राव और वसुंधरा के घर हुआ।

राजनीतिक जीवन में पहल

साल 1984 में रेणुका ने तेलुगु देसम पार्टी के सदस्य के रूप में राजनीति में कदम रखा। उन्होंने 1986 से 1998 तक राज्यसभा के सदस्य के रूप में लगातार दो कार्यकाल का अनुभव प्राप्त किया और तेलुगु देसम पार्लियामेंटरी पार्टी के मुख्य व्हिप भी रहीं। 1997 से 1998 तक, उन्होंने एच. डी. देवेगौड़ा की कैबिनेट में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण के लिए केंद्रीय स्थानीय मंत्री का कार्य भी संभाला। उनके इस पद पर कार्यकाल ने उनके भविष्य के स्वास्थ्य और महिला कल्याण के क्षेत्र में योगदान के लिए नींव रखने में मदद की। साल 1998 के अंत में, रेणुका ने टीडीपी छोड़ दी और कांग्रेस में शामिल हो गईं। अगले वर्ष, उन्होंने खम्मम से लोकसभा चुनाव लड़ा और अगले 10 वर्षों तक निचले सदन में निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। चौधरी उन दुर्लभ राजनेताओं में से हैं जिन्होंने आंध्र प्रदेश से होने के बावजूद तेलंगाना की राजनीति में अपनी जगह बनाई। साल 1999 और 2004 में, वह खम्मम का प्रतिनिधित्व करते हुए 13वीं और 14वीं लोकसभा के लिए चुनी गईं। अन्य पदों में रेणुका साल 1999-2000 में वित्त समिति और 2000–2001 में महिला सशक्तिकरण समिति की सदस्य भी रहीं।

राज्य सभा में वापसी

मई 2004 में उन्होंने कांग्रेस सरकार में पर्यटन विभाग में स्वतंत्र प्रभार स्थानीय मंत्री का कार्य संभाला। जनवरी 2006 से मई 2009 तक, उन्होंने कांग्रेस सरकार में महिला और बाल विकास मंत्री के रूप में स्वतंत्र प्रभार स्थानीय मंत्री भी रहीं। भले ही यूपीए मजबूती से सत्ता में लौट आई, लेकिन रेणुका खम्मम से टीडीपी के नामा नागेश्वर राव से हार गई थीं। लेकिन थोड़े अंतराल के बाद, वह पार्टी की प्रवक्ता बनीं और 2012 में राज्यसभा के लिए फिर से चुनी गईं। उन्होंने 2014 में संसदीय चुनाव नहीं लड़ा, लेकिन 2019 में उन्होंने फिर से अपनी किस्मत आजमाई। वह फिर से राव से हार गईं, जिन्होंने तेलंगाना राष्ट्र समिति से चुनाव लड़ा था। बाद में रेणुका ने कांग्रेस के लिए वक्ता बनने का कार्य संभाला और 2012 एवं 2024 में तेलंगाना से राज्यसभा में दोबारा चयन कर आईं।

सामाजिक कार्य और विदेश में नाम

रेणुका अपने राजनीतिक सफलता के साथ-साथ विभिन्न सामाजिक क्षेत्रों में भी योगदान दिया है। जैसेकि शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास। रेणुका चौधरी का योगदान भारतीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण और प्रभावशाली नेता के रूप में है, जिन्होंने सामाजिक न्याय और समृद्धि की दिशा में कई कदम उठाए हैं। रेणुका चौधरी की पहुंच भारत की सीमाएं पार करता है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र हाई कमीशन और कॉमनवेल्थ पार्लियामेंटरी एसोसिएशन यूनाइटेड किंगडम के चयन किए गए युवा राजनीतिक नेताओं की प्रतिनिधि मंडल का हिस्सा बनी और लंदन गई जहां उन्होंने वहां के लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को समझने और अध्ययन करने का अवसर प्राप्त किया।

फरवरी 2017 में, उन्होंने मेलबर्न, ऑस्ट्रेलिया में एक घटना के दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था पर नोटबंदी के प्रभाव के बारे में बात की। उनके विदेशी योजनाएं ने उनकी ग्लोबल आर्थिक मुद्दों पर नियंत्रण और उनकी क्षमता को प्रस्तुत करने की सामर्थ्य को दिखाया, जो उन्हें एक अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का प्रतिष्ठान दिखाने की योग्यता को दर्शाता है।

रेणुका की सांसदीय समिति और नेतृत्व भूमिकाएं

अपने राजनीतिक करियर के दौरान, रेणुका चौधरी ने विभिन्न सांसदीय समितियों के योजनाओं में शामिल होकर अपना दृष्टिकोण और योगदान दिया। उनकी पदें निम्नलिखित शामिल हैं:

– सदस्य, वित्त समिति (1999-2000)
– सदस्य, महिला सशक्तिकरण समिति (2000-2001)
– सदस्य, सरकारी प्रतिबद्धताओं समिति (मई 2012 – सितंबर 2014)
– सदस्य, वित्त समिति (मई 2012 – मई 2014)
– सदस्य, व्यापार सुझावी समिति (मई 2013 – सितंबर 2014)
– सदस्य, कृषि समिति (सितंबर 2014–वर्तमान)
– सदस्य, हाउस समिति (सितंबर 2014–वर्तमान)
– सदस्य, सामान्य उद्देश्य समिति (अप्रैल 2016 – वर्तमान)
– अध्यक्ष, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, पर्यावरण और वन्यजन समिति (अप्रैल 2016 – 2018)

राज्यसभा में शानदार वापसी

हाल ही में, रेणुका ने अपनी राजनीतिक वापसी की घोषणा की है, जिससे वह फिर से चर्चा का केंद्र बन गई हैं। इस छह वर्ष के अंतराल के दौरान, रेणुका ने अपनी राजनीतिक गतिविधियों के माध्यम से अपनी पहचान बनाए रखी है। इस परिप्रेक्ष्य में, लोकसभा चुनाव से पहले, कांग्रेस ने सामाजिक न्याय की सुनिश्चितता के लिए, रेणुका को राज्यसभा के लिए अपने उम्मीदवार के रूप में चुना है। रेणुका चौधरी, जो खम्मम और हैदराबाद क्षेत्रों में एक प्रमुख कृषि समुदाय की नेतृत्व संभाल रही हैं, उनको टिकट देकर कांग्रेस ने विपक्ष के पार्टियों के सामने एक मजबूत नेतृत्व सुझाया है। हाल के विधानसभा चुनावों और पिछले ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम (जीएचएमसी) चुनावों में, हैदराबाद एक चुनौतीपूर्ण क्षेत्र रहा है जिसे पार्टी ने जीता नहीं है। रेणुका चौधरी को चुनने से कृषि समुदाय को राहत मिलने की उम्मीद है।

उन्होंने गांधी भवन में मीडिया से बातचीत की थी, जहां उन्होंने संसद के उच्च सदन में चयन प्रमाणपत्र जमा करने के बाद राज्यसभा के लिए उन्हें कांग्रेस की उच्च कमान के लिए कृतज्ञता व्यक्त करते हुए, रेणुका चौधरी ने राज्य के नेतृत्व और जनता का भी आभार व्यक्त किया। रेणुका चौधरी की भारतीय राजनीति में यात्रा एक सार्वजनिक सेवा के प्रति उनके अडिग प्रतिबद्धता का प्रमाण है। उनका तेलुगु देसम पार्टी से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में परिवर्तन, उनकी बतौर मंत्री भूमिकाएं, और सांसदीय समितियों में उनकी सक्रिय भागीदारी उनके समर्पण को दिखाती हैं, जो महिलाओं, बच्चों, और समाज को पूरे के पूरे संबंधित मुद्दों का समाधान करने में कारगर है। उनकी स्पष्ट और मुखर भाषा भारत को सार्वभौमिक मंच पर प्रतिष्ठित बनाती हैं, जिससे उनका व्यक्तित्व और उभर कर सामने आता हैं।  

रेणुका ने अतीत में कई बार ‘नैतिक पुलिस’ को आड़े हाथों लिया है, और ऐसी ताकतों को ‘तालिबानीकृत’ कहा है जिन्होंने वेलेंटाइन डे समारोह का विरोध किया था। उन्होंने महिलाओं की गरिमा को अपमानित करने वाली कथित टिप्पणियां करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू पर भी टिप्पणी की और सेक्सिस्ट टिप्पणियां करने वाले राजनीतिक नेताओं की आलोचना भी की है।

About the author(s)

अतिका कलकत्ता शहर की रहनेवाली है। उन्होंने हाल ही में कलकत्ता विश्वविद्यालय से भाषाविज्ञान में मुख्य डिग्री के साथ स्नातक किया है। वह पत्रकारिता में रुझान रखती है और उन्हें खेल-कूद करना बेहद पसंद है। उन्हें नए चीज़ों की खोज करने और आजमाने में मज़ा आता है। उन्हें खाली समय में चिट्ठी लिखना बेहद पसंद है। वे अक्सर ऐसा करती है। इसके अलावा उन्हें हिंदी, अंग्रेज़ी और उर्दू साहित्य और पुराने गाने और ग़ज़ल सुनने का शौक़ है। उन्हें आप अक्सर कलकत्ते की आवारा सड़कों पर बेताबी से घूमते हुए पा सकते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

संबंधित लेख

Skip to content